Contact Us - 9792276999 | 9838932888
Timing : 12:00 Noon to 20:00 PM (Mon to Fri)
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Jul 26 2022

स्वावलंबन

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 18-19 जुलाई‚ 2022 के मध्य नौसेना नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन (Naval Innovation and Indigenisation Organisation : NIIO) की पहली संगोष्ठी ’स्वावलंबन’ (Swavlamban) का आयोजन किया गया था। 
  • इस संगोष्ठी का आयोजन नई दिल्ली में किया गया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

प्रमुख बिंदु

  • इस दौरान एक स्वायत्त मल्टी-कॉप्टर ड्रोन ’वरुण’ (Varuna) पर्सनल एयर ह्वीकल (PAV) का प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया गया।
    • यह ड्रोन एक यात्री को ले जाने में सक्षम है।
  • इसके साथ ही iDex DISC (स्प्रिंट) चुनौतियों का विमोचन किया गया।
  • स्प्रिंट‚ रक्षा नवाचार संगठन और नौसेना नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन के मध्य एक सहयोगी परियोजना है।
    • इसका उद्देश्य ’आजादी का अमृत महोत्सव’ के एक हिस्से के रूप में कम-से-कम 75 स्वदेशी प्रौद्योगिकियों/उत्पादों को विकसित करना है।
  • स्प्रिंट का पूर्ण रूप Research & Development iDEX, NIIO और टीडीएस के माध्यम से अनुसंधान और विकास में पोल - वॉल्टिंग का समर्थन (Supporting Pole - Vaulting in Research & Development through iDEX, NIIO and TDAC : SPRINT) है।

नौसेना नवाचार और स्वदेशी संगठन

  • यह एक त्रिस्तरीय संगठन है।
  • इसे प्रौद्योगिकी संबंधित अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु रक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में शुरू किया गया।
  • इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत के विजन को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए नवाचार और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना।
  • नौसेना प्रौद्योगिकी त्वरण परिषद (Naval Teachnology Acceleration Council : NTAC) नवाचार और स्वदेशीकरण के जुड़वां पहलुओं को एक साथ लाएगा और शीर्ष स्तर के निर्देश  प्रदान करेगा।
    • इसके साथ ही NTAC के तहत कार्य समूह परियोजनाओं को लागू करेगा।
  • त्वरित समय-सीमा में उभरती विद्यतनकारी प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिए प्रौद्योगिकी विकास सेल (TDAC) बनाया गया है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का महत्व

  • रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भरता के कई अवसरों के साथ एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया; क्योंकि यह भारतीय अर्थव्यवस्था और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
  • रक्षा क्षेत्र रोजगार के अवसर पैदा कर और आयात के बोझ को कम करके राजकोष की बचत के माध्यम से अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
  • एक मजबूत और सुसज्जित सेना किसी भी बाहरी और आंतरिक जोखिम से देश को प्रतिरक्षा प्रदान कर सकती है।
    • निजी क्षेत्र‚ MSME और स्टार्टअप की सक्रिय भागीदारी के साथ रक्षा क्षेत्र में नवाचार को iDEX पहल और ’प्रौद्योगिकी विकास कोष’ के तहत कई परियोजनाओं के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।
    • ’मेक इन इण्डिया’ पहल के एक हिस्से के रूप में रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा के लिए प्रौद्योगिकी विकास कोष (TDF) की स्थापना की गई है।
    • भारतीय नौसेना ने ’क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (SAGAR) की दृष्टि के अनुरूप न केवल भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए‚ बल्कि अपने मित्र देशों की भी आवश्यक क्षमताओं का विकास किया है।

संकलन - आदित्य भारद्वाज


Comments
List view
Grid view

Current News List