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Post at: Aug 24 2022

पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी

परिचय

  • पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) वर्ष 2001 में स्थापित भारतीय पारंपरिक ज्ञान का एक प्राथमिक डाटाबेस है। 
  • इसे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और भारतीय चिकित्सा प्रणाली व होम्योपैथी विभाग (आईएसएम एण्ड एच, अब आयुष मंत्रालय) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया था। 
  • टीकेडीएल विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला संस्थान है और यह अन्य देशों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। 
  • टीकेडीएल में वर्तमान में आईएसएम से संबंधित मौजूदा साहित्य; जैसे आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और योग शामिल हैं। 
  • जानकारी व ज्ञान को पांच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं - अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश में डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है। 
  • टीकेडीएल दुनियाभर में पेटेंट कार्यालयों को पेटेंट परीक्षकों द्वारा समझने योग्य भाषाओं और प्रारूप में जानकारी प्रदान करता है, ताकि पेटेंट को गलत तरीके से प्राप्त करना संभव न रहे। 
  • अब तक, संपूर्ण टीकेडीएल डाटाबेस तक पहुंच की सुविधा दुनियाभर के 14 पेटेंट कार्यालयों को सिर्फ खोज और परीक्षण करने के उद्देश्य से दी गई है। 
  • टीकेडीएल के माध्यम से यह रक्षात्मक संरक्षण, भारतीय पारंपरिक ज्ञान को दुरुपयोग से बचाने में प्रभावी रहा है और इसे एक वैश्विक बेंचमार्क माना जाता है। 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • अगस्त, 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमण्डल ने पेटेंट कार्यालयों के अलावा, उपयोगकर्ताओं के लिए भी पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) डाटाबेस तक पहुंच का विस्तार करने की मंजूरी दे दी है। 
  • उपयोगकर्ताओं के लिए टीकेडीएल डाटाबेस को खोलना भारत सरकार का महत्वाकांक्षी और भविष्य-उन्मुख निर्णय है।
  • टीकेडीएल को सुलभ बनाने की परिकल्पना; नई शिक्षा नीति, 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विचारों को जानने-समझने और ज्ञान नेतृत्व को विकसित करने को ध्यान में रखते हुए की गई है।

महत्व

  • भारतीय पारंपरिक ज्ञान (टीके) में राष्ट्रीय और वैश्विक जरूरतों को पूरा करने की अपार क्षमता है, जिससे सामाजिक लाभ के साथ-साथ आर्थिक विकास भी होगा। 
  • पेटेंट कार्यालयों के अलावा डाटाबेस तक पहुंच का विस्तार करने की कैबिनेट की मंजूरी नवाचार और व्यापार को बढ़ाने की दिशा में मौजूदा तौर-तरीकों के साथ पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत और सह-चयन करने पर जोर देती है। टीकेडीएल; ज्ञान और तकनीकी सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए पारंपरिक ज्ञान संबंधी सूचना के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में कार्य करेगा। 
  • टीकेडीएल का वर्तमान कंटेंट, भारतीय पारंपरिक दवाओं को व्यापक रूप से अपनाने की सुविधा प्रदान करेगा, साथ ही नए निर्माताओं और नवोन्मेषकों को हमारी मूल्यवान ज्ञान विरासत के आधार पर लाभप्रद उद्यमों का निर्माण करने के लिए प्रेरित करेगा।

उपयोगकर्ता

  • टीकेडीएल बड़े पैमाने पर उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को पूरा कर सकता है, जिसमें शामिल होंगे - व्यवसाय/कंपनियां {हर्बल हेल्थकेयर (आयुष, फार्मा, फाइटोफार्मा (पादप-औषधि) और न्यूट्रास्यूटिकल्स (पौष्टिक-औषधीय), व्यक्तिगत देखभाल और अन्य एफएमसीजी}, शोध संस्थान : सार्वजनिक और निजी; शैक्षणिक संस्थान : शिक्षक और छात्र; और अन्य : आईएसएम कर्मी, ज्ञान धारक, पेटेंट प्राप्तकर्ता और उनके कानूनी प्रतिनिधि, और सरकार, कई अन्य आदि। 
  • टीकेडीएल डाटाबेस तक पहुंच की सुविधा एक सशुल्क सदस्यता मॉडल के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपयोगकर्ताओं को दी जाएगी। डाटाबेस को विभिन्‍न चरणों में खोला जाएगा।

भविष्य की योजना

  • भविष्य में, अन्य क्षेत्रों से भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर अधिक जानकारी टीकेडीएल डाटाबेस में जोड़ी जाएगी तथा इसके लिए "3पी – सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन" का दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। 
  • भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर गलत पेटेंट की मंजूरी को रोकने की अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी को पूरा करते हुए, टीकेडीएल डाटाबेस रचनात्मक व मेधावी लोगों को भी प्रेरित करेगा, ताकि वे एक स्वस्थ और प्रौद्योगिकी संपन्‍न समाज के लिए बेहतर, सुरक्षित और अधिक प्रभावी समाधान विकसित कर सकें। 
  • भारत की समृद्ध विरासत, नए सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत आधारशिला रखेगी। 

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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