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एपीएसी सस्टेनेबिलिटी लेड सिटीज इण्डेक्स : 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • हाल ही में नाइट फ्रैंक (Knight Frank) द्वारा एपीएसी सस्टेनेबिलिटी लेड सिटीज इण्डेक्स (APAC Sustainablity Led Cities Index), 2021 जारी किया गया ।
  • नाइट फ्रैंक लंदन (यूनाइटेड किंगडम) में अवस्थित एक वैश्विक संपत्ति सलाहकार संस्था है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • एपीएसी सस्टेनेबिलिटी लेड सिटीज इण्डेक्स में कुल 36 शहरों को शामिल किया गया है।
  • इस इण्डेक्स में चार भारतीय शहरों को शीर्ष 20 में स्थान प्राप्त हुआ है।

एपीएसी सस्टेनेबिलिटी लेड सिटीज इण्डेक्स का उद्देश्य

  • एशिया पैसिफिक क्षेत्र में अचल संपत्ति बाजार के प्रदर्शन में अंतर्दृष्टि प्रदान करना है।

एपीएसी सूचकांक में शहरों के मापदण्ड का आधार

  • जलवायु जोखिम
  • कार्बन उत्सर्जन
  • शहरीकरण दबाव
  • सरकारी पहल आदि।
  • एपीएसी सूचकांक में शहरों की रैंकिंग तीन मानक श्रेणी पर आधारित है : 
  •  प्‍लैटिनम (Platinum) श्रेणी (रैंक 1-5 तक)
  •  स्वर्ण (Gold) श्रेणी (रैंक 6-15 तक)
  •  रजत (Silver)  श्रेणी (रैंक 16-36 तक)
  • एपीएसी सस्टेनेबिलिटी लेड सिटीज इण्डेक्स रैंकिंग, 2021
  • प्‍लैटिनम (Platinum) श्रेणी में दुनिया के शीर्ष पांच शहर

स्वर्ण (Gold) श्रेणी में दुनिया के शीर्ष पांच शहर 


रजत (Silver) श्रेणी में दुनिया के शीर्ष पांच शहर


  •  एपीएसी सस्टेनेबिलिटी लेड सिटीज इण्डेक्स रैंकिंग,  2021 
  • प्‍लैटिनम श्रेणी में भारत का एक भी शहर शामिल नहीं है।
  • स्वर्ण श्रेणी में भारत के शहर : इस श्रेणी में भारत का एकमात्र शहर बंगलुरू है, जिसका ओवर ऑल इण्डेक्स रैंकिंग में 14वां स्थान है।
  • रजत श्रेणी में भारत के शीर्ष तीन शहर

  • एपीएसी में शीर्ष दस रैंकिंग में योगदान करने वाले शीर्ष तीन कारक :
  •  उपलब्ध हरित स्थान की मात्रा (Amount of Green Space Available)
  •  ग्रीन रेटेड वाणिज्यिक भवन (Green Rated Commercial Building)
  •  शहरीकरण का दबाव (Urbanisation Pressure)
  • भारत में सतत विकास के कारक
  •  नए बाजार की गतिशीलता
  • कार्बन तटस्थता
  • नेट जीरो के लिए वैश्विक प्रतिबद्धता
  • पर्यावरण के अनुकूल परिसर बनाना इत्यादि।
  • भारत का एपीएसी क्षेत्र में ग्रीन ब्रॉण्ड
  • ग्रीन बॉण्ड- यह ऋण प्राप्ति वाले वित्तीय साधन हैं, जिसका उद्देश्य सकारात्मक पर्यावरण और जलवायु लाभ वाली परियोजनाओं को वित्त पोषित करना है।
  • उदाहरण- नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्‍छ परिवहन और स्थायी जल प्रबंधन इत्यादि।
  • भारत के ग्रीन ब्रॉण्ड जारी करने में वार्षिक आधार पर 523 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • जो वर्ष 2020 में 1.1 बिलियन डाॅलर से बढ़कर वर्ष 2021 में 6.8 बिलियन डाॅलर हो गया।
  • वर्ष 2021 में एपीएसी क्षेत्र में जारी ग्रीन ब्रॉण्ड की कुल राशि के मामले में भारत छठा सबसे बड़ा देश है।

संकलन-सुरेंद्र वर्मा
 

 

 


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