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प्रवासी मोनार्क तितली : लुप्‍तप्राय के रूप में वर्गीकृत

प्रवासी मोनार्क तितली

  • प्रवासी मोनार्क तितली (Butterfly) या केवल मोनार्क डोनास प्‍लेक्‍सिपस तितली की एक उप-प्रजाति है, जो निंफैलिडे (Nymphalide) परिवार में एक मिल्‍कवीड बटरफ्‍लाई (Milkweed butterfly) है।
  • इसका वैज्ञानिक नाम डोनास प्‍लेक्सिपस प्‍लेक्सिपस (Donaus Plexippus Plexippus) है।
  • क्षेत्र के आधार पर इन्हें मिल्कवीड, कॉमन टाइगर, वाण्डरर और ब्‍लैक-वेंड-ब्राउन आदि नामों से भी जाना जाता है।
  • भारत मे ये ‘कॉमन टाइगर’ नाम से पाई जाने वाली आम तितलियों में से एक है।
  • मूलत: इन्हें उत्तरी अमेरिकी तितलियों के रूप में पहचाना जाता है।
  • इनकी विशेषता यह है, कि ये प्रत्येक वर्ष उत्तरी अमेरिका में लगभग 4000 किलोमीटर की यात्रा करती हैं।
  • मादा मोनार्क तितली अपने प्रत्येक अण्डे को अलग-अलग मिल्कवीड (Milkweed)  पौधे पर स्रावित करती है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • वर्ष 1964 में स्थापित आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची, जैविक प्रजातियों (पशु, कवक और पौधों की प्रजातियों) के विलुप्‍त होने के जोखिम को परिभाषित करती है।
  • इसे नौ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

  • जिसमें ‘गणना नही होने’ से लेकर ‘विलुप्‍त’ होने तक  की श्रेणियों को शामिल किया गया है।

प्रमुख बिंदु

मोनार्क तितली के विलुप्‍त होने के कारण

  • मोनार्क तितली विशेषकर मिल्कवीड पौधे पर ही अण्डे देती है, लेकिन किसानों द्वारा खरपतवारनाशी के उपयोग के कारण इस पौधों की आबादी में कमी आई है।
  • कानूनी और अवैध वृक्षो की कटाई और वनों की कटाई, कृषि और शहरी विकास, इनके आवास के विनाश का कारण बनते हैं।
  • कैलिफोर्निया व उत्तरी अमेरिका के अन्य क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती ‘जंगल में आग’ की घटनाओं ने भी इनके आवास को क्षतिग्रस्त किया है।
  • IUCN के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशक में इन प्रवासी मोनार्क तितलियों की आबादी में लगभग 22 से 72 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
  • इनके विलुप्‍त होने के प्रमुख कारणों में मनुष्य के द्वारा अनियंत्रित विकासात्मक परियोजनाओं के फलस्वरूप जलवायु परिवर्तन का नकारात्मक प्रभाव भी शामिल है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • IUCN के मुताबिक, 41,000 से अधिक प्रजातियों के विलुप्‍त होने का खतरा है।
  • जिसे वैज्ञानिकों द्वारा ग्रह की छठी सामूहिक विलुप्त (Sixth Mass Extinction) की संज्ञा दी जा रही है और पहली बार मनुष्य इसका कारण होगा।

संकलन-पंकज तिवारी
 


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