Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Jul 02 2021

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट

वर्तमान परिदृश्य

(i) 1 फरवरी, 2021 को म्यांमार में जब नवनिर्वाचित संसद का सत्र शुरू होने वाला था तभी सेना ने देश की सर्वोच्‍च नेता एवं नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) की अध्यक्ष आंग सान सू की को गिरफ्‍तार कर लिया।
(ii) सूची के साथ-साथ म्यांमार के राष्ट्रपति विन मिंट एवं अन्य प्रमुख नेताओं को भी गिरफ्‍तार कर लिया गया है।
(iii) तख्तापलट की अगुवाई करने वाले म्यांमार सेना के जनरल मिन आंग हाइंग ने देश में एक साल का आपातकाल लगा दिया है, साथ ही इस दौरान देश के काम-काज को संभालने के लिए ग्यारह (11) सदस्यों की एक सैन्य समिति गठित की है।
(iv) यह म्यांमार में कुल तीसरा सैन्य शासन है (1962,1988 एवं 2021)

तख्तापलट का कारण

(i) सेना ने आरोप लगाया है कि नवंबर, 2020 में सम्पन्‍न चुनाव में धांधली हुई है। जिसमें आंग सान सू ची की पार्टी NLD ने लगभग 80 प्रतिशत सीटों पर कब्जा कर लिया।
(ii) वहीं सेना समर्थित यूनियन रगेलीडेरीटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) को गंभीर हार का सामना करना पड़ा।
(iii) म्यामांर के यूनियन इलेक्शन कमीशन ने चुनाव में किसी प्रकार की धांधली के आरोपों को आधारहीन बताया है।
(iv) आंग सान सू की पर दूसरा आरोप आयात-निर्यात के मानदंडों के उल्‍लघंन का है साथ गैर-कानूनी संचार उपकरण रखने का भी आरोप है।
(v) राष्ट्रपति विन मिंट पर आरोप है कि उन्‍होंने कोविड-19 नियमों का उल्‍लंघन किया।

पृष्ठभूमि

(i) म्यांमार को 1948 में ब्रिटिश अधीनता से स्वतंत्रता प्राप्त हुई। परंतु 1962 मंे वहां सेना द्वारा तख्तापलट कर दिया गया जो 2011 तक चलता रहा।
(ii) 2010 में सेना द्वारा 2008 में निर्मित संविधान के आधार पर चुनाव कराने का फैसला लिया गया तथा इस दौर को सैन्य शासन से लोकतंत्र की ओर संक्रमण का दौर माना गया।
(iii) यद्यपि की सू की को नजरबंदी से मुक्ति मिली परंतु उनकी पार्टी NLD ने चुनाव का बहिष्कार करते हुए चुनाव में भाग नही लिया। सैन्य समर्थित दल USDP ने चुनाव जीत लिया।
(iv) पुन : 2015 में चुनाव संपन्‍न करवाया गया और सेना की तरफ से नरमी, अंतरराष्ट्रीय दबाव आदि कारणों से NLD ने चुनाव में भाग लिया तथा बड़ी जीत दर्ज की।
(v) यद्यपि NLD की बड़ी जीत के बाद भी सू ची राष्ट्रपति नही बन सकी क्योंकि 2008 में निर्मित संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति के पास सैन्य अनुभव होना चाहिए, साथ ही राष्ट्रपति या उनकी पत्नी/पति अथवा बच्‍चों में से कोई विदेशी नागरिक नही होना चाहिए। जबकि सू ची के दो बच्‍चे ब्रिटिश नागरिक हैं।
(vi) इस संविधान के अनुसार संसद की कुल सीटों में 25 प्रतिशत सीट सेना के लिए आरक्षित होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त रक्षा ओर आंतरिक सुरक्षा से संबंधित विभाग भी सेना के लिए आरक्षित है।
(vi) उपर्युक्त विकास एवं प्रावधान सैन्य शासन की सीमा में लोकतंत्र के विकास को छूट देते नजर आते है जो संपोषणीय लोकतंत्र को बढ़ावा नहीं दे सकता।

सैन्य तख्तापलट का म्यांमार पर प्रभाव

(i) लोकतंत्र के विकास का अवरुद्ध होना
(ii) नागरिक एवं मानवाधिकारों का हनन
(iii) आर्थिक गतिविधियों का प्रभावित होना
(iv) वैश्विक प्रतिबंधों की आशंका

सैन्य तख्तापलट वैश्विक विचार

अमेरिका एवं पश्चिमी देशों ने म्यांमार में तख्तापलट की आलोचना की है और प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है जबकि म्यांमार के पड़ोसी देशों कम्बोडिया, थाइलैंण्ड और फिलीपींस ने इसे आंतरिक मामला घोषित किया है। वहीं चीन ने संविधान एवं कानूनी ढांचे के अंतर्गत समस्या समाधान की बात कही है।

म्यांमार में तख्तापलट और भारत

म्यांमार में तख्तापलट के तुरंत बाद भारत की प्रतिक्रिया आई जिसमें तख्तापलट को ‘गंभीर मुद्दा’ मान गया। परंतु भारत की यह प्रतिक्रिया पश्चिमी देशों की तरह नही रही क्योंकि भारत के निम्नलिखित हित म्यांमार से जुड़े है।

(i) भू-राजनीतिक हित
(क) भारत 1643 किमी की सीमा साझा करता है म्यांमार से साथ ही बंगाल की खाड़ी में भी दोनों के हित है।
(ख) भारत म्यांमार को दक्षिणपूर्व एशिया में अपने द्वारा के रूप में देखता है।
(ग) उत्तर पूर्व के राज्यों में उग्रवाद को नियंत्रित करने में म्यांमार भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्‍यांेकि कई उग्रवादी संगठनों को केंद्र म्यांमार में है जिन्हें हथियार प्राप्त होते हैं
(घ) चीन को प्रतिसंतुलित करने के लिए म्यांमार के साथ भारत का बेहतर सहयोग आवश्यक है।

आर्थिक

(क) भारत ने म्यांमार महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं मंे निवेश किया हुआ है जैसे म्यांमार के राखीन प्रांत में सित्‍वे बंदरगाह का संचालन एवं रखरखाव जिससे उत्तरपूर्व में माल परिवहन बेहतर होगा।
(ख) कलादान मल्‍टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट कालादान नदी पर (जल समुद्र नदी एवं सड़क दोनों से जुड़ा है)
(ग) भारत-म्यांमार -थाइलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग (मोरेह-बागान-मोस)
(घ्) म्यांमार के अपतटीय तेल एवं प्राकृतिक गैसे भण्डार भारत की ऊर्जा समस्या के समाधान में सहायक

अन्य

(i) भारत एवं म्यांमार के बीच कुछ रक्ष्ा खरीद समझौते भी हुए है। अभी हाल ही में भारत ने म्यांनमार को किलो-श्रेणी की INS सिंधीवीर उपहार स्वरूप देने की घोषणा की।
(2) 22 जनवरी को भारत सरकार ने म्यांमार को कोवीशील्ड वैक्सीन की 15 लाख डोस कोरोना महामारी से बचाव हेतु प्रदान की।

क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध

(i) म्यामार BIMSTEC (वे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एवं इकोनॉमिक को-ऑपरेशन) का सदस्य है जिसमें भारत, भूटान, नेपाल, बंग्‍लादेश, श्रीलंका तथा थाइलैंड अन्य सदस्य राष्ट्र है। यह संगठन सार्क के प्रतिस्थापन एवं क्षेत्रीय व्यापार एवं सहयोग के विकास के लिए आवश्यक हो तथा म्यामनमार इसका महत्वपूर्ण सदस्य है।
(ii) आसियान (ASEAN) भारत की लुक इस्ट नीति का महत्वपूर्ण सदस्य है। जो भारत के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है।

निष्कर्ष

  • यद्यपि की म्यांनमार में सैन्य शासन है लोकतंत्र समाप्त हो चुका है और भारत एक लोकतांत्रिक देश होने के कारण लोकतंत्र का समर्थक है । परंतु म्यांमार से हमारे कई हित जुड़े हुए है इस कारण जहाँ की सरकार से भारत का बेहतर संबंध होना आवश्यकत है।

Comments
List view
Grid view

Current News List