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Post at: Aug 29 2022

झारखण्ड : बीज वितरण में ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाला पहला राज्य

ब्‍लॉकचेन प्रौद्योगिकी

  • ब्‍लॉकचेन एक साझा, अपरिवर्तनीय खाता बही है, जो एक व्यापार नेटवर्क में लेन-देन रिकॉर्ड करने और संपत्ति को ट्रैक करने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाता है।
  • इसमें सूचनाएं सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी-आधारित नेटवर्क पर वितरित की जाती हैं।
    • ‘बिटकॉइन’ नामक मुद्रा का संचालन ब्‍लॉकचेन प्रौद्योगिकी पर ही आधारित है।
  • ब्‍लॉकचेन में वितरित नोड्‍स (Distributed Nodes) के बीच आम सहमति प्राप्त की जाती है, जिसमें लेन-देन के केंद्रीकृत प्राधिकरण की आवश्यकता के बिना डिजिटल सामान के हस्तांतरण की अनुमति मिलती है।

ब्‍लॉकचेन कैसे काम करता है ?

ब्‍लॉकचेन के प्रमुख तत्व
(i)  वितरित खाता बही तकनीक (Distributed ledger technology):- सभी नेटवर्क प्रतिभागियों के पास वितरित खाता बही और उसके लेन-देन तक पहुंच होती है। इस साझा लेजर के साथ, लेन-देन केवल एक बार दर्ज किए जाते हैं, जो दोहराव को समाप्त करता है।
(ii) अपरिवर्तनीय रिकॉर्ड (Immutable Records):- साझा खाता बही में दर्ज होने के बाद कोई भी भागीदार लेन-देन को बदल या छेड़-छाड़ नही कर सकता है।
(iii) स्मार्ट अनुबंध (Smart Contract):- लेन-देन को गति देने के लिए नियमों का एक सेट जिसे, स्मार्ट अनुबंध उच्‍चारित किया जाता है, को ब्लॉकचेन पर संगृहीत किया जाता है और स्वचालित रूप से निष्पादित किया जाता है।


वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 18 अगस्त, 2022 को झारखण्ड में ब्‍लॉकचेन-आधारित प्‍लेटफाॅर्म का उपयोग करके किसानों को बीज का वितरण किया गया है।
    •  बीच वितरण में ब्‍लॉकचेन प्रौद्योगिकी लागू करने वाला झारखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है।

प्रमुख बिंदु

  • ब्लॉकचेन आधारित बीज वितरण कार्यक्रम का कार्यान्वयन झारखण्ड के कृषि निदेशालय और ब्‍लॉकचेन टेक कंपनी ‘सेटलमिंट’ (Settlemint) के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
  • इस प्रणाली में प्रत्येक किसान को उनके आधार नंबर और मोबाइल नंबर के साथ प्‍लेटफॉर्म पर पंजीकृत किया जाता है।
    • अब तक प्‍लेटफॉर्म पर 3 लाख से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं।
  • मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान कृषि विभाग ने ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के जरिए अनाज, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज के बीज वितरण को शामिल किया है।

किसानों को ब्लाॅकचेन आधारित बीज वितरण से लाभ 

  • वास्तविक समय में निगरानी से बिचौलियों का अंत।
  • नकली बीज वितरण पर रोक।
  • योजना में पारदर्शिता से चोरी को कम करने में मदद।
  • बीज का त्वरित वितरण।
  • लाभार्थियों की पहचान इत्यादि।

संकलन-पंकज तिवारी

 


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