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नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) सांख्यिकी रिपोर्ट, 2020

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 22 सितंबर, 2022 को रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इण्डिया (आरजीआई) द्वारा नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) सांख्यिकी रिपोर्ट, 2020 जारी कि गई।
  • वर्तमान रिपोर्ट, वर्ष 2020 के लिए भारत के  बड़े राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मृत्यु दर संकेतक और प्रजनन क्षमता से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करती है।
  • वर्ष 2020 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर अशोधित जन्म दर (सीबीआर) 19.5 है, जो वर्ष 2019 की तुलना में 0.2 अंकों की गिरावट प्रदर्शित करती है। 
  • बड़े राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में, बिहार में अधिकतम सीबीआर (25.5) और केरल(13.2)     में न्यूनतम दर्ज किया गया है।

  • वर्ष 2020 में देश के लिए अशोधित मृत्यु दर (सीडीआर) 6.0 है। यह छत्तीसगढ़ में अधिकतम (7.9) और दिल्‍ली के लिए न्यूनतम (3.6) दर्ज किया गया है।
  • पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय सीडीआर में गिरावट 0.5 अंक दर्ज की गई है । 
  • महिला सीडीआर में तदनुरूपी गिरावट 0.7 अंक है, जबकि पुरुष सीडीआर में यह 0.3 अंक है।
  • शिशु मृत्यु दर (IMR) में भी 2 अंक की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में राष्ट्रीय स्तर पर यह 28 हो गई है, जो वर्ष  2019 में 30 थी। 
  • अधिकतम शिशु मृत्यु दर मध्य प्रदेश में (43) और केरल में न्यूनतम (6) दर्ज की गई है।
  • देश के लिए आईएमआर वर्ष 2020 में घटकर 28 हो गया है, जो वर्ष 2015 में 37 था।
  • ग्रामीण आईएमआर में तदनुरूपी गिरावट 10 अंक (2015 में 41 से 2020 में 31) तक रही है।
  • शहरी आईएमआर में 6 अंकों की गिरावट दर्ज की गई (2015 में 25 से 2020 में 19)।
  • इस गिरावट के बावजूद, राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक 35 शिशुओं में से एक तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक 32 में से एक शिशु और शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक 52 में से एक शिशुओं की अभी भी मृत्यु हो जाती है।
  • देश में पांच वर्ष से कम उम्र के शिशुओं की मृत्यु दर (यू5एमआर) में वर्ष 2019 से तीन अंकों की (वार्षिक कमी दर 8.6 प्रतिशत) (2019 में प्रति 1,000 जीवित जन्म 35 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2020 में 32 प्रति 1,000 जीवित जन्म)। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 36 से शहरी क्षेत्रों में 21 तक का अंतर है।
  • बालिकाओं के लिए यू5एमआर, बालक (31) की तुलना में अधिक (33) है।
  • यू5एमआर में सबसे ज्यादा गिरावट उत्तर प्रदेश (5 अंक) तथा कर्नाटक (5अंक) में देखने को मिली है।
  • देश के लिए जन्म के समय लिंग अनुपात वर्ष 2018-20 में 3 अंक बढ़कर 907 हो गया है, जो वर्ष 2017-19 में 904 था। 
  • केरल में जन्म के समय उच्‍चतम लिंगानुपात (974) दर्ज किया गया है, जबकि उत्तराखण्ड सबसे कम (844) है।
  • देश के लिए कुल प्रजनन दर (TFR)  वर्ष 2020 में घटकर 2.0 हो गई है, जो वर्ष 2019 में 2.1 था। 
  • वर्ष 2020 में बिहार ने कुल प्रजनन दर उच्‍चतम (3.0) है, जबकि दिल्‍ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में यह न्यूनतम 1.4 दर्ज किया गया है।
  • वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर एक ग्रामीण महिला का कुल प्रजनन दर 2.2 है, जबकि एक शहरी महिला का कुल प्रजनन दर 1.6 है।
  • वर्ष 2020 में लगभग 82.6 प्रतिशत जीवित जन्मों के मामले में, माताओं ने सरकारी अस्पताल या निजी अस्पताल में चिकित्सा प्राप्त की तथा बच्‍चों को जन्म दिया, जबकि वर्ष 2019 में 82.8 प्रतिशत माताओं ने सरकारी अस्पताल या निजी अस्पताल में चिकित्सा प्राप्त की तथा बच्‍चों को जन्म दिया था।

एसआरएस, 2020 रिपोर्ट के अनुसार

  • छह (6) राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने पहले ही एनएमआर (<=12 2030 तक) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर लिया है: केरल (4),दिल्‍ली (9), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू और कश्मीर (12) और पंजाब (12)
  • ग्यारह (11) राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने पहले ही यू5एमआर (<=25  2030 तक) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर लिया है: केरल (8), तमिलनाडु (13),दिल्‍ली (14), महाराष्ट्र (18), जम्मू-कश्मीर (17), कर्नाटक ( 21), पंजाब (22), पश्चिम बंगाल (22), तेलंगाना (23), गुजरात (24) और हिमाचल प्रदेश (24)

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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