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Post at: Sep 16 2022

एक राष्ट्र‚ एक उर्वरक योजना

वर्तमान परिप्रेक्ष्य 

  • 24 अगस्त‚ 2022 को केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने ज्ञापन जारी कर एक राष्ट्र‚ एक उर्वरक (One Nation, One Fertilizer:ONOF)योजना के कार्यान्वयन की घोषणा की।
  • इसके अंतर्गत उर्वरकों के लिए एक ही ब्राण्ड और लोगो का उपयोग किया जाएगा 

एक राष्ट्र‚एक उर्वरक योजना क्या है?

  • इस योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाले उर्वरक पूरे देश में एक ही ब्राण्ड नाम ‘भारत’ के तहत विक्रय किए जाएंगे।
  • सभी उर्वरक निर्माताओं द्वारा अब केंद्र की उर्वरक‚ सब्सिडी  का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना (पीएमबीजेपी) कर दिया जायेगा।
  • ONOF के तहत‚ कंपनियों को अपने बैग के केवल एक‚ तिहाई स्थान पर अपना नाम ब्राण्ड‚लोगो एवं अन्य प्रासंगिक उत्पाद संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने की अनुमति है। 
  • शेष दो तिहाई स्थान पर ‘‘भारत‚’’ ब्राण्ड और ‘पीएमबीजेपी’लोगो को दिखाना होगा।
  • यूरिया‚ डाई-अमोनियम फास्फेट (डीएपी)‚ म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी)‚ और नाइट्रोजन फास्फोरस पोटैशियम (एनपीके) आदि के लिए एकल ब्राण्ड नाम क्रमशः भारत यूरिया‚ भारत डीएपी‚भारत एमओपी‚ और भारत एनपीके आदि होगा । 
  •  यह योजना सभी उर्वरक कंपनियों‚ राज्य व्यापार संस्थाओं (एसटीई) और उर्वरक विपणन संस्थाओं (एफएमई) पर लागू होगी

 नोट

  • यह योजना सार्वजनिक और निजी‚ दोनों क्षेत्र की कंपनियों पर लागू होगी।

लागू करने की आवश्यकता क्यों?

  • सरकार द्वारा यूरिया पर उत्पादन लागत का  80 से 90 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान किया जाता है (वित्तीय वर्ष 2022-23 में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक )‚ लेकिन कंपनियां अब तक सरकार की नहीं बल्कि अपनी ब्राण्ड पहचान के अंतर्गत उत्पाद बेच रही थीं। 
  • किसानों को सस्ती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने में होने वाले वित्तीय बोझ के बारे में पता होना चाहिए।
  • सरकार यह तय करती है कि उवर्रक कहां बेची जानी है ‚इसलिए ‘एकल ब्राण्ड’ उर्वरकों को लांच करने का एक उद्देश्य ‘परिवहन लागत’ में कमी लाना है। 
  • यदि निर्माता विभिन्न ब्राण्डों के अंतर्गत यूरिया को अलग-अलग बेचना बंद कर देते हैं तो ‘इफको’( Indian Farmers Fertilizer Co operative Limited:IFFCO) को राज्यों में उर्वरकों कों स्थानांतरित करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी‚ परिणामस्वरूप उर्वरक सब्सिडी खर्च पर नियंत्रण हो सकेगा।
  • इससे उर्वरकों के पारगमन समय को कम किया जा सकेगा। 
  • ब्राण्ड वरीयताओं के बावजूद पूरे वर्ष उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी 
  • औद्योगिक उद्देश्यों के लिए यूरिया के उपयोग को रोकने में मदद प्राप्त होगी।

नीति को लागू करने में व्याप्त चुनौतियां

  • कंपनियों के लिए उन विज्ञापनों पर लगातार खर्च करना मुश्किल होगा‚ जहां उस कंपनी के लिए ‘ब्राण्ड वैल्यू’ शून्य है। 
  • सरकारी ब्राण्ड‚ उर्वरक निर्माण क्षेत्र में नियमन की एक और परत जोड़ देगा‚जहां लगभग हर पहलू उत्पाद‚ मूल्य निर्धारण से लेकर‚ लागत संरचना से लेकर‚ भौगोलिक वितरण और बिक्री तक सरकार द्वारा नियंत्रित होगा।  
  • यह उर्वरक कंपनियों को विपणन और ब्राण्ड-प्रचार गतिविधियों को शुरू करने से हतोत्साहित करेगा। 
  • कंपनियां‚अब सरकार के लिए अनुबंध निर्माताओं और आयतकों तक सीमित कर दी जाएंगी।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • बजट वित्तीय वर्ष 2020-21 में उर्वरक सब्सिडी व्यय के मामले में खाद्य सब्सिडी के बाद दूसरा सबसे बड़ा मद था।
  • सब्सिडी व्यय में सबसे बड़े तीन मद :--

     खाद्य > उर्वरक > पेट्रोलियम‚ 

 संकलन -पंकज तिवारी
 


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