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Post at: Aug 08 2022

मौद्रिक नीति वक्तव्य‚ 2022-23

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 5 अगस्त‚ 2022 को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली ‘मौद्रिक नीति समिति’ (MPC) द्वारा ‘मौद्रिक नीति वक्तव्य‚ 2022-23’ (Monetary Policy Statement, 2022-23) जारी किया गया।
  • समिति द्वारा जारी इस मौद्रिक नीति वक्तव्य में ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF : Liquidity Adjustment Facility) के तहत‚ नीतिगत रेपो दर में तत्काल प्रभाव से वृद्धि करते हुए पूर्व के स्तर (4.90%) से 50  आधार अंक बढ़ाकर 5.40  प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया।
    • परिणामस्वरूप‚ स्थायी जमा सुविधा (SDF: Standing Deposit Facility) दर 5.15 प्रतिशत तथा सीमांत स्थायी सुविधा (MSF : Marginal Standing Facility) दर एवं बैंक दर 5.65 प्रतिशत हो गई।

  • 4 मई‚ 2022 के मौद्रिक नीति वक्तव्य में नकद आरक्षी अनुपात  (CRR : Cash Reserve Ratio) में 0.50 प्रतिशत वृद्धि करने की घोषणा की गई थी‚ जो 21 मई‚ 2022 से प्रभावी है।
  • वर्ष 2022-23 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत अनुमानित है।
  • 15 मई‚ 2022 तक वाणिज्यिक बैंकों से मुद्रा आपूर्ति (M3) और बैंक ऋण (वर्ष-दर-वर्ष) में क्रमश: 7.9 प्रतिशत और 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
    • 29 जुलाई‚ 2022 तक भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार 573.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

स्थायी जमा सुविधा दर (Standing Deposits Facility Rate):

  • 8  अप्रैल‚ 2022 के ‘विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य’ में की गई घोषणा के अनुरूप स्थायी जमा सुविधा (SDF)  का परिचालन तत्काल प्रभाव (8 अप्रैल‚ 2022)  से लागू किया गया। 
  • स्थायी जमा सुविधा दर (SDFR) चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF)  कॉरिडोर के आधार (फ्‍लोर) के रूप में प्रत्यावर्तनीय रिवर्स रेपो दर (FRRR)  की जगह लेगी‚ जो  नीतिगत रेपो दर से 25 आधार अंक कम होगी।
  • ध्यातव्य है‚ कि वर्ष 2014 में उर्जित पटेल समिति की रिपोर्ट में ‘स्थायी जमा सुविधा दर’ (SDFR)  की सिफारिश की गई थी‚ जो 8 अप्रैल‚ 2022 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)  की नीति का हिस्सा बनी।
  • स्थायी जमा सुविधा (SDF)  एक ऐसी सुविधा है‚ जिसके तहत अधिशेष तरलता निकालने के लिए किसी भी प्रकार की जमानत (Collateral) की आवश्यकता नहीं होती है।
  • वस्तुत: जब बैंकों को अल्पावधि के लिए धन की आवश्यकता होती है‚ तो वे RBI  से रेपो दर (Repo Rate) पर उधार लेते हैं‚ जिसके लिए उन्हें सरकारी प्रतिभूतियां (Govt. Securities)  गिरवी रखनी पड़ती हैं।
  • इसी प्रकार‚ जब बैंकों के पास अधिक राशि होती है‚ तो वे उसे RBI  में िरवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate)  पर जमा करते हैं। यहां भी सरकारी प्रतिभूतियां जमानत का काम करती हैं।
    • SDF इसी  प्रकार की सुिवधा है‚ लेकिन इसमें किसी जमानत  (Collateral)  की आवश्यकता नहीं होती है।

 

संकलन-शिवशंकर तिवारी

 


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