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बुरहानपुर : पहला ’हर घर जल’ प्रमाणित जिला

जल जीवन मिशन

  • 15 अगस्त‚ 2019 को 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। 
  • उल्लेखनीय है‚ कि अगस्त‚ 2019 से ही भारत सरकार‚ राज्यों की भागीदारी में ’जल जीवन मिशन - हर घर जल’ को कार्यान्वित कर रही है।
  • यह मिशन ’जल शक्ति मंत्रालय’ के अंतर्गत आता है।

उद्देश्य

  • मिशन का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से पर्याप्त एवं नियमित रूप से शुद्ध जल (हर घर जल) की आपूर्ति है।

फोकस

  • मिशन के क्रियान्वयन हेतु निम्नलिखित बातों पर जोर दिया जा रहा है—
    • वर्षा जल का संचयन
    • सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा
    • जल संरक्षण अभियान
    • आमजन को जागरूक करना
    • बच्चों को जल महत्व की शिक्षा देना आदि। 

मिशन के लाभ

  • गौरतलब है‚ कि विगत कुछ वर्षों में देश के कई भागों में भू-जल का स्तर काफी नीचे हो गया है‚ अत: यह मिशन भू-जल स्तर में वृद्धि हेतु बेहद उपयोगी होगा। 
  • इसके साथ ही मिशन के अन्य लाभों में शामिल हैं; जैसे—
    • घरेलू पाइपलाइन से जल आपूर्ति
    • स्वच्छ और पीने योग्य जल की उपलब्धता
    • बेहतर स्थानीय बुनियादी ढांचा
    • जल की कम बर्बादी

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 22 जुलाई‚ 2022 को मध्य प्रदेश का ’बुरहानपुर’ जिला देश का पहला ’हर घर जल’ (Har Ghar Jal) प्रमाणित जिला बना।
  • उल्लेखनीय है‚ कि इसके अतिरिक्त गोवा के दो व दादर एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के 3 जिलों को ’हर घर जल’ प्रमाणित जिला घोषित किया गया है।

विवरण

  • गौरतलब है‚ कि बुरहानपुर के सभी 254 गांवों के 1,01,905 ग्रामीण घरों में ’कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’ (Functional Household Tap Connection : FHTC) को उपलब्ध कराया गया है। 
  • इसके साथ ही 640 स्कूलों‚ 547 आंगनवाड़ी केंद्रों और 440 अन्य सार्वजनिक संस्थानों में भी नल से जल उपलब्ध कराया गया है।
  • उल्लेखनीय है‚ कि जिले के सभी 254 गांवों में से प्रत्येक गांव के लोगों ने ग्राम सभाओं द्वारा पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से अपने गांव को ’हर घर जल’ घोषित किया।
    • सभी 254 गांवों में ग्राम जल और स्वच्छता समिति (Village Water and Sanitation Committee : VWSC) का गठन किया गया है।

 मिशन का विवरण

  • मिशन के तहत‚ गुणवत्ता प्रभावित गांवों‚ आकांक्षी जिलों‚ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों‚ कम पानी वाले इलाकों और सांसद आदर्श ग्राम योजना के गांवों को प्राथमिकता के आधार पर नल से जल प्रदान किया जा रहा है। 
  • यह मिशन ’सोपान’ (Bottom-Up) दृष्टिकोण का पालन करता है।
    • अर्थात‚ जहां समुदाय योजना बनाने से लेकर उसे कार्यान्वित करने‚ प्रबंधन संचालन और रख-रखाव के कार्य में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • वर्ष 2024 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (Village Water & Sanitation Committee : VWSC) का भी गठन किया जा रहा है।
  • जल गुणवत्ता और सतर्कता गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक गांव की पांच महिलाओं को अशुद्ध जल की जांच करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 
  • जल की जांच हेतु फील्ड टेस्ट किट का उपयोग किया जाता है।
  • इन किटों की मदद से निम्नलिखित नौ पैमानों पर पानी की जांच होती है—
    • पीएच (pH)
    • एल्केलाइन (alkalinity)
    • क्लोराइड (chloride)
    • नाइट्रेट (nitrate) 
    • पानी में सख्तपन (total hardness)
    • फ्लोराइड (floride)
    • आयरन (iron)
    • अंशरहित क्लोरीन (residual free chlorine)
    • H2S
  •  वर्तमान में देश में पानी की जांच हेतु 2,022 प्रयोगशालाएं हैं‚ जिसमें 454 प्रयोगशालाएं राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories : NABL) से मान्यता प्राप्त हैं।
  • उल्लेखनीय है‚ कि मिशन के तहत घरों में पानी के कनेक्शन को घर के मुखिया के आधार कार्ड संख्या से जोड़ा गया है। 

मिशन की प्रगति

  • जल जीवन मिशन डैशबोर्ड के अनुसार‚ 20 अगस्त‚ 2022 तक देशभर में लगभग 10 करोड़ (52.43%) से अधिक घरों के पास नल के पानी के कनेक्शन हैं।
  • राज्य स्तर पर गोवा‚ तेलंगाना और हरियाणा ने राज्य के सभी घरों को 100 प्रतिशत नल कनेक्टिविटी प्रदान की है।
  • वहीं केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी‚ अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह‚ दादर एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के सभी घरों को 100 प्रतिशत नल कनेक्टिविटी प्रदान की है।
  • 90 प्रतिशत से अधिक ’कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’ (Functional Household Tap Cnnection : FHTC) वाले राज्यों में पंजाब (99.93%), गुजरात (97.00%), बिहार (95.49%) और हिमाचल प्रदेश (94.85%) शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त सबसे कम FHTC वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश (15.74%), झारखण्ड (22.15%), राजस्थान (26.40%), छत्तीसगढ़ (26.72%) और पश्चिम बंगाल (29.17%) शामिल हैं।

 

​​​​​​​

संकलन - आदित्य भारद्वाज


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