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Post at: Jul 30 2022

5 नए भारतीय रामसर स्थल

आर्द्रभूमि

  • ‘आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय’ के अनुसार‚ दलदली भूमि वाले क्षेत्र‚ जलभरण वाले इलाके‚ शुष्क प्रदेश इत्यादि को आर्द्रभूमि (Wetlands) के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • प्राकृतिक अथवा कृत्रिम‚ स्थायी अथवा अस्थायी‚ पूर्णकालिक आर्द्र अथवा अल्पकालीन‚ स्थिर जल अथवा अस्थिर जल‚ मीठा या लवणीय जल-इन सभी प्रकार के जलों वाले स्थल आर्द्रभूमि के अंतर्गत आते हैं।
  • साथ ही‚ समुद्री जल के ऐसे क्षेत्र‚ जिनकी गहराई कम ज्वार (low tide) में 6 मीटर से अधिक नहीं जाती‚ वे भी आर्द्रभूमि कहलाते हैं।

महत्व

  • आर्द्रभूमियां मानव के अस्तित्व के लिए अत्यावश्यक हैं। इनसे मनुष्य को अनगिनत लाभ प्राप्त होते हैं;  जैसे ताजे जल की आपूर्ति‚ खाद्य एवं निर्माण सामग्रियों की प्राप्‍ति इत्यादि।
  • साथ ही ये बाढ़ नियंत्रण‚ भूजल पुनर्भरण (Groundwater recharge) तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक होती हैं।

    रामसर अभिसमय

  • आर्द्रभूमियों पर अभिसमय (Convention on Wetlands) को रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) के नाम से भी जाना जाता है।
    • यह आर्द्रभूमियों एवं उनके संसाधनों के संरक्षण तथा समझदारीपूर्वक उपयोग हेतु एक अंतरसरकारी संधि है।
    • इस संधि का उद्देश्य स्थानीय तथा राष्ट्रीय कार्यवाहियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आर्द्रभूमियों के संरक्षण को सुनिश्चित करना है।
  • इस अभिसमय का नामकरण ईरान के शहर रामसर के नाम पर किया गया है‚ जहां वर्ष 1971 में यह अभिसमय हस्ताक्षरित हुआ था।
  • रामसर अभिसमय वर्ष 1975 में प्रभावी हुआ था।
  • वर्तमान में इस अभिसमय के हस्ताक्षरकर्ता देशों की संख्या 172 है।

रामसर सूची

  • इस अभिसमय में शामिल होते समय प्रत्येक देश को अपने क्षेत्र के अंतर्गत स्थित न्यूनतम एक आर्द्रभूमि स्थल को ‘अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची’ (List of Wetlands of International Importance) में शामिल किए जाने के लिए नामित करना होता है।
    • अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची को ‘रामसर सूची’(Ramsar List) भी कहा जाता है।
  • वर्तमान में यह रामसर सूची विश्व में ‘संरक्षित क्षेत्रों’ (Protected Areas) का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
  • वर्तमान में विश्वभर में स्थित रामसर स्थलों (Ramsar Sites) की कुल संख्या 2445 है।
    • इन रामसर स्थलों के अंतर्गत कुल 25,56,40,402 हेक्टेयर क्षेत्र आच्छादित है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 26 जुलाई, 2022 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञाप्‍ति के अनुसार, भारत की 5 नई आर्द्रभूमियों को ‘अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों’ के रूप में निर्दिष्ट किया गया है।
  • इस प्रकार भारत में राससर स्थलों की कुल संख्या 49 से बढ़कर 54 हो गई है।
  • भारत के 54 रामसर स्थलों के अंतर्गत कुल 1,098,518 हेक्टेयर क्षेत्र आच्‍छादित है।
  • नव-निर्दिष्ट 5 रामसर स्थलों में तमिलनाडु के तीन (करीकिली पक्षी अभयारण्य, पल्‍लिकरनई मार्श रिजर्व फॉरेस्ट और पिचवरम मैंग्रोव), मिजोरम का एक (पाला आर्द्रभूमि) तथा मध्य प्रदेश का एक आर्द्रभूमि स्थल (साख्य सागर) शामिल हैं।

करीकिली पक्षी अभयारण्य (Karikili Bird Sanctuary)

  • यह स्थल आंशिक रूप से तमिलनाडु के दो जिलों यथा-चेंगलपट्टु और कांचीपुरम में हुआ है।
  • इस अभयारण्य में 58 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले दो वर्षा- आधारित-गैर-बारहमासी सिंचाई (Rain-fed non -Peremial) टैंक शामिल हैं। 
  • इसका कुल क्षेत्रफल 58.4 हेक्टेयर है।

पल्‍लिकरनई मार्श रिजर्व फॉरेस्ट (Pallikaranai Marsh Reserve Forest)

  • यह मीठे पानी का दलदल (Marsh) और आंशिक रूप से खारा आर्द्रभूमि (Saline wetland)  चेन्‍नई शहर से लगभग 20 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
  • इसका क्षेत्रफल 1,247.5 हेक्टेयर में विस्तृत है।
  • इस वन में 115 पक्षी प्रजातियां , 10 स्तनधारी, 21 सरीसृप, 10 उभयचर, 46 मछलियां, 9 मोलस्क (Molluscs), 5 क्रस्टेशियन (Crustaceans)  और 7 तितली प्रजातियां पाई जाती हैं।

पिचवरम मैंग्रोव (Pichavaram Mangrove)

  • यह स्थल भारत में सबसे बड़े मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है, जो वेल्‍लर (Vellar) और कोलेरून (Coleroon) नदियों के प्रमुख मुहानों (estuaries)  के बीच स्थित है।
  • पिचवरम मैंग्रोव का मुख्यालय तमिलनाडु के कुड्डलोर जिले में स्थित है।
  • इसका कुल क्षेत्रफल 1,478.6 हेक्टेयर है।
  • यह स्थल में राइजोफोरा अन्‍नामलयाना (Rhizophora Annamalayana) नामक एक प्राकृतिक संकट प्रजाति (Natural hybrid Species) पाई जाती है,जो राइजोफोरा (Rhizophora)  की दो प्रजातियां यथा-'R.apiculata' और 'R. Mucronata' हैं।
  • 1893 ई. से आरक्षित वन घोषित होने के बावजूद, इस स्थल की कोई प्रबंधन योजना नहीं है।

पाला आर्द्रभूमि (Pala Wetland)

  • पाला, मिजोरम राज्य की सबसे बड़ी प्राकृतिक आर्द्रभूमि है।
  • इस आर्द्रभूमि का क्षेत्रफल 1,850 हेक्टेयर है।
  • इस आर्द्रभूमि में कम-से-कम 7 स्तनधारी, 222 पक्षी, 11 उभयचर (amphibians)  और 21 सरीसृप की प्रजातियां पाई जाती हैं।

साख्य सागर (Sakhya Sagar)

  • यह आर्द्रभूमि मध्य प्रदेश राज्य में शिवपुरी जिले में स्थित है।
  • यह माधव राष्ट्रीय उद्यान के भीतर शिवपुरी शहर के बाहरी इलाके में निर्मित एक मानव-निर्मित जलाशय है।
  • यह आर्द्रभूमि मछली की 19 प्रजातियों, 9 सरीसृपों (reptiles),  19 स्तनधारियों (Mammals) एवं 73 पक्षी प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।
  • यह स्थल ‘‘ शिवपुरी की तीन झीलों’’ (Three lakes of Shivpuri)  में से एक है।
  • इस स्थल का कुल क्षेत्र 248 हेक्टेयर है।

संकलन-आदित्य भारद्वाज
 


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