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PSLV-C53/DS-EO मिशन

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 30 जून‚ 2022 को ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO) द्वारा PSLV-C53/DS-EO मिशन का प्रक्षेपण किया गया।
  • इस मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार के द्वितीय लांच पैड से प्रक्षेपित किया गया।

मिशन की खास बातें 

  • यह भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अधीन ‘न्यू स्पेस इण्डिया लिमिटेड’ (NSIL) का दूसरा पूर्णत: वाणिज्यिक मिशन था।
    • उल्लेखनीय है‚ कि फरवरी‚ 2021 में प्रक्षेपित PSLV-C51/अमेजोनिया-1 मिशन ‘न्यू स्पेस इण्डिया लिमिटेड’ द्वारा संचालित पहला पूर्णत: वाणिज्यिक मिशन था।
  • यह PSLV का 55वां तथा PSLV के कोर-अलोन (Core Alone) संस्करण का 15वां मिशन था।

प्रक्षेपित उपग्रह

  • इस मिशन के तहत‚ PSLV-C53 ने सिंगापुर के तीन उपग्रहों को 570 किमी. की ऊंचाई वाली वृत्ताकार कक्षा में स्थापित कर दिया।
    • ये तीन उपग्रह हैं :-

        (i) DS-EO

        (ii) NeuSAR तथा

        (iii) SCOOB-1

  • DS-EO षट्‌कोणीय (hexagonal) आकार का भू-अवलोकन उपग्रह (Earth Observation Satellite) है।
    • इसरो के अनुसार‚ इसका वजन लगभग 367 किग्रा. है।
    • यह उपग्रह अपने साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिक तथा मल्टी-स्पेक्ट्रल पेलोड ले गया है‚ जो पूर्णत रंगीन छवियां (full color images) उपलब्ध कराने के माध्यम से भू-वर्गीकरण (land classifications), मानवीय सहायता (humanitarian assistances) तथा आपदा राहत (disaster relief) प्रयोजनों में लाभकारी सिद्ध होंगे।
  • NeuSAR ‘सिंथेटिक अपर्चर रडार माइक्रो उपग्रह’ (Synthetic Aperture Radar Micro Satellite) है।
    • इसरो के अनुसार‚ इसका वजन लगभग 155 किग्रा. है।
    • यह सिंगापुर का प्रथम स्थानीय रूप से विकसित ‘सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (SAR) माइक्रोसैट है।
    • उल्लेखनीय है‚ कि जहां ऑटिकल कैमरा उपग्रह केवल दिन के समय एवं स्वच्छ मौसमी परिस्थितियों में ही छवियां (images) खींचने में सक्षम होते हैं‚ वहीं एक SAR उपग्रह दिन एवं रात दोनों समय एवं मेघ आच्छादन (Clouds Cover)‚ वर्षा एवं धुंध जैसी कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी छवियां खींच सकता है।
    • इसका कारण SAR उपग्रहों का रेडियों तरंगों पर निर्भर होना है‚ जबकि ऑप्टिकल उपग्रह प्रकाश तरंगों पर आधारित होते हैं।
  • SCOOB-1 नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय‚ सिंगापुर द्वारा निर्मित एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक उपग्रह है।
    • इसरो के अनुसार‚ इसका वजन 2.8 किग्रा. है। 
    • यह नई ‘छात्र उपग्रह शृंखला’ (S3-1) का प्रथम उपग्रह है।
    • यह एक जूते के डिब्बे (Shoe box) के आकार का उपग्रह है।
    • वस्तुत: यह सिंगापुर का प्रथम हेलियोफिजिक्स (heliophysics) मिशन है‚ जो सूर्य-पृथ्वी संबंध और पृथ्वी की जलवायु एवं मौसम पर सौर प्रभाव (solar impacts) को बेहतर रूप से समझने में मदद करेगा।

रॉकेट के चौथे चरण का पुनर्प्रयोग

  • सद्य: मिशन में PSLV के चौथे चरण (PS4 Stage) का उपयोग स्थिर कक्षीय प्लेटफॉर्म (Stabilized Orbital Platform) के रूप में किया गया।
    • यह प्रथम अवसर है‚ जब PS4 चरण एक स्थिर 
  • प्लेटफॉर्म के रूप में पृथ्वी की परिक्रमा करेगा।
  • उल्लेखनीय है‚ कि PSLV एक चार चरणीय रॉकेट है।
  • सामान्यत: किसी प्रक्षेपण के दौरान इस रॉकेट के प्रारंभिक तीन चरण एक-एक कर उससे अलग होकर समुद्र में गिर जाते हैं।
    • जबकि रॉकेट का चौथा चरण उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के पश्चात निष्क्रिय हो जाता है और उसके बाद या तो एक अंतरिक्षीय कचरे के रूप में अंतरिक्ष में भ्रमण करता रहता है या फिर पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश कर जलकर नष्ट हो जाता है। 
  • हालांकि‚ सद्य: मिशन के तहत इसरो ने उपग्रहों को स्थापित करने के बाद भी रॉकेट के चौथे चरण को सक्रिय रखकर उसकी उपयोगिता का प्रदर्शन किया।
  • सद्य: मिशन के तहत‚ PSLV-C53 के चौथे चरण को सौर पैनलों एवं लीथियम-आयन बैटरियों से लैस किया गया‚ ताकि वह उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के बाद भी सक्रिय रह सके।
    • इसे ‘PSLV कक्षीय प्रायोगिक मॉड्‌यूल’ (POEM : PSLV Orbital Experimental Module) नाम दिया गया।
    • इससे अंतरिक्षीय क्षेत्र में संलग्न स्टार्ट-अप्स को प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उद्देश्यों हेतु अपने पेलोड भेजने का अवसर प्राप्त हुआ।
  • POEM के माध्यम से कुल 6 पेलोड को अंतरिक्ष में भेजा गया।
    • इनमें से दो पेलोड अंतरिक्षीय क्षेत्र के भारतीय स्टार्ट-अप्स मेसर्स दिगंतारा (M/s Digantara) तथा मेसर्स ध्रुव स्पेस (M/s Dhruva Space) के थे।
  • उल्लेखनीय है‚ कि ISRO ने PS4 को एक कक्षीय प्लेटफॉर्म के रूप में प्रयोग करने की क्षमता का प्रदर्शन सर्वप्रथम जनवरी‚ 2019 में किया था।
    • उस मिशन के अंतर्गत छात्रों द्वारा निर्मित उपग्रह कलामसैट-वी2 को PSLV के चौथे चरण का एक कक्षीय प्लेटफॉर्म के रूप में प्रयोग करने वाले प्रथम उपग्रह होने का गौरव प्राप्त हुआ था।
  • जबकि सद्य: PSLV-C53 मिशन में PS4 चरण का स्थिर कक्षीय प्लेटफॉर्म के रूप में प्रयोग किया गया।
    • उल्लेखनीय है‚ कि वर्ष 2019 में प्रयुक्त कक्षीय
  • प्लेटफॉर्म में प्रौद्योगिकीय सुधार के माध्यम से उसे ‘स्थिर कक्षीय प्लेटफॉर्म’ में परिवर्तित कर दिया गया है।
    • ज्ञातव्य है‚ कि स्थिरीकरण (Stabilization) पेलोड (Payload) को पृथ्वी‚ सूर्य आदि के सापेक्ष ‘सही स्थिति’ (Correct position) में रखने में मदद करता है।
  • सद्य: मिशन के तहत‚ POEM को एक समर्पित ‘नैविगेशन निर्देशन एवं नियंत्रण प्रणाली’ (Navigation Guidance & Control System) से लैस किया गया‚ जिससे विशिष्ट शुद्धता (Specific accuracy) के साथ स्थिरीकरण को प्राप्त किया जा सके।

निष्कर्ष
    PS4-कक्षीय प्लेटफॉर्म (PS4-OP) ISRO द्वारा प्रतिपादित एक नवीन परिकल्पना है‚ जिसके तहत 1-6 माह तक की विस्तारित अवधि के लिए PSLV के चौथे चरण का प्रयोग कक्षा में वैज्ञानिक प्रयोगों को संचालित करने के लिए किया जा सकता है। वास्तव में‚ ISRO का उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का लाभ देश के वैज्ञानिक समुदाय तक पहुंचाना है‚ जिससे वे प्रभावी रूप से अपने प्रयोगों को डिजाइन‚ विकसित एवं सत्यापित करने के लिए कक्षीय प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर सकें। उल्लेखनीय है‚ कि ISRO ने अब तक अपनी विभिन्न वाणिज्यिक शाखाओं के माध्यम से PSLV द्वारा 34 देशों के 345 विदेशी उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रमोचन किया है।

संकलन-सौरभ मेहरोत्रा

 


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