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Post at: Nov 25 2022

भारत-जापान 2+2 वार्ता

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • सितंबर, 2022 में दूसरी ‘भारत-जापान 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता’ (India-Japan 2+2 Ministerial Dialogue) का आयोजन टोक्यो, जापान में किया गया।
  • इस रक्षा एवं विदेश मंत्रिस्तरीय वार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व राजनाथ सिंह (रक्षा मंत्री) एवं एस. जयशंकर (विदेश मंत्री) और जापान का प्रतिनिधित्व यासुकाजू हमादा (रक्षा मंत्री) एवं योशिमासा हयाशी (विदेश मंत्री ) द्वारा किया गया।

परिचय

  • भारत-जापान ने वर्ष 2018 में 2+2 वार्ता आयोजित करने का फैसला लिया था।
  • विदित हो कि नवंबर, 2019 में इस वार्ता के पहले संस्करण का आयोजन नई दिल्‍ली में किया गया था।
  • यह वार्ता रणनीतिक एवं सुरक्षा मुद्दों पर भारत तथा जापान के रक्षा एवं विदेश मंत्रियों की बैठक का एक प्रारूप है।ध्यातव्य है, कि वर्ष 2022 दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों (Diplomatic Relations) स्थापना का 70वां वर्ष है। 
  • उल्‍लेखनीय है, कि भारत द्वारा अपने चार प्रमुख रणनीतिक साझेदारों यथा-अमेरिका, रूस,जापान और ऑस्टेलिया के साथ ‘2+2 वार्ता’ आयोजित की जाती है।

वार्ता के प्रमुख निष्कर्ष

  • दोनों देशों ने एक ‘नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था’ (Rule based global order) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो राष्ट्रों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखण्डता का सम्मान करती है।
  • मंत्रियों ने आसियान (ASEAN)  की एकता और केंद्रीयता के लिए एवं ‘‘आसियान आउटलुक ऑन द इण्डो-पैसिफिक (AOIP)’’ हेतु अपने पूर्ण समर्थन को दोहराया। 
  • भारत ने ‘‘काउंटर स्ट्राइक क्षमताओं’’ (Counter Strike Capabilities) सहित अपने रक्षा बलों के विस्तार और आधुनिकीकरण की जापान की योजनाओं का समर्थन किया।
  • भारत ने भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘‘मिलन’’ (MILAN) में पहली बार जापान की भागीदारी का स्वागत किया।
  • इसके साथ ही अभ्यास में जापान के आत्मरक्षा बलों और भारतीय सशस्त्र बलों के मध्य ‘आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान’ के संबंध में समझौते के परिचालन का स्वागत किया।
  • इस वार्ता का एक प्रमुख परिणाम जापान और भारत के रक्षा कर्मचारियों के मध्य संयुक्त सेवा स्टाफ वार्ता (Joint Service Staff Talks) शुरू करने पर समझौता है।
  • इस वार्ता के तृतीय संस्करण का आयोजन भारत में किया जाएगा।

आगे की राह

  • दोनों राष्ट्र इस वर्ष कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो संबंधों को पुन: सक्रिय (re-energising) करने में सहायक है। इसके अतिरिक्त पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत निश्चित रूप से जापान के साथ रणनीतिक संबंधों में नए आयाम सुनिश्चित करेगा।

 

संकलन-आदित्य भारद्वाज
 


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