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भू-जल संरक्षण हेतु ओडिशा की ‘छाता’ योजना

पृष्ठभूमि

  • ओडिशा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में सरकारी तथा निजी भवनों की छतों पर वर्षा के जल को जमा करने के लिए ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग’ योजना की शुरुआत की थी।
  • यह योजना वित्तीय वर्ष 2014-15 से शुरू होकर वित्तीय वर्ष 2018-19 तक चली थी।
  • इन 5 वर्षों के दौरान इस योजना में 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
  • योजना के पहले चरण की शुरुआत भुवनेश्वर, बरहामपुर, टिटलागढ़, झारसुगुडा और ब्रजराजनगर शहरों में की गई थी।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 12 अगस्त, 2022 को राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व में राज्य मंत्रिमण्डल ने घरों की छतों पर वर्षा-जल के संचयन को बढ़ावा देने के लिए ‘Community Harnessing and Harvesting Rainwater Artificially from Terrace of Aquifer ': CHHATA)' ‘छाता योजना’ को शुरू करने का निर्णय किया।
  • यह योजना वित्तीय वर्ष 2022-23 से शुरू होकर वित्तीय वर्ष 2026-27 तक लागू की जाएगी।
  • इन 5 वर्षों के दौरान इस योजना में 270 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

योजना के विषय में-

  • गिरते भू-जल स्तर के कारण बढ़ रही समस्याओं को दूर करने के लिए शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत 5 वर्षों के भीतर 373.52 करोड़ लीटर जल-संचयन का लक्ष्य रक्षा गया है।
  • यह योजना राज्य के पानी की कमी वाले 52 प्रखण्डों, 27 नगरीय  स्थानीय निकायों (जिनमें 5 नगर निगम भी शामिल हैं) में क्रियान्वित की जाएगी।
  • 27 स्थानीय निकायों के प्रत्येक सरकारी भवनों पर RRHS (Rooftop Rainwater Harvesting System) प्रणाली तैयार करने का व्यय 4.31 लाख रु. तथा 52 ग्रामीण प्रखण्डों में RRHS प्रणाली स्थापित करने का व्यय 3.06 लाख प्रति भवन अनुमानित है।
  • इस योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति जिसके छत का क्षेत्रफल 200 वर्ग मी. से अधिक न हो तथा भवन तीन मंजिल से अधिक न हो इसके लिए आवेदन कर सकता है। 
  • इस योजना के अंतर्गत RRHS प्रणाली का कार्य पूर्ण होने के पश्चात अधिकृत आधिकारियों द्वारा इसका परीक्षण करने के उपरांत राज्य सरकार द्वारा 5500 रु. अथवा उस संरचना की लागत का 50 प्रतिशत, जो भी कम हो सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा।
  • इस योजना के तहत, सब्सिडी का लाभ पाने के लिए समुचित रिचार्ज यूनिट (कुआं) का होना एक अनिवार्य शर्त है।
  • राज्य मंत्रिमण्डल द्वारा योजना के लिए अनुमोदित 270 करोड़ रु. में से वित्तीय वर्ष 2022-23 में 51.75 करोड़ की धनराशि व्यय की जाएगी। शेष धनराशि में से अगले 4 वर्षों के दौरान प्रतिवर्ष 54.56 करोड़ का व्यय किया जाएगा।
  • इस योजना का क्रियान्वयन जल संसाधन विभाग और वर्षा जल-संचयन सलाहकारों के वर्तमान श्रमशक्ति के माध्यम से किया जाएगा।
  • इस योजना के अंतर्गत, बेरोजगार इंजीनियरों, स्नातकों (भू-विज्ञान में) को अल्पकालीन प्रशिक्षण देकर उन्हें वर्तमान जल-संचयन सलाहकारों के साथ संबद्ध किया जाएगा।

उद्देश्य

  • भवनों की छतों पर वर्षा जल का संरक्षण करके लगातार नीचे गिर रहे भू-जल स्तर को अपने स्थान पर बनाए रखना, जिससे पानी की समस्या पैदा न हो।
  • वर्षा-जल को छतों पर स्वच्‍छता से जमा करके पीने-योग्य बनाना। 
  • सूखे व मरूस्थलीय क्षेत्रों में जल को जमा करके सिंचाई व अन्य व्यावसायिक कार्यों में उपयोग करना।

राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा जल संरक्षण के लिए योजनाएं

  • ‘जल शक्ति अभियान’ को केंद्र सरकार ने दो चरणों में लागू किया है-
  • ‘जल शक्ति अभियान’ को जुलाई, 2019 में देश के जल संकटग्रस्त 256 जिलों में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य 5 लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करके वर्षा जल संचयन करना था।
  • जल शक्ति मिशन- ‘कैच द रेन’ की शुरुआत 22 मार्च, 2021 को वीडियो कॉन्फेंशिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसकी थीम लाइन - ‘बारिश को पकड़ो, जहां यह गिरता है, जब यह गिरता है’।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ तालाबों के पुनर्विकास तथा प्रबंधन करने के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में शुरू की गई थी।
  • अमृत मिशन जल आपूर्ति- जल-निकासी तथा जल-प्रबंधन को 25 जून, 2015 को देश के 500 शहरों और कस्बों में लागू किया गया था। इस योजना के जरिए शहरों में पानी की व्यवस्था सही कराई जाएगी।
  • ‘जल क्रांति अभियान’ के तहत शुरू की गई ‘जल ग्राम योजना’ का प्रमुख उद्देश्य जल संरक्षण और अध्ययन हेतु जल की कमी वाले क्षेत्रों में दो मॉडल गांवों को विकसित करना है।
  • अटल भू-जल योजना राज्यों के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में भू-जल प्रबंधन में सुधार तथा पानी की समस्या का निदान करने से संबंधित है।
  • इस योजना को 25 दिसंबर, 2019 को सात राज्यों के लगभग 8000 गांवों में शुरू किया गया था।

 

आगे की राह

  • ‘जल ही जीवन है’, इसे सार्थक बनाने के लिए विश्व स्तर पर जल-संरक्षण अति आवश्यक है। राज्यों को अपने स्तर पर जल संरक्षण के लिए योजनाएं बनानी चाहिएं, इस कड़ी में ‘छाता योजना’ जल संरक्षण के लिए राज्यों को प्रेरित करेगा।

संकलन-अतुल शुक्‍ला
 


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