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Post at: Aug 24 2022

बुंदेलखण्ड एक्‍सप्रेस-वे

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 16 जुलाई, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की उरई तहसील के कैथेरी (Kaitheri) गांव से ‘बुंदेलखण्ड एक्सप्रेस-वे’ का उद्‍घाटन किया।
  • विदित हो कि प्रधानमंत्री द्वारा 29 फरवरी, 2020 को इस एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया गया था।

परिचय

  • बुंदेलखण्ड क्षेत्र की प्रगति में विकास के लिए राज्य सरकार ने जनपद चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर व जालौन जैसे आर्थिक रूप से कम विकसित जिलों के सर्वांगीण विकास हेतु ‘बुंदेलखण्ड एक्‍सप्रेस-वे’ के निर्माण का संकल्प लिया था। 
  • इस एक्‍सप्रेस-वे के निर्माण से बुंदेलखण्ड क्षेत्र देश की राजधानी दिल्‍ली से आगरा-लखनऊ एक्‍सप्रेस-वे एवं यमुना एक्सप्रेस-वे के माध्यम से जुड़ गया है।
  • इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority : UPEIDA) द्वारा किया गया है।

विवरण

  • इसकी कुल अनुमानित लंबाई 296.070 किमी. है।
  • गौरतलब है‚ कि इस चार लेन वाले एक्सप्रेस-वे का निर्माण लगभग 14,850 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
    • भविष्य में इसे छ: लेन तक भी विस्तारित किया जा सकता है।
  • इसका प्रारंभ स्थान जनपद चित्रकूट के भरतकूप (Bharatkoop) के निकट एवं समाप्ति स्थान जनपद इटावा के ग्राम कुदरैल (Kudrail) के निकट है।
  • यह एक्सप्रेस-वे सात जिलों यथा- चित्रकूट‚ बांदा‚ हमीरपुर‚ महोबा‚ जालौन‚ औरैया और इटावा से होकर गुजरता है।
  • गौरतलब है, कि एक्सप्रेस-वे के संरेखण (alignment) पर पड़ने वाली मुख्य नदियों में शामिल बागेन‚ केन‚ श्यामा‚ चंदावल‚ बिरमा‚ यमुना‚ बेतवा एवं सेंगर हैं।

लाभ

  • एक्‍सप्रेस-वे के निर्माण से बंुदेलखण्ड क्षेत्र का सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • एक्‍सप्रेस-वे के प्रवेश नियंत्रित होने से वाहनों के ईंधन खपत में महत्वपूर्ण बचत एवं प्रदूषण नियंत्रण भी संभव हो सकेगा।
  • परियोजना से अाच्छादित (Covered) क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साथ ही कृषि (Agriculture), वाणिज्य (Commerce), पर्यटन (Tourism) तथा उद्योगों (Industrial)  की आय को बढ़ावा मिलेगा।
  • एक्‍सप्रेस-वे के निकट इण्डस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्‍यूट, शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान, मेडिकल संस्थान आदि की स्थापना हेतु भी अवसर सुलभ होंगे।
  • एक्सप्रेस-वे हैण्डलूम उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, भण्डारण गृह, मण्डी तथा दुग्‍ध आधारित उद्योगों की स्थापना हेतु एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में काम करेगा।

संकलन -आदित्य भारद्वाज

 


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