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ग्रामीण उद्यमी परियोजना चरण-II

पृष्ठभूमि 

  • कौशल और शिक्षा की कमी के कारण जनजातीय समुदाय का राष्ट्रीय औसत की तुलना में संगठित क्षेत्रों के आजीविका (रोजगार) में बहुत कम योगदान है। 
  • इस समस्या के समाधान के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा जनजातीय युवाओं में कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण उद्यमी परियोजना की शुरुआत की गई थी।
  • इस परियोजना के तहत मई‚ 2022 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत प्रशिक्षण शुरू किया गया था।
  • पहले चरण में महाराष्ट्र‚ राजस्थान‚ छत्तीसगढ़‚ मध्य प्रदेश और गुजरात (5 राज्य) के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिभागियों को शामिल किया गया।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 20 अगस्त‚ 2022 को रांची (झारखण्ड) में ग्रामीण उद्यमी परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत की गई।
  • इस पहल के अंतर्गत‚ युवाओं को बहु-कौशल प्रदान करना और उन्हें आजीविका उपार्जन के लिए सक्षम बनाने के लिए कार्यात्मक कौशल प्रदान करना शामिल है।

प्रमुख बिंदु

  • राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation : NSDC) द्वारा सेवा भारती और युवा विकास सोसाइटी के साथ साझेदारी में परियोजना के दूसरे चरण का शुभारंभ किया गया।
  • यह परियोजना छह (6) राज्यों - महाराष्ट्र‚ राजस्थान‚ छत्तीसगढ़‚ मध्य प्रदेश‚ झारखण्ड और गुजरात में लागू की जा रही है।
  • इस परियोजना की अवधारणा को केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर और आदिवासी सांसदों द्वारा कार्यान्वित किया गया था।

वित्तपोषण

  • परियोजना का वित्तपोषण राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा किया जा रहा है।

नोडल मंत्रालय

  • परियोजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय ’कौशल विकास एवं उद्यमिता’ मंत्रालय है।

अन्य बिंदु

  • जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए अन्य कदम :
  • ट्राइफेड (TRIFED) : यह एक राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष संगठन है‚ जो जनजातीय मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • ट्राइफेड‚ जनजातीय को अपना उत्पाद बेचने के लिए एक सुविधा प्रदाता और सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करता है।
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना : यह जनजातीय स्वयं सहायता समूहों में उद्यमिता विकास कार्यक्रम है। 
  • वन बंधु कल्याण योजना : योजना का उद्देश्य जनजातीय लोगों के आवश्यकता और परिणामोन्मुखी समग्र विकास के लिए सक्षम वातावरण बनाना है।
  • पीवीटीजी का विकास : इसके अंतर्गत 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) को उनके व्यापक सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए शामिल किया गया है।

 

संकलन - पंकज तिवारी


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