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संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन

पृष्ठभूमि

  • सितंबर‚ 2015 में संयुक्त राष्ट्र के देशों द्वारा ‘‘ट्रांसफॉर्मिंग अवर वर्ल्ड : द 2030 एजेण्डा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’’ (Transforming Our World : The 2030 Agenda for Sustainable Development) को अपनाया गया‚ जिसमें 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को शामिल किया गया है। 
  • उल्लेखनीय है‚ कि SDG-14 जलीय जीवों की सुरक्षा (Life Below water) से संबंधित है। 
  • विदित हो कि 5 - 9 जून‚ 2017 को एसडीजी-14 के कार्यान्वयन का समर्थन करने हेतु ‘‘पहले उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’’ का आयोजन किया गया था।
  • न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में इस सम्मेलन का आयोजन किया गया था।
  • गौरतलब है‚ कि SDG-14 के अंतर्गत 10 निम्नलिखित लक्ष्य शामिल हैं :—

जलवायु से संबंधित आंकड़े
जलवायु परिवर्तन—

  • आईपीसीसी (IPCC) के अनुसार वर्ष‚ 1993 के बाद से समुद्र के गर्म होने की दर दोगुनी से भी अधिक हो गई है। 
  • इसके साथ ही मानव गतिविधियों से कार्बन उत्सर्जन‚ समुद्र के गर्म होने‚ अम्लीकरण और ऑक्सीजन की हानि का कारण बन रहा है। 

समुद्री प्रदूषण

  • यूएनईपी (UNEP) के अनुसार‚ प्रतिवर्ष लगभग 11 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्र में प्रवेश करता है।
  • लगभग 80 प्रतिशत समुद्री और तटीय प्रदूषण‚ जिसमें कृषि अपवाह‚ कीटनाशकों‚ प्लास्टिक और अनुपचारित सीवेज शामिल हैं‚ भूमि पर उत्पन्न होता है।
  • इसके अतिरिक्त अंतर्ग्रहण (ingestion), उलझाव (entanglement) और आवास परिवर्तन (habitat change) के माध्यम से समुद्री प्लास्टिक से लगभग 800 से अधिक समुद्री व तटीय प्रजातियां प्रभावित होती हैं। 

जनसंख्या और महासागर—

  • लगभग 680 मिलियन लोग निचले तटीय क्षेत्रों में रहते हैं‚ जो वर्ष 2050 तक बढ़कर एक अरब हो जाने की उम्मीद है। 
  • जबकि वर्तमान में लगभग 65 मिलियन जनसंख्या छोटे द्वीप विकासशील राज्यों में रहती है।
  • गौरतलब है‚ कि समुद्री मत्स्यपालन विश्व स्तर पर 57 मिलियन रोजगार प्रदान करता है।  

नीली अर्थव्यवस्था—

  • यूएनडीपी के अनुसार विश्व स्तर पर समुद्री और तटीय संसाधनों और उद्योगों का बाजार मूल्य प्रतिवर्ष 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर या वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 5 प्रतिशत अनुमानित है। 
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी‚ नीली अर्थव्यवस्था परियोजनाओं को डिजाइन करने और आर्थिक विकास एवं महासागरीय स्थिरता की जरूरतों को समेटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

जलीय जैव विविधता—

  • यूनेस्को के अनुसार‚ विश्व के 60 प्रतिशत प्रमुख समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र जो आजीविका का आधार है‚ उनका क्षरण हो गया है या उनका उपयोग अनावश्यक ढंग से किया जा रहा है। 
  • यूएनईपी (UNEP) के अनुसार‚ समुद्री कछुओं की सभी प्रजातियां‚ 66 प्रतिशत समुद्री स्तनधारी और 50 प्रतिशत समुद्री पक्षी प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित हुए हैं। 

समुद्री संरक्षित क्षेत्र—

  • वर्ष 2000 में समुद्री संरक्षित क्षेत्र (Marine Protected Areas : MPAs) समुद्र के 0.7 प्रतिशत का  प्रतिनिधित्व करते थे।
  • जबकि नवंबर‚ 2019 में यह आंकड़ा 7.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • हाल ही में पांच दिवसीय संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (The United Nations Ocean Conference : UNOC), 2022 का आयोजन किया गया।
  • इस सम्मेलन का आयोजन पुर्तगाल एवं केन्या की सह-मेजबानी में लिस्बन‚ पुर्तगाल में किया गया। 
  • इस वर्ष सम्मेलन के द्वितीय संस्करण का आयोजन किया गया था।
  • विदित हो वर्ष 2017 में इसके पहले संस्करण का आयोजन संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय न्यूयॉर्क में किया गया था।
  • UNOC, 2022 में भारतीय प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा किया गया।

विषय

  • UNOC, 2022 का विषय ‘‘सतत विकास लक्ष्य-14 के कार्यान्वयन के लिए विज्ञान और नवाचार पर आधारित महासागर कार्यवाही को बढ़ाना : सर्वेक्षण‚ साझेदारी और समाधान’’ (Scaling up ocean action based on science and innovation for the implementation of the Goal 14 : Stock Taking, Partnerships and Solution) है।

सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्ष

  • स्वैच्छिक प्रतिबद्धता (Voluntary Commitments)— यूरोपीय निवेश बैंक स्वच्छ महासागर पहल के हिस्से के रूप में जलवायु लचीलापन‚ जल प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार हेतु कैरेबियन क्षेत्र में अतिरिक्त   150 मिलियन यूरो का निवेश करेगा। 
  • वैश्विक पर्यावरण सुविधा (The Global Environment Facility) ने कोलंबिया के समुद्री संरक्षित क्षेत्र के लिए  25 मिलियन डॉलर के अनुदान को मंजूरी प्रदान की।
  • विज्ञान और नवाचार : स्वीडन आईओसी यूनेस्को को वर्ष 2022 में 400,000 अमेरिकी डॉलर प्रदान करने सहित‚ वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ाने में मदद करेगा। 
  • जलवायु कार्रवाई : यूएसए और नॉर्वे ने सीओपी (COP)- 27 के लिए ग्रीन शिपिंग चैलेंज की घोषणा की।
  • सिंगापुर भी ग्रीन शिपिंग की हिमायत (Championing) कर रहा है‚ साथ ही शिपिंग कंपनियों द्वारा कार्बन लेखांकन को प्रोत्साहित करना है। 
  • भारत एक तटीय स्वच्छ समुद्र अभियान के लिए प्रतिबद्ध है। 
  • उल्लेखनीय है‚ कि भारत एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कार्य कर रहा है। 
  • सम्मेलन में लिस्बन घोषणा (Lisbon Declaration) को सर्वसम्मति से अपनाया गया।

लिस्बन घोषणा

  • UNOC, 2022 में ‘‘हमारा महासागर‚ हमारा भविष्य : कार्रवाई के लिए आह्वान’’ (Our Ocean, Our Future : Call of action) नामक घोषणा की पुष्टि की गई।
  • जिसे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन‚ 2017 में अपनाया गया था।
  • इस घोषणा को ‘लिस्बन घोषणा’ के नाम से जाना जाता है।
  • इस घोषणा का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य−14 के कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिए : सतत विकास हेतु महासागरों‚ समुद्री संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग करना। 
  • घोषणा में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UN Framework Convention on Climate Change : UNFCCC) के तहत अपनाए गए पेरिस समझौते को लागू करने के महत्व पर जोर दिया गया। 
  •  जिसमें तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से  20C से नीचे तक सीमित करने का लक्ष्य शामिल है। 
  •  इसके साथ ही तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
  • इसके अतिरिक्त ‘ग्लासगो जलवायु समझौते’ (Glasgow Climate Pact) को लागू करने के महत्व की पुष्टि करना।
  • प्लास्टिक प्रदूषण पर एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी साधन विकसित करने हेतु अंतर-सरकारी वार्ता समिति बुलाने के लिए UNEA- 5.2 के निर्णय का स्वागत किया गया। 
  • इस वर्ष ‘समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (UNCLOS) को अपनाने की 40वीं वर्षगांठ है। 
  • सतत विकास के लिए महासागर विज्ञान के संयुक्त राष्ट्र दशक (वर्ष 2021-2030) के महत्व को पहचानना।
  • इस दशक का विजन ‘‘जिस महासागर की हमें आवश्यकता है‚ उस विज्ञान को प्राप्त करना’’ (Achieve the science we need for the ocean we want) है। 
  • सतत महासागर आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने और लक्ष्य−14 प्राप्त करने हेतु युवाओं एवं महिलाओं को सशक्त बनाना।

 संकलन : आदित्य भारद्वाज


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