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Post at: Aug 04 2022

पृथ्वी की विवर्तनिक प्‍लेटों का नया मानचित्र जारी

परिचय

  • यूनाइटेड स्टेट्‌स जियोलॉजिकल सर्वे (United States Geological Survey)  के अनुसार‚ एक टेक्टोनिक प्‍लेट‚ ‘‘ठोस चट्‌टान का एक विशाल‚ अनियमित आकार का स्लैब है‚’’ जो लिथोस्फीयर (स्थलमण्डल) या पृथ्वी की शीर्ष परत से बना है।
  • टेक्टोनिक प्‍लेट की गति अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी का कारण बनती है।
  • प्‍लेट विवर्तनिकी एक वैज्ञानिक सिद्धांत है‚ जो यह वर्णित करता है‚ कि पृथ्वी की आंतरिक गतियों के परिणामस्वरूप भू-आकृतियां कैसे बनती हैं।
  • वर्ष 1955 में सर्वप्रथम कनाडा के भू-वैज्ञानिक जे. टूजो विल्सन (J. Tuzo wilson)  ने प्‍लेट शब्द का प्रयोग किया।
  • वर्ष 1967 में मैकेंजी‚ मॉर्गन व पारकर द्वारा पूर्व के उपलब्ध विचारों को समन्वित कर ‘प्‍लेट विवर्तनिकी सिद्धांत’ का प्रतिपादन किया गया।
  • अंतिम बार टेक्टोनिक प्‍लेट मॉडल को वर्ष  2003 में अद्यतन (Update) किया गया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 8 जून‚ 2022 को ऑस्ट्रेलिया के ऐडिलेड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्‍लेट विवर्तनिक पर एक नया अध्ययन (Study) पेश किया।
  • इसके अंतर्गत प्‍लेट विवर्तनिक पर एक नया नक्शा पेश किया।
  • यह रिपोर्ट ‘‘न्यू मैप्स ऑफ ग्लोबल जियोलॉजिकल प्रोविंसेस एण्ड टेक्‍टॉनिक प्‍लेट्‌स’’ (New Maps of Global Geoloical Provinces and Tectonic Plates) शीर्षक के तहत प्रकाशित की गई ।
  • रिपोर्ट के अंतर्गत पहले विशाल महाद्वीप (Supercontinent) वालबरा जैसे महाद्वीपों के पूर्ण निर्माण पर गहन शोध प्रकाशित किया गया है। 

प्रमुख बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार‚ वालबरा महाद्वीप अगले कई वर्षों तक अन्य विशाल महाद्वीपों का निर्माण करता रहा।
  • इनमें अंतिम विशाल महाद्वीप पैंजिया (Pangaea) था‚ यह 355-65 मिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में था।
  • पैंजिया से सात आधुनिक महाद्वीपों का निर्माण हुआ‚ जो पृथ्वी की सतह निर्मित करते हैं।

  • शोधकर्ताओं ने नया मानचित्र बनाने के लिए तीन भू-वैज्ञानिक मॉडलों को एक साथ जोड़ा है।

(i) प्‍लेट मॉडल : यह प्‍लेट सीमाओं के मौजूदा ज्ञान पर आधारित है।
(ii) प्रोविंस (भूखण्ड) मॉडल : यह पृथ्वी की सतह के भू-विज्ञान पर आधारित है।
(iii) आरगेनी (पर्वतन) मॉडल :  यह पर्वत निर्माण प्रक्रिया पर आधारित है। दो विवर्तनिक प्‍लेटों के टकराने से यह पर्वत निर्माण प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

  • नए मानचित्र के शोध में पाया गया कि प्‍लेट बाउण्ड्री जोन पृथ्वी की पपड़ी के लगभग 16 प्रतिशत और महाद्वीपों के 27 प्रतिशत से भी अधिक हिस्से में विस्तारित है।
  • विवर्तनिक प्‍लेटों का नया मॉडल पिछले दो मिलियन वर्षों  से 90 प्रतिशत भूकंप और 80 प्रतिशत ज्वालामुखियों के स्थानिक वितरण की बेहतर व्याख्या करता है।
  • जबकि मौजूदा मॉडल केवल 65 प्रतिशत भूकंपों को ही पकड़ते हैं।
  • नए प्‍लेट मॉडल में मैक्‍वेरी (Macquarie) माइक्रोप्‍लेट सहित नए माइक्रोप्‍लेट्‍स (सूक्ष्म प्‍लेट) शामिल हैं, जो तस्मानिया के दक्षिण में स्थित हैं।
  • साथ ही भारतीय और ऑस्ट्रेलिया प्‍लेटों को अलग करने वाले माइक्रोप्‍लेट को भी शामिल किया गया है।
  • प्‍लेट मॉडल में सबसे बड़ा परिवर्तन पश्चिमी-उत्तरी अमेरिका में हुआ है, जिसमें अक्सर सैन एण्ड्रियास और क्‍वीन शार्लोट फॉल्‍ट्‍स के रूप में खींची गई प्रशांत प्‍लेट के साथ सीमा होती है।
  • दूसरा बड़ा परिवर्तन मध्य एशिया यूरेशिया प्‍लेट में किया गया है, जिसमें भारत के उत्तर में अवस्थित सभी विरूपण (Deformation) क्षेत्र शामिल किए गए हैं।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • नए प्‍लेट मॉडल में मैक्‍वेरी माइक्रोप्‍लेट्‍स (Macquarie Microplates) सहित कई नई माइक्रोप्‍लेट्‍स शामिल की गई हैं। 
  • मैक्‍वेरी माइक्रोप्‍लेट्‌स तस्मानिया के दक्षिण में स्थित है।
  • कैप्रीकॉर्न माइक्रोप्‍लेट भारतीय और ऑस्ट्रेलिया प्‍लेटों को अलग करती है।

नोट-ज्ञातव्य है‚ कि महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत का प्रतिपादन जर्मन वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगनर द्वारा दिया गया था।

महत्व

  • यह प्‍लेट सीमाओं के समीप आने वाली भूकंप और ज्वालामुखी जैसे प्राकृतिक विपदाओं की बेहतर समझ प्रदान करता है।

संकलन-पंकज तिवारी


 


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