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Post at: Aug 26 2022

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस सेवा का शुभारंभ

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 21 अगस्त, 2022 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुणे में केपीआईटी-सीएसआईआर द्वारा विकसित भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल बस को लांच किया ।
  • हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्‍नोलॉजी को सीएसआईआर-नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (सीएसआईआर-एनसीएल) और सीएसआईआर-सेंट्रल इलेक्ट्रोकेमिकल रिसर्च इंस्टीटयूट (सीएसआईआर-सीईसीआरआई) द्वारा सेंटिएंट लैब्स के सहयोग से विकसित किया गया है ।

कार्य प्रणाली

  • हाइड्रोजन टैंक आमतौर पर बस की छत पर बने होते हैं, जबकि ईंधन सेल और इलेक्ट्रिक इंजन बस के पीछे स्थित होते हैं।
  • हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक के अलावा, सेंटिएंट लैब्स ने प्‍लांट, पाॅवरट्रेन और बैटरी पैक जैसे अन्य प्रमुख घटकों को भी स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया है। 
  • इन सभी घटकों को 9 मीटर, 32-सीटर, वातानुकूलित बस में प्रयोग किया गया है। 
  • यह 30 किलोग्राम हाइड्रोजन का उपयोग करते हुए 450 किमी. की सीमा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। 
  • मॉड्‍यूलर आर्किटेक्चर रेंज और ऑपरेटिंग परिस्थितियों की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन में बदलाव की अनुमति देता है।

महत्व

  • ईंधन सेल बस को ऊर्जा देने के लिए बिजली उत्पन्‍न करने हेतु हाइड्रोजन और वायु का उपयोग करता है। 
  • इस प्रक्रिया में बस से निकलने वाला एकमात्र उत्पाद पानी है; इसलिए यह संभवत: परिवहन का सबसे ‘पर्यावरण के अनुकूल’ साधन है। 
  • यदि हाइड्रोजन बस से अन्य परंपरागत ईंधन से चलने वाले बसों की तुलना की जाए, तो लंबी दूरी के मार्गों पर चलने वाली एक डीजल बस आमतौर पर वार्षिक 100 टन CO2 का उत्सर्जन करती है और भारत में ऐसी दस लाख से अधिक बसें हैं।
  • डीजल बसों को हाइड्रोजन ईंधन सेल बसों से बदलने से हवा की गुणवत्ता में भारी सुधार होगा और तेल आयात लागत भी कम होगी।

सेंटिएंट लैब्स

  • ध्यातव्य है, कि सेंटिएंट लैब्स केपीआईटी टेक्‍नोलॉजीज द्वारा इनक्यूबेट की गई एक अनुसंधान और विकास नवाचार प्रयोगशाला है।
  • सेंटिएंट लैब्स का विजन हाइड्रोजन से चलने वाली प्रौद्योगिकियों पर जोर देने के साथ टिकाऊ गतिशीलता के लिए प्रौद्योगिकी समाधान तैयार करना है। 
  • इसने हाइड्रोजन उत्पादन के लिए बैटरी प्रौद्योगिकी, ईंधन सेल प्रौद्योगिकियों और प्रौद्योगिकियों में बाधाओं की पहचान की है ।
  • हाल ही में, सेंटिएंट ने दुनिया की पहली ऐसी तकनीक की घोषणा की थी, जो ईंधन सेल से चलने वाले वाहनों में उपयोग के लिए कृषि अवशेषों से सीधे हाइड्रोजन उत्पन्‍न करती है।

 

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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