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Post at: Sep 02 2022

समुद्री आवागमन पर भारत-ईरान समझौता

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 22 अगस्त‚ 2022 को भारत-ईरान ने नाविकों (Seafarers) की आवाजाही को सुगम बनाने हेतु समझौता-ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। 
  • यह समझौता ’’समुद्र से यात्रा के लिए प्रशिक्षण‚ प्रमाणन और निगरानी मानकों पर अंतरराष्ट्रीय अभिसमय’’ (International Convention on Standards of Training, Certification and Watch Keeping for Seafarers : STCW) के प्रावधानों के अनुसार किया गया है।

परिचय

  • 18 अगस्त‚ 2022 को केंद्रीय बंदरगाह‚ जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ईरान एवं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा की।
  • दोनों देशों की यात्रा के दौरान सर्बानंद सोनोवाल ने ईरान स्थित चाबहार के शाहिद बहिश्ती (Shahid Bahesti) बंदरगाह और जेबेल अली (Jebel Ali) बंदरगाह‚ यूएई की यात्रा की।

नाविकों के लिए STCW पर अंतरराष्ट्रीय अभिसमय

  • यह समुद्र में जाने वाले व्यापारी जहाजों पर स्वामी‚ अधिकारियों और निगरानी कर्मियों के लिए योग्यता-मानक निर्धारित करता है।
  • STCW को 7 जुलाई‚ 1978 को लंदन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime organization : IMO) में एक अभिसमय द्वारा अपनाया गया था और यह 28 अप्रैल‚ 1984 को लागू हुआ था।
  • तब से वर्ष 1991, 1994, 1995, 1997, 1998, 2004, 2006, 2010, 2014, 2015, 2016 और 2018 में इसके संशोधन को अपनाया गया।
  • यह नाविकों के लिए प्रशिक्षण‚ प्रमाणन और निगरानी से संबंधित न्यूनतम मानकों को निर्धारित करता है‚ जिन्हें पूरा करने या उससे अधिक करने के लिए देश बाध्य हैं।

चाबहार बंदरगाह परियोजना (Chabahar Port Project)

  • ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह‚ ईरान के दक्षिणी-पूर्वी समुद्री किनारे पर बना है।
  • चाबहार‚ ईरान में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत का एक शहर है।
  • यह बंदरगाह भारत के पश्चिमी समुद्री तट से ईरान के दक्षिणी समुद्र तट को जोड़ता है।
  • चाबहार बंदरगाह‚ भारत की पहली विदेशी बंदरगाह परियोजना है।
  • ईरान के चाबहार बंदरगाह को व्यापार मुक्त क्षेत्र घोषित किया है।
  • इस बंदरगाह के विकसित होने से न सिर्फ भारत को फायदा है‚ बल्कि अफगानिस्तान और ईरान को भी इस बंदरगाह से काफी लाभ होगा।
  • बंदरगाह को विकसित करने के लिए भारत‚ अफगानिस्तान और ईरान के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते में चाबहार पोर्ट समझौता बेहद अहम है।
  • इसके माध्यम से भारत के लिए समुद्री और सड़क मार्ग से अफगानिस्तान तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा और इस स्थान तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान के रास्ते की आवश्यकता नहीं होगी।

इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर

  • इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (Internationl North-South Transport corridor : NSTC), इस सदी की शुरुआत में लांच की गई एक महत्वाकांक्षी परियोजना है‚ जिसका उद्देश्य भारत‚ ईरान‚ अफगानिस्तान‚ रूस‚ मध्य एशिया और यूरोप को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट के माध्यम से जोड़ना है‚ ताकि मालों के पारगमन-समय में पर्याप्त कमी लाई जा सके।
  • यद्यपि इसका कुछ भाग कार्यान्वित किया गया है‚ लेकिन ईरान पर प्रतिबंधों के कारण इसकी पूरी क्षमता साकार नहीं को सकी है।
  • भारत और ईरान‚ परिणामी व्यापार के लाभों को प्राप्त करने हेतु INSTC को आवश्यक प्रोत्साहन देने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

संकलन - आदित्य भारद्वाज

 


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