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Post at: Jul 02 2021

जलवायु परिवर्तन से निपटने में MGNREGA की भूमिका

वर्तमान परिदृश्य-

  • एक जलवायु-स्मार्ट मनरेगा शमन और अनुकूलन दोनों ही स्थितियों में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह जलवायु संकट के कारण उत्‍पन्‍न होने वाले खतरों को कम करने के साथ-साथ गरीब परिवारों को कानूनी तौर पर अनिवार्य मांग-संचालित रोजगार उपलब्ध कराता है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु-

  • भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। मनरेगा भारत की जलवायु परिवर्तनशील विकास को लागत प्रभावी तरीके से बदलने में सक्षम है।
  • मनरेगा एक ग्रामीण आबादी पर केंद्रित योजना है जो बॉटम-अप अप्रोच पर आधारित है। इसके तहत विभिन्‍न्‍ा कार्य कराए जाते हैं, जो प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा कृषि संबंधित गतिविधियों से जुड़े हैं। इनमें से अधिकांश कार्य जलवायु अनुकूलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
  • वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा के तहत खर्च होने वाले कुल धन का लगभग 66 प्रतिशत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM ) से जुड़े हुए कार्यों पर खर्च किया गया है।
  • मनरेगा के द्वारा भू-जल स्तर में वृद्धि, वृक्षारोपण में वृद्धि, मृदा-उर्वरता को बढ़ाने, बाढ़ और सूखा आदि जैसी समस्याओं से निपटने से संबंधित कार्य किए जाते हैं, जिसके कारण इसके माध्यम से जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करने में मदद मिलती है।
  • हाल ही के अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि मनरेगा दुनिया का सबसे बड़ा अनुकूलन कार्यक्रम है, क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में वृद्धि हेतु मानव श्रम का उपयोग करता है।
  • जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने हेतु भारत को तीन लक्ष्यों की पूर्ति करनी आवश्यक है-

(1) गैर-जीवाश्म ईंधन से कम-से-कम 40 प्रतिशत विद्युत ऊर्जा के निर्माण की क्षमता का विकास ।
(2) 2005 की तुलना में 33-35 प्रतिशत की उत्‍सर्जन में कटौती ।
(3) 2.5-3 बिलियन टन के कार्बन सिंक का निर्माण।

  • उपर्युक्त लक्ष्यों में से प्रथम दोनों लक्ष्य पूर्ण होने के करीब हैं, लेकिन तीसरे लक्ष्य प्राप्‍त करने अभी कठिन हैं।
  • भारत सरकार द्वारा जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्‍वेंशन के लिए प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 में मनरेगा द्वारा 62 मिलियन टन कार्बन डाइआॅक्‍साइड के बराबर कार्बन पृथक्‍करण का आकलन किया गया था।

अन्‍य महत्‍वपूर्ण बिंदु-

मनरेगा- इसका पूरा नाम महात्‍मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम है।

  • इसे 7 सितंबर, 2005 को विधान द्वारा अधिनियमित किया गया था। यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है।

आगे की राह– मनरेगा में वृहद स्तर पर जनजागरण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर आजीविका को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत तथा ब्लाॅक स्तर पर बड़े पैमाने पर क्षमता सृजन की आवश्यकता है।

  • सरकार को मनरेगा के माध्यम से वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम को बढ़ावा देना चाहिए। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष-ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रामीण परिवारों (विशेषकर गरीब ग्रामीण परिवारों) पर इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। इस समस्या के समाधान हेतु ‘विकेंद्रीकृत जलवायु सहायता’ जैसे कार्यक्रम अर्थात गांव के स्तर पर जलवायुवीय समस्याओं से संबंधित कार्यक्रम एक उचित तथा प्रभावी कदम हो सकता है।

लेखक – अरविंद कुमार पाण्डेय


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