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Post at: Nov 22 2022

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2022

हुआयामी गरीबी का अभिप्राय

  • अधिकांश देशों द्वारा वर्ष 2010 के पहले तक गरीबी को प्राय: धन की कमी के रूप में ही परिभाषित किया जाता था; किंतु गरीबी की स्थिति में जीने वाले लोगों ने गरीबी का इससे अधिक व्यापक परिप्रेक्ष्य में अनुभव किया है। 
  • उन्‍हें गरीबी की वजह से अनेकानेक प्रतिकूल स्थितियों से भी गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से उनका स्वास्थ्य, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षिक विकास प्रभावित होता है। इन सब वजहों से वे गरीबी के दुष्चक्र से निकल ही नहीं पाते। 
  • अत:, केवल आय (धन) पर ही विचार केंद्रित करना तथा गरीबी के अन्य कारणों की उपेक्षा करना, गरीबी की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए पर्याप्त नहीं है।
  • अत:, गरीबी का बहुआयामी आधारों पर मापन करने से इसका अधिक व्यापक चित्र्‍ा प्रस्तुत किया जा सकता है। बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty: MP) बताती है, कि गरीब कौन हैं और वे कैसे गरीब हैं ? वे किन-किन क्षेत्रों में प्रतिकूल स्थितियों का सामना कर रहे हैं ?  देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में तथा विभिन्‍न उप-समूहों के बीच गरीबी के स्तर को प्रकट करने में भी बहुआयामी गरीबी के मापन के लिए प्रयुक्त पैमानों का उपयोग किया जा सकता है।

बहुआयामी गरीबी सूचकांक

  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक का विकास वर्ष 2010 में ‘ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल’ (OPHI: Oxford Poverty & Human Development Initiative) तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय (HDRO) द्वारा किया गया था।
  • OPHI तथा UNDP ने ‘अल्‍कीरे-फॉस्टर विधि’ (Alkire-Foster Method) का विकास बहुआयामी गरीबी के मापन के लिए किया है।
  • सभी के लिए एक बेहतर तथा अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से वर्ष 2015 में 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को अपनाया गया।
  •  SDG के अंतर्गत लक्ष्य-1 वर्ष 2030 तक विश्व से गरीबी के संपूर्ण तथा सभी रूपों के उन्‍मूलन से संबंधित है।
  •  SDG-1 को प्राप्त करने की दिशा में हो रही प्रगति को मापने का एक साधन ‘‘वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक’’ है।
  • वर्ष 2010 से वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index : MPI)  विश्व के 100 से अधिक देशों में (जो वैश्विक जनसंख्या के 76 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं) गरीबी की तीव्र या वीभत्स (Acute) स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करता है।
  • MPI प्रत्येक व्यक्ति की वंचनाओं (Deprivations) की तीन आयामों में विभक्त 10 संकेतकों के माध्यम से गणना करता है।
  •  ये आयाम हैं-स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर।

MPI, 2022

  • 17 अक्टूबर, 2022 को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) तथा ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से ‘‘वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2022’’ प्रकाशित किया गया।
  • इस वर्ष की रिपोर्ट का केंद्रीय विषय है-‘‘बहुआयामी गरीबी को कम करने के लिए अभाव की पोटलियों (Bundles) को खोलना ’’ (Unpacking deprivation bundles to reduce multidimensional poverty)

मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार, 111 विकासशील देशों की 1.2 बिलियन आबादी (19.1% लोग) बहुआयामी गरीबी से ग्रसित है।
  • यह उस संख्या का लगभग दोगुना है, जिसे गरीब के रूप में देखा जाता है, जब गरीबी को प्रतिदिन 1.90 अमेरिकी डॉलर से कम पर जीवन यापन के लिए परिभाषित किया जाता है।
  •  इन 1.2 बिलियन बहुआयामी गरीब लोगों में लगभग आधा हिस्सा (593 मिलियन) 18 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों का है।
  • बहुअायामी गरीब लोगों की सर्वाधिक 83.0 प्रतिशत जनसंख्या उप-सहारा अफ्रीका (579 मिलियन) तथा दक्षिण एशिया (385 मिलियन) में निवास करती है।
  • जब से वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक प्रकाशित किया जा रहा है, तब से उप-सहारा क्षेत्र में यह गरीबी का सबसे बड़ा आंकड़ा है, जो दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के बहुआयामी गरीबी के कुल आंकड़े (494 मिलियन ) से भी ज्यादा है।
  • 111 विकासशील देशों की कुल आबादी में लगभग 83 प्रतिशत (964 मिलियन) बहुआयामी गरीब आबादी ग्रामीण क्षेत्र में तथा 17 प्रतिशत (198 मिलियन) बहुआयामी गरीब आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती हैं।
  • कुल 1.2 बिलियन बहुआयामी गरीबों में लगभग 4.1 मिलियन लोग MPI  के सभी 10 संकेतकों पर पिछड़े हुए हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक लोग (593 मिलियन) विद्युत एवं स्वस्थ ईंधन से वंचित हैं।
  • लगभग 40 प्रतिशत (437 मिलियन) गरीब लोगों के पास पीने के लिए जल तथा स्वच्‍छता दोनों तक पहुंच का अभाव है।
  • 30 प्रतिशत से अधिक गरीब (374 मिलियन ) एक ही समय में पोषण, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्‍छता और आवास से वंचित हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विश्व के सबसे ज्यादा गरीब लोग हैं, जिनकी कुल आबादी 229 मिलियन है।
  • जबकि नाइजीरिया 97 मिलियन गरीब आबादी के साथ भारत के बाद दूसरा सर्वाधिक गरीब आबादी वाला देश है।

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक की संरचना

  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं-

 

भारत की स्थिति

  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2005-06  से 2019-21 के बीच भारत में सर्वाधिक 415 मिलियन लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।
  •  इसमें वर्ष 2015-16 से 2019-21 तक गरीबी रेखा से बाहर निकलने वाले लोगों की आबादी 140 मिलियन रही है।
  • भारत का MPI  मूल्य वर्ष 2005-06 में जहां 0.283 था, वह घटकर वर्ष 2015-16 में 0.122 तथा 2019-21 में 0.069 हो गया।
  •  इसी अवधि में भारत में गरीबी क्रमश: 55.1 प्रतिशत से घटती हुई 27.7 प्रतिशत हुई जो वर्ष 2019-21 में घटकर 16.4 प्रतिशत हो गई है।,
  • भारत की गरीबी उन्‍मूलन की दर, SDG गोल 1.2, जो वर्ष 2030 तक गरीबी को आधा करने की बात करता है, को प्राप्त करते हुए नजर आती है।
  • परंतु यह रिपोर्ट कोविड-19 का भारत की गरीबी प्रभाव का आकलन नहीं करती; क्‍योंकि इसके 71 प्रतिशत डाटा महामारी से पूर्व के हैं।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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