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Post at: Jul 27 2022

भारत-आॅस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिज निवेश साझेदारी

पृष्ठभूमि

  • 21 मार्च, 2022 को भारत ऑस्ट्रेलिया वर्चुअल (आभासी) शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया था।
    •  इस सम्मेलन में दोनों देश के प्रधानमंत्रियों के बीच महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं (Critical Minerals Projects)  पर संयुक्त सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया था।
  • महत्वपूर्ण खनिज को लेकर समझौता-ज्ञापन में निम्नलिखित बिंदु शामिल किए गए थे।

(i)  महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी के निर्माण के लिए एक सहयोगी ढांचा प्रदान करना।
(ii) ऑस्ट्रेलियाई महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं में रणनीतिक राष्ट्रीय हित और वाणिज्यिक निवेश का समर्थन करना।
(iii)  नवाचार को बढ़ावा देने, टिकाऊ उत्पादन का समर्थन करने और परिवहन, ऊर्जा, दूरसंचार, चिकित्सा जैसे ईंधन क्षेत्रों के लिए मजबूत और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 3 जुलाई, 2022 को केंद्रीय कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 6 दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत-आॅस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिज निवेश भागीदारी (India-Australia Critical Minerals Partnership) को आगे बढ़ाया।
    •  जिसके अंतर्गत दोनों देशों ने कोबाल्‍ट और लिथियम (Lithium) खनिज संपत्ति में निवेश की संभावनाओं पर साझा सहमति व्यक्ति की है।

मुख्य बिंदु

  • भारत ने खनिज बिदेश इण्डिया लिमिटेड (Khanij Bidesh India Ltd : KABIL) और महत्वपूर्ण खनिज सरलीकरण कार्यालय (Critical Minerals Facilitation Office) तथा ऑस्ट्रेलिया सरकार के बीच एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।
    • जिसका उद्देश्य भारत को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
  • ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा तीन साल की भारत-ऑस्ट्रेलिया‘‘ महत्वपूर्ण खनिज निवेश साझेदारी’’ के लिए 5.8 मिलियन डॉलर के निवेश पर सहमति दी गई ।
  • इसकी मदद से भारत को ऑस्ट्रेलिया से इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति हो सकेगी।
  • एमओयू (Memorandum of Understanding : MoU)  में ऑस्ट्रेलिया की लिथियम और कोबाल्ट खनिज संपत्तियों में संयुक्त उचित परिज्ञय (Joint due diligence)  को शामिल किया गया है।
  • जुलाई, 2021 में जारी ‘‘भारत महत्वपूर्ण  खनिज मांग रिपोर्ट’’ (India Critical Minerals Demand Report) के अनुसार, आठ प्राथमिकता वाले महत्वपूर्ण खनिज की पहचान की गई थी।
  • ये अपने अंतिम-उपयोग उद्योगों के आधार पर तीन समूहों में वर्गीकृत किए गए हैं-

(i) पारंपरिक (Traditional)- टाइटेनियम और वैनेडियम
(ii)  सूर्योदय (Sunrise)- लीथियम
(iii)  मिश्रित उपयोग (Mixed Use): 

  •  कोबाल्ट 
  • निकेल 
  • सीसा
  •  प्रकाश दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Light Rare Earth Elements: LREE) 
  •  भारी दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Heavy Rare Earth Elements : HREE)

 

महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minirals)

  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Alliance : IEA) के अनुसार, महत्वपूर्ण खनिज में तांबा, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी तत्व शामिल किए जाते हैं, जो आज की तेजी से बढ़ती स्वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में आवश्यक घटक हैं।

महत्व

  • कंप्यूटर चिप्स और सौर पैनल बनाने के लिए प्रमुख खनिज के तौर पर उपयोग। 
  • एयरोस्पेस, संचार और रक्षा उद्योग भी महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर हैं। 
  • हरित प्रौद्योगिकी जैसे  सोलर पैनल और पवन टरबाइन बनाने में महत्वपूर्ण खनिज का उपयोग।
  • महत्वपूर्ण खनिज दुनिया को शुद्ध जीरो उत्सर्जन (Net Zero Emmission) लक्ष्य प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं।
  • मोबाइल फोन, कंप्यूटर से लेकर बैटरी व इलेक्ट्रिक वाहन के निर्माण में इनका उपयोग होता है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
काबिल (KABIL)

  • अगस्त, 2019 में भारतीय खनन मंत्रालय द्वारा खनिज बिदेश इण्डिया लिमिटेड (Khanij Bidesh India Ltd. : KABIL) की स्थापना की गई थी।
  • इसे ‘नेशनल एल्‍युमीनियम कंपनी लिमिटेड’ (नाल्‍को), ‘हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड’ (एचसीएल) और मिनरल्स एक्सप्‍लोटेशन कंपनी लिमिटेड की भागीदारी में एक संयुक्त उद्यम कंपनी (Joint Venture) के रूप में स्थापित किया गया है।
  • इसका उद्देश्य भारतीय घरेलू बाजार में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

संकलन-पंकज तिवारी


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