Contact Us - 9792276999 | 9838932888
Timing : 12:00 Noon to 20:00 PM (Mon to Fri)
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Nov 17 2022

RH 300 MK11-F22 IAD मिशन

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 3 सितंबर‚ 2022 को भारत ने ’इन्फ्लेटेबल एरोडायनामिक डिसेलेरेटर’ (Inflatable Aerodynamic Decelerator : IAD) तकनीक का सफल परीक्षण किया। 
  • यह परीक्षण ’भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (Indian Space Research Organisation : ISRO) द्वारा किया गया।
  • यह परीक्षण तिरुवनंतपुरम स्थित इक्वेटोरियल रॉकेट लांचिंग स्टेशन (TERLS) से किया गया।
  • यह परीक्षण साउण्डिंग रॉकेट रोहिणी (RH 300 MK11) के जरिए किया गया।
  • गौरतलब है‚ कि रोहिणी का उपयोग भारत और विदेश के वैज्ञानिकों द्वारा फ्लाइट डेमोंस्ट्रेशन हेतु नियमित रूप से किया जाता है।

IAD तकनीक

  • इस तकनीक को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • यह तकनीक रॉकेट की गति को धीमा करने और सुरक्षित रूप से लैण्डिंग में सहायता कर सकती है।

लैण्डिंग

  • प्रारंभ में IAD को रॉकेट के ’पेलोड बे’ (Payload Bay) अंदर तह (Fold) करके स्थापित किया गया था।
  • उल्लेखनीय है‚ कि IAD को ’केवलर फैब्रिक’ (Kevlar Fabric) से बनाया गया है‚ जिसे पॉलीक्लोरोप्रीन (Polychloroprene) के साथ लेपित (Coated) किया गया था।
  • विदित हो केवलर में उच्च तन्यता क्षमता‚ कठोरता‚ तापीय स्थिरता जैसे गुण होते हैं।
  • अत:, इसे ’रोहिणी परिज्ञापी रॉकेट’ में आसानी से रखा जा सकता है।
  • उड़ान के पश्चात लगभग 84 किमी. की ऊंचाई पर इसे खोला गया और यह पेलोड पार्ट में फूल गया।
  • IAD को फुलाने में संपीडित नाइट्रोजन का उपयोग किया गया है।
  • गौरतलब है‚ कि IAD को फुलाने (Inflating) के लिए प्रयुक्त वायवीय (Pneumatic) प्रणाली को ’तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र’ (LPSC), वलियामाला द्वारा विकसित किया गया है।
  • परिणामस्वरूप इस तकनीक के कारण पेलोड का वेग (Velocity) प्रभावित हो गया‚ जिसके चलते रॉकेट की गति कम हो गई।
  • इसरो के अनुसार‚ IAD को सिंगल - स्टेज रोहिणी - 300 (RH 300 MK 11) परिज्ञापी रॉकेट के नोजकोन (Nosecone) में रखा गया था।

प्रारंभिक विवरण

अंतिम विवरण

अन्य परीक्षण

  • IAD के अतिरिक्त कई अन्य नई प्रणालियों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया‚ जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं—
  • माइक्रो वीडियो इमेजिंग सिस्टम
  • सॉफ्टवेयर परिभाषित रेडियो टेलीमेट्री-दोहरी ट्रांसमीटर (Software Defined Radio Telemetry - Dual Transmitter : SDRT-DTx) 
  • स्वदेशी एमईएमएस ध्वनिक सेंसर (MEMS Acoustic Sensors)
  • संशोधित नोजकोन पृथक्करण प्रणाली (Modified Nosecone Separation System)

आगामी मिशन

  • इसरो के अनुसार‚ IAD तकनीक का उपयोग भविष्य के मिशनों ’शुक्र’ (Venus) और ’मंगल’ (Mars) में किया जा सकता है।

संकलन - आदित्य भारद्वाज


Comments
List view
Grid view

Current News List