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Post at: Sep 26 2022

स्टेम सेल तकनीक से एचआईवी का इलाज

एचआईवी क्‍या है ?

  • एचआईवी (Human immunodeficiency virus: HIV) एक ऐसा वायरस है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। यदि एचआईवी का इलाज नहीं किया जाता है, तो यह एड्स (एक्‍वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम) को जन्म दे सकता है।
  • ध्यातव्य है, कि एड्‍स एचआईवी संक्रमण का अंतिम चरण है जो तब होता है, जब वायरस के कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती है।
  • मनुष्योें में एचआईवी संक्रमण मध्य अफ्रीका में एक प्रकार के चिंपैंजी से आया था। अध्ययनों से पता चलता है, कि एचआईवी 1800 के दशक के अंत में चिंपैंजी से मनुष्यों में आया होगा।
  • दशकों से, एचआईवी धीरे-धीरे पूरे अफ्रीका में और बाद में दुनिया के अन्य हिस्सों में फैल गया। यह वायरस संयुक्त राज्य अमेरिका में कम-से-कम 1970 के दशक के मध्य से अस्तित्व में है।
  • ध्यातव्य है, कि भारत में एचआईवी संक्रमण पहली बार वर्ष 1986 में चेन्‍नई में महिला यौनकर्मियों में पाया गया था।
  • वर्तमान में कोई प्रभावी इलाज नहीं है; परंतु स्टेम सेल तकनीक से इस बीमारी के इलाज ने दुनियाभर के एचआईवी मरीजों में एक उम्मीद की किरण जगाई है।

वर्तमान संदर्भ

  • हाल ही में द इंटरनेशनल मैटरनल पीडियाट्रिक एडोलसेंट एड्स क्‍लिनिकल ट्रायल नेटवर्क ने एक ऐसे मामले की पुष्टि की, जिसमें एक महिला एचआईवी (HIV) से पूर्णत: मुक्त हो गई।
  • इस महिला को न्यूयाॅर्क पेसेंट का नाम दिया गया है।
  • ध्यातव्य है, कि यह महिला ल्‍यूकीमिया (रक्त कैंसर) तथा एचआईवी एड्‍स से पीड़ित थी।
  • इस महिला के उपचार में द्विआयामी (Dual) स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांट की प्रक्रिया का उपयोग किया गया।
  • ध्यातव्य है कि इस द्विआयामी स्टेम सेल ट्रांसप्‍लॉट ने महिला में ल्‍यूकीमिया को भी खत्म कर दिया।

स्टेम सेल से एचआईवी का इलाज : कैसे ?

  • ध्यातव्य है, कि 1990 के दशक में यूरोप में एक छोटे समूह की खोज की गई, जिसमें ‘प्रतिरक्षा तंत्र का प्रवेश द्वार’(Entrance Gate of Immune System) नहीं था।
  • वस्तुत:, एचआईवी वायरस इसी प्रतिरक्षा द्वार से किसी व्यक्ति के प्रतिरक्षा तंत्र में प्रवेश करते हैं।
  • यानी ये समूह एचआईवी एड्‍स से संक्रमित हो ही नहीं सकते या यूं कहें कि एचआईवी वायरस ऐसे समूह को प्रभावित नहीं कर सकता।
  • इसे जेनेटिक एब्नॉर्मिलिटी ( Genetic Abnormality) कहा गया।
  • इस प्रकार यदि एचआईवी से प्रतिरक्षित (Immune) इन व्यक्तियों के स्टेम सेल को किसी एचआईवी संक्रमित व्यक्ति में ट्रांसप्‍लांट कर दिया जाए, तो अमुक व्यक्ति भी एचआईवी से मुक्त हो जाएगा।
  • खास बात यह थी, कि एचआईवी से मुक्त यह समूह ‘श्वेत’ यानी 'White' नस्ल का था । ऐसे में एक ब्लैक महिला के स्टेम को इस समूह के स्टेम से स्थानांतरित करना खतरनाक हो सकता था।
  • ऐसे में दोहरे स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांट को संपादित किया गया।
  • सर्वप्रथम महिला के एक नजदीकी रिश्तेदार के स्टेम सेल से महिला का स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांट किया गया एवं उसके पश्चात एचआईवी से इम्यून समूह के स्टेम सेल से महिला के स्टेम को ट्रांसप्‍लांट किया गया।

दोहरा स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांट की तकनीकी या स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांट

  • इस पद्धति का इस्तेमाल उच्‍च जोखिम वाले कैंसर के मरीजों में किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में स्टेम सेल का मिलान (Match) उतना मायने नहीं रखता; क्योंकि मध्यस्थता करने वाली स्टेम सेल एक सेतु का कार्य करती है।
  • दोहरे स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांट में मरीज को दो बार स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांट से गुजरना पड़ता है।
  • स्टेम सेल ट्रांसप्‍लांटेशन जिसे सामान्यत: बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट के रूप में जाना जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी मरीज के क्षतिग्रस्त स्टेम सेल को स्वस्थ स्टेम सेल से बदल दिया जाता है।

स्टेम सेल क्या होते हैं ?

  • स्टेम सेल एक तरह से शरीर का कच्‍चा उत्पाद (Raw Material) होते है। इन्हीं के द्वारा विशेषीकृत कोशिकाओं (Specialized Cells) का निर्माण होता है।

 


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