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Post at: Aug 25 2022

2 जी इथेनॉल संयंत्र

इथेनॉल (Ethanol) 

  • यह एक रंगहीन यौगिक एथिल एल्कोहॉल (Ethyl alcohol) है।
  • इथेनॉल का निर्माण मण्ड (Starch) और शुगर के किण्वन (Fermentation) से किया जाता है।
  • आमतौर पर गन्ना‚ मक्का और शर्करा जैसे मोटे अनाजों (कृषि उत्पाद) का उपयोग इथेनॉल निर्माण में किया जाता है।
  • चूंकि यह पादप आधारित उत्पाद है; इसलिए इसे नवीकरणीय ईंधन (Renewable Fuel) माना जाता है।

इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blended Program : EBP)

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना है।
  • इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कटौती एवं किसानों की आय बढ़ाना है।
  • गौरतलब है‚ कि भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल सम्मिश्रण (E 20) के लक्ष्य को वर्ष 2030 से घटाकर वर्ष 2025-26 तक कर दिया है।
  • जबकि‚ डीजल में 5 प्रतिशत इथेनॉल सम्मिश्रण हेतु वर्ष 2030 का लक्ष्य रखा गया है। 
  • विदित हो कि जून‚ 2022 में भारत ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E 10) का लक्ष्य तय समय-सीमा नवंबर‚ 2022 से पांच माह पूर्व हासिल कर लिया है।
  • यह घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर की गई थी।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 10 अगस्त‚ 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरियाणा के पानीपत में दूसरी पीढ़ी (Second Generation : 2 G) के   इथेनॉल संयंत्र का उद्‌घाटन किया गया। 
  • यह घोषणा विश्व जैव ईंधन दिवस (World Biofuel Day : WBD) के अवसर पर की गई।

उद्देश्य

  • देश में जैव ईंधन के उत्पादन (Production) और उपयोग (Usage) को बढ़ावा देना।
  • इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र को अधिक किफायती (Affordable),  सुलभ (Accessible), कुशल (Efficient) और टिकाऊ (Sustainable) बनाना।

प्रमुख बिंदु

  • इण्डियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा निर्मित यह संयंत्र पानीपत रिफाइनरी के निकट स्थित है।
  • इस संयंत्र का निर्माण 900 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत से किया गया है।
  • यह संयंत्र अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।

लक्ष्य

  • इस संयंत्र द्वारा इथेनॉल उत्पादन हेतु वार्षिक तौर पर लगभग दो लाख टन चावल के भूसे (Rice Straw) का उपयोग किया जाएगा।
  • उल्लेखनीय है‚ कि संयंत्र से वार्षिक तौर पर लगभग तीन करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन होगा।

लाभ

  • फसलों के अवशेषों का अंतिम उपयोग कर किसानों हेतु अतिरिक्त आय का सृजन होगा।
  • रोजगार की दृष्टि से‚ संयंत्र के संचालन में शामिल लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होंगे।
  • इसके साथ ही धान के भूसे (Rice Straw) को काटने (Cutting), संभालने (Handling), भण्डारण (Storage) आदि के जरिए आपूर्ति शृंखला में अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
  • इसके अतिरिक्त यह परियोजना ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वार्षिक लगभग तीन लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के बराबर की कमी लाने में योगदान देगी।
  • उदाहरणार्थ इसे देश की सड़कों से वार्षिक लगभग 63,000 कारों के हटने के बराबर माना जा सकता है।
  • मुख्य रूप से इस संयंत्र के माध्यम से दिल्ली‚ हरियाणा और एनसीआर में प्रदूषण में कमी आएगी।

’’प्रधानमंत्री जी-वन योजना’’

  • मार्च‚ 2019 में सरकार ने देश में 2 G इथेनॉल परियोजनाओं की स्थापना हेतु एकीकृत जैव इथेनॉल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए ’’प्रधानमंत्री जी-वन योजना’’ को अधिसूचित किया है।
  • प्रधानमंत्री जी-वन (JI-VAN) का पूर्ण रूप ’’जैव (J), ईंधन (I), वातावरण (V), अनुकूल (A), फसल अवशेष (A), निवारण (N)’’ है।
  • वर्ष 2018-19 से वर्ष 2023-24 की अवधि के लिए योजना हेतु कुल वित्तीय परिव्यय 1969.50 करोड़ रुपये है।
  • इसके साथ ही योजना के तहत‚ वाणिज्यिक परियोजनाओं हेतु अधिकतम वित्तीय सहायता 150 करोड़ रुपये प्रति योजना है।
  • जबकि‚ प्रदर्शन (Demonstration) परियोजनाओं हेतु अधिकतम वित्तीय सहायता प्रति परियोजना 15 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

संकलन - आदित्य भारद्वाज

 


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