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Post at: Aug 25 2022

GSAT-24 का सफल प्रक्षेपण

पृष्ठभूमि

  • भारत के अंतरिक्ष विभाग के अनुसार‚ वर्तमान में ‘वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था’ (global space economy) का आकार लगभग 360 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
  • अंतरिक्ष उड़ान संचालित करने में सक्षम विश्व के कुछ चुनिंदा देशों में से एक होने के बावजूद‚ भारत का वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में योगदान केवल 2 प्रतिशत (लगभग) है।
    • जबकि वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा 40 प्रतिशत तथा यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा 7 प्रतिशत है।
    • वर्ष 2030 तक वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत का हिस्सा बढ़कर 9 प्रतिशत हो जाने की संभाव्यता है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार

  • जून‚ 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमण्डल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में दूरगामी सुधारों को मंजूरी प्रदान की थी।
    • इसका उद्देश्य अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
  • उल्लेखनीय है‚ कि पिछले दो दशकों के दौरान अंतरिक्ष उड़ान सक्षम अन्य देशों में निजी क्षेत्र ने लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
    • स्पेसएक्स‚ ब्लू ओरिजिन‚ वर्जिन गैलेक्टिक तथा एरियनस्पेस जैसी कंपनियों ने लागत तथा अंतरिक्ष आवागमन के समय में कटौती के माध्यम से अंतरिक्ष क्षेत्र में क्रांति उत्पन्न कर दी है।
    • हालांकि‚ भारत में अभी तक अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी सरकारी अंतरिक्ष कार्यक्रम में विक्रेता या आपूर्तिकर्ता की भूमिका तक ही सीमित रही है।

प्रमुख सुधार

  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र’ (IN-SPACe : Indian National Space Promotion & Authorization Center) भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना का उपयोग करने हेतु निजी क्षेत्र की कंपनियों को समान अवसर उपलब्ध कराएगा।
  • ISRO की व्यावसायिक शाखा (Commercial arm) NSIL (New Space India Limited) अंतरिक्ष गतिविधियों को ‘आपूर्ति प्रेरित मॉडल’ (supply driven model) से ‘मांग प्रेरित मॉडल’ (Demand driven model) की ओर पुन: स्थापित करने का यत्न करेगी‚ जिससे अंतरिक्ष परिसंपत्तियों का इष्टतम उपयोग (optimum utilization) सुनिश्चित किया जा सके।
  • भारत सरकार द्वारा घोषित अंतरिक्ष सुधारों (Space Reforms) के तहत ही NSIL को ‘मांग प्रेरित मॉडल’ के आधार पर ‘कार्यशील उपग्रह मिशन’ को संचालित करने का अधिदेश (mandate) प्राप्त हुआ है।
    • इसके तहत‚ उपग्रह के निर्माण‚ लांच‚ स्वामित्व तथा संचालन के अतिरिक्त प्रतिबद्ध ग्राहक को सेवाएं उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व NSIL का होगा।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • भारतीय मानक समयानुसार 23 जून‚ 2022 को एरियनस्पेस द्वारा संचालित एरियन-5 रॉकेट (मिशन VA257) का प्रक्षेषण कौरू‚ फ्रेंच गुयाना (दक्षिण अमेरिका) से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 
    • सद्य: मिशन के तहत दो दूरसंचार उपग्रहों यथा GSAT-24 तथा MEASAT-3d को भूस्थिर कक्षा (geostationary orbit) में स्थापित कर दिया गया।

GSAT-24

  • GSAT-24 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा निर्मित उपग्रह है तथा यह ‘न्यू स्पेस इण्डिया लिमिटेड’ (NSIL) द्वारा स्वामित्व‚ संचालित एवं वित्त पोषित है।
    • यह उपग्रह अपने साथ 24 ku-बैण्ड ट्रांसपोण्डरों (Transponders) को लेकर गया है।
    • इस उपग्रह का वजन 4181.3 किग्रा. तथा मिशन जीवनकाल 15 वर्ष है।
    • इस उपग्रह का व्यावसायिक उपभोक्ता (Commercial user) मेसर्स टाटा प्ले है। 
    • NSIL ने 15 वर्ष की अवधि के लिए संपूर्ण उपग्रह क्षमता (entire satellite capacity) को मेसर्स टाटा प्ले को पट्टे (leased) पर दे दिया है।
    • यह उपग्रह देश की डी.टी.एच. (DTH : Direct-To-Home) संचार आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा।
    • GSAT-24 उच्च गुणवत्ता की टेलीविजन‚ दूरसंचार तथा प्रसारण सेवाएं प्रदान करेगा।
  • उल्लेखनीय है‚ कि GSAT-24 अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार के पश्चात NSIL का प्रथम मांग प्रेरित उपग्रह मिशन (Demand Driven Satellite Mission) है।
  • साथ ही यह एरियनस्पेस द्वारा प्रक्षेपित 25वां भारतीय उपग्रह है।

MEASAT-3d

  • MEASAT-3d मलेशिया के उपग्रह संचालक MEASAT का उपग्रह है।
  • यह एरियनस्पेस द्वारा प्रक्षेपित मलेशिया का चौथा उपग्रह है।
  • यह एयरबस डिफेंस एण्ड स्पेस द्वारा निर्मित एक बहु-मिशन दूरसंचार उपग्रह है।

निष्कर्ष 
GSAT-24 का सफल प्रमोचन ISRO द्वारा निर्मित स्वदेशी उपग्रहों के प्रयोग के माध्यम से देश की DTH संचार आवश्यकताओं को वाणिज्यिक रूप से पूरा करने की दिशा में NSIL द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

संकलन-सौरभ मेहरोत्रा

 


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