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चंजू-III एवं देवस्थल चंजू जलविद्युत परियोजना

जलविद्युत परियोजनाएं

  • जलविद्युत‚ ऊर्जा का एक अक्षय (Renewable) स्रोत है‚ जो नदी का प्रवाह‚ बांध (Dam) या पानी के अन्य निकाय के प्रवाह का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करता है। 
  • जलविद्युत परियोजनाएं बिजली उत्पन्न करने के लिए ईंधन के रूप में पानी का उपयोग करती हैं‚ जो जल चक्र (Water Cycle) की अंतहीन लगातार रिचार्जिंग प्रणाली पर निर्भर करता है।
  • जो इस प्रक्रिया में कम या समाप्त नहीं होता है।
  • सभी परियोजनाएं बहते पानी की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) द्वारा संचालित होती हैं‚ जलविद्युत उस गतिज ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करने के लिए टरबाइन (Tarbines) और जनरेटर (Generators) का उपयोग करता है।
  • जिसे बाद में बिजली घरों‚ व्यवसायों और उद्योगों को विद्युत ग्रिड (Grid) तक पहुंचाया जाता है।

स्थापित क्षमता के आधार पर जलविद्युत परियोजनाओं का वर्गीकरण

  • पनबिजली (Hydropower) परियोजनाओं को आमतौर पर दो खण्डों में वर्गीकृत किया जाता है - छोटे (Small) और बड़े (Large) जलविद्युत।
  • भारत में 25 मेगावॉट (MW) स्टेशन क्षमता तक की पनबिजली को लघु जलविद्युत परियोजनाओं (Small Hydro Project : SHP) परियोजनाओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है—
  • सूक्ष्म (Micro)  : 100 KW तक
  • लघु (Mini) : 101 KW से 2 MW 
  • छोटा (Small) : 2 MW से 25 MW
  • बृहद (Mega)     : स्थापित क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाएं 500 MW

संचालन

  • वर्ष 1989 से पूर्व मुख्य रूप से राज्य विद्युत बोर्डों की सहायता से जलविद्युत की देखरेख की जाती थी।
  • वर्ष 1989 में‚ 3 MW और उससे कम तक की संयंत्र क्षमता वाली परियोजनाएं ’नवीन और नवीनकरणीय ऊर्जा मंत्रालय’ (Ministry of New and Renewable Energy : MNRE) को हस्तांतरित कर दी गई थीं।
  • इसके बाद नवंबर‚ 1999 में एमएनआरई (MNRE) को 25 MW और उससे कम तक की संयंत्र क्षमता सौंपी गई।
  • जबकि विद्युत मंत्रालय‚ भारत सरकार बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के लिए जिम्मेदार है। 

 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 13 अक्टूबर‚ 2022 को प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल प्रदेश में दो जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई।
  • यह आधारशिला हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में रखी गई।

प्रमुख बिंदु

  • इन पनबिजली परियोजनाओं में शामिल हैं—

(i)    48 MW की चंजू (Chanju) - III पनबिजली परियोजना
(ii)    30 MW की देवथल चंजू (Deothal Chanju) पनबिजली परियोजना

  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार‚ इन दोनों परियोजनाओं से वार्षिक 270 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन होगा।
  • राज्य को इन परियोजनाओं से लगभग 110 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।
  • ये दोनों रन ऑफ रिवर जलविद्युत परियोजनाएं हैं।
  • इन परियोजनाओं की स्थापना से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में चंबा जिले की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

 

  • इन परियोजनाओं का निर्माण और संचालन हिमाचल प्रदेश ऊर्जा कॉर्पोरेशन लि. (Himachal Pradesh Energy Corporation Limited : HPPCL) द्वारा किया जाएगा।

भारत में जलविद्युत क्षमता

  • विद्युत मंत्रालय के अनुसार‚ 30 सितंबर‚ 2022 तक भारत की कुल विद्युत स्थापित क्षमता 4,07, 797 MW (जीवाश्म + गैर-जीवाश्म) है।
  • जिसमें लघु जल ऊर्जा 4,899 MW (कुल विद्युत स्थापित क्षमता का 1.2 प्रतिशत) है।
  • बृहद जल ऊर्जा 46,850 MW (कुल विद्युत स्थापित क्षमता का 11.5 प्रतिशत) है।

संकलन - पंकज तिवारी


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