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नए भारतीय रामसर स्थल

रामसर अभिसमय

  • आर्द्रभूमियों पर अभिसमय (Convention on Wetlands) को रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) के नाम से भी जाना जाता है।
    • यह आर्द्रभूमियों एवं उनके संसाधनों के संरक्षण तथा समझदारीपूर्वक उपयोग हेतु एक अंतरसरकारी संधि है।
    • इस संधि का उद्देश्य स्थानीय तथा राष्ट्रीय कार्यवाहियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आर्द्रभूमियों के संरक्षण को सुनिश्चित करना है।
  • इस अभिसमय का नामकरण ईरान के शहर रामसर के नाम पर किया गया है‚ जहां वर्ष 1971 में यह अभिसमय हस्ताक्षरित हुआ था।
  • रामसर अभिसमय वर्ष 1975 में प्रभावी हुआ था।
  • वर्तमान में इस अभिसमय के हस्ताक्षरकर्ता देशों की संख्या 172 है।

रामसर सूची

  • इस अभिसमय में शामिल होते समय प्रत्येक देश को अपने क्षेत्र के अंतर्गत स्थित न्यूनतम एक आर्द्रभूमि स्थल को ‘अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची’ (List of Wetlands of International Importance) में शामिल किए जाने के लिए नामित करना होता है।
    • अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची को ‘रामसर सूची’(Ramsar List) भी कहा जाता है।
  • वर्तमान में यह रामसर सूची विश्व में ‘संरक्षित क्षेत्रों’ (Protected Areas) का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
  • वर्तमान में विश्वभर में स्थित रामसर स्थलों (Ramsar Sites) की कुल संख्या 2455 है।
    • इन रामसर स्थलों के अंतर्गत कुल 255,897,678 हेक्टेयर क्षेत्र आच्छादित है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 3 अगस्त‚ 2022 को केंद्रीय पर्यावरण‚ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार‚ भारत के 10 नए स्थलों को रामसर स्थल घोषित किया गया है।
    • इस प्रकार अब भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है।
    • इन स्थलों के अंतर्गत देश का कुल 12,50,361 हेक्टेयर क्षेत्र आच्छादित है।
  • इन 10 नए स्थलों में से 6 स्थल तमिलनाडु में जबकि गोवा‚ कर्नाटक‚ मध्य प्रदेश तथा ओडिशा प्रत्येक में एक-एक स्थल स्थित हैं।
  • ये 10 नए स्थल हैं :-

    (i)     उधयामार्थनदापुरम पक्षी अभयारण्य‚ तमिलनाडु
    (ii)     वेदानथंगल पक्षी अभयारण्य‚ तमिलनाडु
    (iii)     कूंथनकुलम पक्षी अभयारण्य‚ तमिलनाडु
    (iv)     वेल्लोड पक्षी अभयारण्य‚ तमिलनाडु
  (v)    मन्नार की खाड़ी समुद्री जीवमण्डल रिजर्व (Gulf of Mannar Marine Biosphere Reserve), तमिलनाडु
    (vi)     वेम्बन्नूर वेटलैण्ड कॉम्प्लेक्स‚ तमिलनाडु
    (vii)    सिरपुर आर्द्रभूमि‚ मध्य प्रदेश
    (viii)    नंदा झील‚ गोवा
    (ix)     रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्य‚ कर्नाटक
    (x)     सतकोसिया गॉर्ज‚ ओडिशा

  • इस प्रकार अब तमिलनाडु में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।

उधयामार्थनदापुरम पक्षी अभयारण्य

  • यह अभयारण्य तमिलनाडु राज्य के तिरुवरुर जिले के तिरुथुरईपोण्डी तालुक में स्थित है।
  • यह अभयारण्य 43.8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • वस्तुत: यह लोक निर्माण विभाग द्वारा अनुरक्षित एक सिंचाई टैंक (irrigation tank) था‚ जिसे जल निकायों में रहने वाले पक्षियों के संरक्षण के लिए वर्ष 1998 में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया था।
  • स्थानीय प्रवासी और आवासीय जल पक्षियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण ‘बसेरा स्थल’ (roosting site) है।
  • सामान्यत: यहां पाए जाने वाले पक्षियों में ‘ब्लैक क्राउण्ड नाइट हेरॉन’ (Black-crowned Night Heron), लिटिल कॉर्मोरेंट (Little Cormorant) आदि प्रमुख हैं।
  • यह स्थल ‘ओपनबिल्ड स्टोर्क’ (Openbilled Stork) के सबसे बड़े समूह को आश्रय प्रदान करता है।

वेदानथंगल पक्षी अभयारण्य

  •  यह अभयारण्य तमिलनाडु के चेंगलपट्टु जिले में स्थित है।
  •  यह अभयारण्य 40.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  •  वेदानथंगल आर्द्रभूमि तथा उसके आस-पास के 5 किमी. क्षेत्र को वेदानथंगल पक्षी अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया है।
  • यह पक्षी अभयारण्य तमिलनाडु के साथ-साथ देश के सबसे पुराने पक्षी संरक्षित क्षेत्रों में से एक है।

    कूंथनकुलम पक्षी अभयारण्य

  • यह तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण मानव-निर्मित आर्द्रभूमि है।
  •  यह अभयारण्य लगभग 72.04 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है।
  •  इस आर्द्रभूमि को वर्ष 1994 में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया था।
  •  स्थानिक और प्रवासी जल पक्षियों के प्रजनन के लिए यह दक्षिण एशिया में स्थित सबसे बड़ा रिजर्व है।
  • यह एक महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र है‚ जो ‘मध्य एशियाई उड़ानमार्ग’ (Central Asian Flyway) का भाग है।
  • इस स्थल के अंतर्गत सिंचाई टैंक (irrigation tanks) शामिल हैं‚ जो नहरों (Canals) के नेटवर्क से अंतर्संबद्ध हैं।

वेल्लोड पक्षी अभयारण्य 

  •  यह अभयारण्य तमिलनाडु के इरोड जिले में स्थित है। 
  •  इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 77.2 हेक्टेयर है। 
  •  इस अभयारण्य को पक्षियों के प्रजनन पर्यावास (breeding habitat) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • इसे राज्य में आंशिक रूप से जलमग्न वृक्षों वाले शीर्ष 10 प्रजनन स्थलों में सूचीबद्ध किया गया है।

मन्नार की खाड़ी समुद्री जीवमण्डल रिजर्व

  •  मन्नार की खाड़ी समुद्री जीवमण्डल रिजर्व तमिलनाडु के तूतुकुड़ी और रामनाथपुरम जिलों के मध्य विस्तारित है। 
  •  यह भारत की दक्षिण-पूर्वी तटरेखा में स्थित है।
  •  इसका अद्वितीय समुद्री पर्यावरण‚ जैव विविधता में समृद्ध है।
  •  यह दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित पहला समुद्री जीवमण्डल रिजर्व है।
  •  यह रिजर्व 52671.876 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है। 
  •  यह रिजर्व भारत सरकार और तमिलनाडु सरकार की संयुक्त घोषणा के माध्यम से 18 फरवरी‚ 1989 को अस्तित्व में आया था।
  • इसे यूनेस्को के ‘मैन एण्ड बायोस्फीयर प्रोग्राम’ (Man & Biosphere Programme) द्वारा भी मान्यता प्रदान की गई है।
  • इस रिजर्व के अंतर्गत ‘मन्नार की खाड़ी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान’ (Gulf of Mannar Marine National Park) स्थित है।
  • यह रिजर्व भारत के सर्वाधिक जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है‚ जिसमें प्रवाल (corals) की 117 प्रजातियां‚ 450 से अधिक मत्स्य प्रजातियां‚ समुद्री शैवाल की 147 प्रजातियां आदि पाई जाती हैं।

वेम्बन्नूर वेटलैण्ड कॉम्प्लेक्स

  • यह एक मानव-निर्मित अंत:स्थलीय टैंक (inland tank) है‚ जो 19.7 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यह तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में स्थित है।
  • यह भारतीय मुख्यभूमि के सुदूर दक्षिणी छोर (southernmost point) पर स्थित है।

सिरपुर आर्द्रभूमि

  • यह मानव-निर्मित आर्द्रभूमि इंदौर‚ मध्य प्रदेश में स्थित है। 
  • इसका क्षेत्रफल 161 हेक्टेयर है। 
  • सामान्यत: पक्षी विहार के नाम से लोकप्रिय यह स्थल एक उथली (shallow)‚ क्षारीय एवं पोषक तत्वों से समृद्ध झील है। 
  • वर्तमान में इसे एक पक्षी अभयारण्य तथा ‘पारिस्थितिकीय ज्ञान केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

नंदा झील 

  • यह झील गोवा राज्य के दक्षिण गोवा जिले में स्थित है।
  • इसे आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम‚ 2017 के अंतर्गत आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित किया गया है।
  • यह अधिकांश क्षेत्र मीठे पानी की दलदली भूमि है‚ जो जुवारी नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक के निकट स्थित है।

रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्य 

  • यह अभयारण्य कर्नाटक राज्य के माण्ड्‌या जिले में अवस्थित है।
  • यह कावेरी नदी के 6 द्वीपों और 6 द्वीपिकाओं से मिलकर बना है।
  • बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी’ (Bombay Natural History Society) द्वारा इसे कर्नाटक एवं भारत के ‘महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्रों’ (IBA) में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

सतकोसिया गॉर्ज 

  • इसकी स्थापना वर्ष 1976 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में हुई थी।
  • सतकोसिया नाम का उद्‌गम दो शब्दों यथा सत (अर्थात सात) तथा कोस (अर्थात 2 मील) से हुआ है‚ जो इस 
  • गॉर्ज की लंबाई; अर्थात 14 मील या 22.4 किमी. को इंगित करता है। 
  • इस क्षेत्र को वर्ष 2007 में ‘सतकोसिया बाघ अभयारण्य’ घोषित किया गया था।
  • इस बाघ अभयारण्य के अंतर्गत दो आसन्न वन्यजीव अभयारण्य यथा ‘सतकोसिया गॉर्ज अभयारण्य’ तथा ‘बैसीपल्ली अभयारण्य’ शामिल हैं।
  • यह आर्द्रभूमि ओडिशा के चार जिलाें यथा- अंगुल‚ कटक‚ नयागढ़ तथा बौध में फैली हुई है। 
  • इसका कुल क्षेत्रफल 98196.72 हेक्टेयर है।
  • यह क्षेत्र ‘महानदी हाथी रिजर्व’ (Mahanadi Elephant Reserve) का भी अंग है। 
  • सतकोसिया भारत के दो जैव-भौगोलिक क्षेत्रों यथा दक्कन प्रायद्वीप तथा पूर्वी घाट का ‘मिलन स्थल’ (meeting point) है।

 इसके पूर्व 26 जुलाई‚ 2022 को केंद्रीय पर्यावरण‚ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार‚ भारत की 5 आर्द्रभूमियों को ‘अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों’ (Wetlands of International Importance) के रूप में निर्दिष्ट किया गया है।

  • ये पांच नई आर्द्रभूमियां हैं-

    (i)    करीकिली पक्षी अभयारण्य‚ तमिलनाडु
    (ii)    पल्लिकरनई मार्श रिजर्व फॉरेस्ट‚ तमिलनाडु
    (iii)    पिचवरम मैंग्रोव‚ तमिलनाडु
    (iv)    पाला आर्द्रभूमि‚ मिजोरम
    (v)    साख्य सागर‚ मध्य प्रदेश

करीकिली पक्षी अभयारण्य

  • रामसर साइट्‌स इन्फॉर्मेशन सर्विस के अनुसार‚ यह अभयारण्य तमिलनाडु राज्य में अंशत: चेंगलपट्टु जिला एवं अंशत: कांचीपुरम जिला के प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत स्थित है।
  • इसका कुल क्षेत्रफल 58.4 हेक्टेयर है। 
  •  इसे वर्ष 1972 में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया था।

पल्लिकरनई मार्श रिजर्व फॉरेस्ट

  • यह स्थल तमिलनाडु में चेन्नई शहर के प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत स्थित है।
  • इसका कुल क्षेत्रफल 1247.5 हेक्टेयर है।
  • यह मीठे पानी की दलदली एवं अंशत: लवणीय आर्द्रभूमि है।
  • यह आर्द्रभूमि बाढ़-प्रवण चेन्नई एवं चेंगलपट्टु जिलों हेतु जलीय बफर (Aquatic buffer) का काम करती है।

    पिचवरम मैंग्रोव

  •  यह स्थल तमिलनाडु में कुड्डलोर (Cuddalore) जिले के प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत स्थित है। 
  •  यह भारत में सबसे बड़े मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र में से एक है।
  •  इसका कुल क्षेत्रफल 1478.6 हेक्टेयर है।
  •  यह वेल्लार तथा कोलेरून (Coleroon) नदियों के मुहाने के मध्य स्थित है।
  •  इसे 1893 ई. में रिजर्व फॉरेस्ट घोषित कर दिया गया था।

    पाला आर्द्रभूमि

  • यह मिजोरम में स्थित सबसे बड़ी प्राकृतिक आर्द्रभूमि है।
  •  इसका कुल क्षेत्रफल 1850 हेक्टेयर है।

साख्य सागर

  • यह मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित आर्द्रभूमि है।
  • यह 248 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यह एक मानव-निर्मित जलाशय है‚ जो माधव राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के अंतर्गत स्थित है।

संकलन-सौरभ मेहरोत्रा


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