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Post at: Aug 02 2022

वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट‚ 2022

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 29 जून‚ 2022 को यू.एन. हैबिटेट ने ‘‘विश्व शहरों की रिपोर्ट‚ 2022 : शहरों के भविष्य की परिकल्पना’’ (World Cities Report, 2022 : Envisaging the future of cities) शीर्षक से जारी की।
  • इस रिपोर्ट को वर्ल्ड अर्बन फोरम के 11वें सत्र के दौरान जारी किया गया। 
  • ध्यातव्य है‚ कि वर्ल्ड अर्बन फोरम का ग्यारहवां सत्र 26-30 जून‚ 2022 के मध्य पोलैण्ड के केटोविस नामक शहर में आयोजित हुआ था। 
  • फोरम के वर्तमान सत्र का विषय ‘बेहतर शहरी भविष्य के लिए हमारे शहरों को बदलना’ (Transforming our cities for a better urban future) था। 
  • ध्यातव्य है‚ कि वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य- 11 के लक्ष्य के अनुरूप है‚ जिसमें कहा गया है ’’शहरों को समावेशी‚ सुरक्षित‚ लचीला व टिकाऊ बनाना’’। 

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु

  • रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2035 तक भारत की शहरी आबादी 675 मिलियन होने का अनुमान है‚ जो चीन की 1 बिलियन शहरी आबादी के बाद दूसरा सर्वाधिक शहरी आबादी वाला देश होगा। 
  • कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक शहरी आबादी में तेजी देखी जा रही है‚ जिसके वर्ष 2050 तक 2.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार‚ कोविड-19 महामारी के कारण शहरीकरण की तेजी में अस्थायी तौर पर रुकावट देखी गई।
  • भारत की शहरी आबादी वर्ष 2035 तक 67,54,56,000 होने का अनुमान है। वर्ष 2020 में यह आबादी 48,30,99,000 थी‚ जो वर्ष 2025 में बढ़कर 54,27,43,000 तथा वर्ष 2030 में बढ़कर 60,73,42,000 हो जाएगी।
  • वर्ष 2035 के मध्य तक भारत में शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जनसंख्या का प्रतिशत 43.2 प्रतिशत होगा। 
  • वर्ष 2035 तक चीन की शहरी आबादी 1.05 बिलियन होने का अनुमान है‚ जबकि एशिया में शहरी आबादी के 2.99 बिलियन तथा दक्षिण एशिया में 98,75,92,000 होने का अनुमान है। 
  • रिपोर्ट के अनुसार‚ चीन और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में विश्व की जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग रहता है तथा उनके विकास पथ ने वैश्विक असमानता को काफी गहरे तक प्रभावित किया है। 
  • एशिया में‚ पिछले दो दशकों में‚ चीन और भारत में तीव्र आर्थिक विकास और शहरीकरण हुआ है‚ जिसके कारण गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। 
  • वर्ष 2021 में वैश्विक शहरी आबादी का प्रतिशत 56 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2050 तक 68 प्रतिशत होने का अनुमान है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक‚ कोविड-19 महामारी के दौरान शहरीकरण की प्रक्रिया में जो रुकावट देखी गई‚ वह अल्पकालिक थी। इस महामारी के बाद शहर एक बार फिर से रोजगार‚ शिक्षा‚ प्रशिक्षण के गंतव्य स्थल के रूप में उभर रहे हैं।  
  • रिपोर्ट के अनुसार‚ शहरी गरीबी और असमानता शहरों के समक्ष विद्यमान सबसे जटिल समस्याओं में से हैं।
  • जलवायु परिवर्तन की चुनौती को ध्यान में रखकर रिपोर्ट में यह कहा गया है‚ कि विशेष रूप से गर्म जलवायु या निचले तटीय क्षेत्रों में स्थित शहर‚ जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाओं के जोखिम के कारण अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं; जैसे- दिल्ली (भारत) में हीटवेव्स में वृद्धि तथा जकार्ता (इण्डोनेशिया) व डरबन (दक्षिण अफ्रीका) में व्यापक बाढ़ की समस्या।
  • दुनियाभर के कई शहरों में विशेष रूप से चीन और भारत जैसे विकासशील देशों में पी.एम. 2.5, पी.एम. 10, कार्बन डाइऑक्साइड‚ सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे वायु प्रदूषकों में अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई। कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन ने इस गिरावट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यू.एन.हैबिटेट

  • यू.एन. हैबिटेट (UN Habitat: United Nation Human Settlements Programme) मानव बस्ती और सतत शहरी विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है। 
  • इसकी स्थापना वर्ष 1976 में कनाडा के बैंकूवर में मानव बस्तियों और सतत शहरी विकास पर आयोजित पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के परिणामस्वरूप वर्ष 1978 में की गई थी। 
  • यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह का सदस्य है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र महासभा को रिपोर्ट करता है। 
  • इसके दोहरे लक्ष्य निम्नलिखित हैं: सभी के लिए पर्याप्त आश्रय तथा शहरीकृत विश्व में स्थायी मानव बस्तियों का विकास। 

संकलन : वृषकेतु राय


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