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Post at: Aug 24 2022

डिजिटल ऋणों के विनियमन हेतु मानदण्ड

डिजिटल ऋण

  • डिजिटल ऋण (Loan) से तात्पर्य एक ऐसे ऋण देने की पद्धति (Lending Model) पर आधारित मॉडल से है‚ जिसके तहत    ऑनलाइन तकनीक प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए ऋण वितरण किया जाता है। 
  • इसके अंतर्गत ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी सरल व त्वरित होती है।
  • डिजिटल ऋण बहुउद्देश्यीय प्रकृति के होते हैं‚ आप इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्तिगत और व्यावसायिक आवश्यकता के लिए ऋण का लाभ ले सकते हैं।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा डिजिटल उधारदाताओं को तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है:—

डिजिटल ऋण को विनियमित करने के लिए मानदण्डों की आवश्यकता क्यों है?

  • ऑनलाइन धोखाधड़ी और गैर-कानूनी गतिविधियों
  • तीसरे पक्ष के बेलगाम जुड़ाव
  • गलत बिक्री
  • डाटा गोपनीयता का उल्लंघन
  • अनुचित व्यावसायिक आचरण
  • अत्यधिक ब्याज दरों पर शुल्क लगाने
  • अनैतिक वसूली प्रथाएं‚ इत्यादि

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 10 अगस्त‚ 2022 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डिजिटल ऋण तंत्र को विनियमित करने के लिए मानदण्डों का पहला सेट जारी किया गया।
    • इससे पूर्व‚ आरबीआई ने जनवरी‚ 2021 में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल उधार (Working Group on Digital Lending : WGDL) पर एक कार्यदल का गठन किया था।

प्रमुख बिंदु

  • आरबीआई द्वारा जारी मानदण्ड डब्ल्यूजीडीएल (WGDL) की सिफारिश पर आधारित है।
  • आरबीआई द्वारा जारी मानदण्ड निम्नलिखित हैं। इन मानदण्डों को तीन पहलुओं को ध्यान में रखकर जारी किया गया है:–

1.     ग्राहक संरक्षण और आचरण के मुद्दे—

  • सभी ऋण संवितरण और पुनर्भुगतान केवल उधारकर्ता के बैंक खातों और विनियमित संस्थाओं के बीच ऋणदाता सेवा प्रदाता (Lending Service Providers : LSP) या किसी तीसरे पक्ष के पास - थ्रू या पूल खाते के बिना निष्पादित किए जाने हैं।
  • ऋण अनुबंध निष्पादित करने से पहले उधारकर्ता को एक मानकीकृत मुख्य तथ्य विवरण प्रदान किया जाना चाहिए।
  • वार्षिक प्रतिशत दर (Annual Percentage Ratio) के रूप में डिजिटल ऋणों की सभी समावेशी लागत को उधारकर्ताओं को प्रकट करना आवश्यक है।
  • उधारकर्ता की स्पष्ट सहमति के बिना ऋण सीमा में स्वत: वृद्धि  निषिद्ध है।
  • यदि उधारकर्ता द्वारा दर्ज की गई कोई शिकायत निर्धारित अवधि (वर्तमान में 30 दिनों) के भीतर विनियमित संस्थाओं द्वारा हल नहीं की जाती है‚ तो वह केंद्रीय बैंक - एकीकृत लोकपाल योजना के तहत शिकायत दर्ज कर सकता है। 

प्रौद्योगिकी और डाटा आवश्यकताएं

  • डिजिटल ऋण प्रदाता ऐप (डीएलए) द्वारा एकत्र किया डाटा आवश्यकता आधारित होना‚ स्पष्ट ऑडिट ट्रेल्स होना चाहिए और केवल उधारकर्ता की पूर्व सहमति से ही किया जाना चाहिए।
  • उधारकर्ताओं के लिए विशिष्ट डाटा के उपयोग के लिए सहमति को स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प प्रदान किया जाना चाहिए एवं पहले दी गई सहमति को रद्द करने का विकल्प भी शामिल है।

नियामक ढांचा

  • डीएलए के माध्यम से प्राप्त किसी भी उधार को विनियामक संस्थाओं द्वारा क्रेडिट सूचना कंपनियों को इसकी प्रकृति या अवधि के बावजूद रिपोर्ट किया जाना आवश्यक है। 

संकलन - पंकज तिवारी


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