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Post at: Aug 02 2022

विमानवाहक युद्धपोत [(IAC(P71)] ‘विक्रांत’

 वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 28 जुलाई‚ 2022 को देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत ‘‘विक्रांत’’ [IAC (P71)] को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा भारतीय नौसेना को सौंपा गया।
  • इन विमान वाहक को जल्द ही भारतीय नौसेना में ‘आईएनएस विक्रांत’ के रूप में शामिल किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • वर्तमान में‚ आईएनएस विक्रमादित्य (रूस निर्मित एडमिरल गोर्शकोष) भारतीय नौसेना का एकमात्र विमानवाहक पोत है, जिसे वर्ष 2013 में शामिल किया गया था। 
  • देश के पहले दो विमानवाहक पोत‚ आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विराट क्रमश: वर्ष 1961 और वर्ष 1987 में नौसेना में शामिल हुए थे, जो ब्रिटेन द्वारा निर्मित थे।
  • आईएनएस विक्रांत भारत का सबसे पहला विमानवाहक पोत था, जो वर्ष 1997 में सेवामुक्त हुआ।
  • आईएनएस विक्रांत ने वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • आईएनएस विक्रांत द्वारा देश को मिले स्वाभिमान के कारण नए युद्ध पोत को भी विक्रांत नाम दिया गया है।
  • वर्ष 2002 में सुरक्षा पर मंत्रिमण्डल समिति ने परियोजना निर्माण को मंजूरी दी।
  • वर्ष 2007 में निर्माण के पहले चरण के लिए कोचीन शिपयार्ड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।
  • यह परियोजना रक्षा मंत्रालय और सीएसएल के मध्य अनुबंध के तीन चरणों में आगे बढ़ी है‚ जो क्रमश: मई, 2007; दिसंबर, 2014 और अक्टूबर, 2019 में पूर्ण हुई है।
  • गौरतलब है, कि पोत की नींव फरवरी, 2009 में रखी गई थी‚ पश्चात अगस्त, 2013 में इसे लांच किया गया था।

विशेषता

  • भारतीय नौसेना के ‘नौसेना डिजाइन निदेशालय’(DND) द्वारा डिजाइन किया गया स्वदेशी विमानवाहक (आईएसी)‘विक्रांत’ जहाजरानी मंत्रालय (एमओएस) के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा निर्मित पहला विमानवाहक पोत है।
  • विक्रांत 76 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ का एक प्रमुख उदाहरण है।
  • स्वदेशी विमानवाहक पोत 262 मीटर लंबा‚ 62 मीटर चौड़ा और 59 मीटर ऊंचा है।
  • इस जहाज में 88 मेगावाॅट विद्युत की चार गैस टर्बाइनें लगी हैं। 
  • इसका पूर्ण विस्थापन (Full displacement) लगभग 45,000 टन है और यह अपने पूर्ववर्ती की अपेक्षा बहुत बड़ा और आधुनिक है।
  • विक्रांत के पास 28 समुद्री मील की शीर्ष गति और लगभग 7500 समुद्री मील की क्षमता के साथ 18 समुद्री मील की परिभ्रमण गति है।
  • यह लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर सहित कुल 34 मिश्रित विमानों को ले जाने में सक्षम है।
  • यह पोत स्वदेश निर्मित उन्‍नत किस्म के हल्के हेलीकॉप्टर (LAH)  और हल्के लड़ाकू विमान (LAC)  के अलावा MIG-29  के लड़ाकू जेट‚ कामोव-31‚ एमएच-60R और मल्टी रोल हेलीकॉप्‍टरों के साथ 30 विमानों से युक्त एयरविंग के संचालन में सक्षम है।
  • यह विमान वाहक पोत‚ बराक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LR-SAM) वायु रक्षा और एके-630 क्‍लोन्‍नज-इन हथियार प्रणाली के अलावा उन्‍नत सेंसर और एक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण से युक्त है।
  • विक्रांत पर कामोव -31 आरंभिक चेतावनी तथा कामोव-26 पनडुब्बी रोधी युद्धक हेलीकॉप्टर भी होगा।

संकलन-आदित्य भारद्वाज


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