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48वां G-7 शिखर सम्मेलन

G-7 

  • G-7 विश्व के सात सर्वाधिक औद्योगिक एवं विकसित देशों का संगठन है।
  • इस संगठन के देशों में -संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, जर्मनी एवं जापान शामिल हैं।
  • 1970 के दशक की वैश्विक आर्थिक मंदी व बढ़ते तेल संकट की पृष्ठभूमि में फ्रांस के तत्‍कालीन राष्ट्रपति ‘वैलेरी जिस्कार्डडी एस्टेइंग’ के आह्वान पर वर्ष 1975 में G-6 के नाम से इस समूह का गठन हुआ ।
  • नवंबर, 1975 में फ्रांस के रैंबॉइलेट (Rambouillet) में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन में 6 देश-फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और इटली शामिल थे।
  • यानी समूह के संस्थापक सदस्य-संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान एवं इटली थे।
  • वर्ष 1976 में कनाडा भी इस समूह में शामिल हो गया। इस तरह इसका नामकरण G-7 पड़ा।
  • ध्यातव्य है, कि वर्ष 1977 में यूरोपीय संघ ने संगठन की बैठक में भाग लेना प्रारंभ किया।
  • इस तरह यूरोपीय संघ इस संगठन का सहभागी सदस्य (Non enumerated member) है। हालांकि, उसे पृथक सदस्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है।
  • गौरतलब है, कि G-7 एक अनौपचारिक संगठन है; अत: इसका न तो कोई मुख्यालय है, न ही सचिवालय । इस संगठन का कोई चार्टर भी नहीं है।
  • समूह के सदस्य देश प्रतिवर्ष वैश्विक स्थिति का आकलन तथा उसके समाधान हेतु सम्मेलन का आयोजन करते हैं।

नोट- उल्‍लेखनीय है, कि रूस के G-7  में शामिल होने से वर्ष 1997 में इस समूह का नाम G-8 हो गया था। हालांकि, वर्ष 2014 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के पश्चात रूस की सदस्यता अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी गई।

  • इस प्रकार यह समूह पुन:  G-7 बन गया।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 26-28 जून, 2022 के बीच जर्मनी की अध्यक्षता में G-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन बेवेरियन आल्प्स (Bavarian Alps), जर्मनी में आयोजित किया गया।
  • यह सातवां अवसर है, जब जर्मनी G-7 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। पहली बार वर्ष 1978 में बॉन शिखर सम्मेलन मंे जर्मनी ने G-7  की अध्यक्षता की थी।
  • इस शिखर सम्मेलन में जर्मनी ने अर्जेंटीना,  भारत, इण्डोनेशिया, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका एवं यूक्रेन को भी आमंत्रित किया था।
  • भारत की तरफ से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में प्रतिभाग किया।
  • शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री ने G-7 देशों को भारत में उभर रही स्वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विशाल बाजार में निवेश हेतु आमंत्रित किया।
  • ध्यातव्य है, कि वर्ष 2023 में G-7 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता जापान करेगा।

सम्मेलन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु

 यूक्रेन का मुद्दा

  • G-7 देशों ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के अवैध एवं अन्यायपूर्ण आक्रमण की निंदा की।
  • ध्यातव्य है, कि G-7 देशों ने यूक्रेन को वर्ष 2022 में लगभग 2.6 बिलियन यूरो से अधिक की मानवीय सहायता प्रदान की है।
  • कुल मिलाकर G-7 देशों ने यूक्रेन को 28 बिलियन यूरो की सहायता का वचन दिया है।
  • G-7 देशों ने रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के प्रति भी दृढ़ता प्रकट की। इसके अतिरिक्त G-7 देशों ने रूसी स्वर्ण (Gold) के आयात पर प्रतिबंध लगाने पर भी सहमति व्यक्त की।

ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा

  • G-7 देशों ने इस बात को रेखांकित किया कि यूक्रेन पर रूस का युद्ध नाटकीय रूप से ऊर्जा सुरक्षा तथा वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा की स्थिति को नुकसान पहुंचा रहा है।
  • इसके अतिरिक्त G-7  देशों ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने तथा मूल्य वृद्धि को कम करने के लिए तत्काल कार्यवाही हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की।
  • G-7 देशों ने खाद्य सुरक्षा पर वैश्विक गठबंधन के माध्यम से वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी सुनिश्चित करने की बात की।
  • खाद्य सुरक्षा हेतु G-7 देशों ने लगभग 9.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त प्रदान करने की भी घोषणा की।

आर्थिक मुद्दा

  • G-7  देशों ने वैश्विक स्तर पर युद्ध के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ अपनी अर्थव्यवस्थाओं और जनसंख्या पर इसके प्रभाव को कम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

जलवायु एवं पर्यावरण

  • G-7 देशों द्वारा सहकारी अंतरराष्ट्रीय जलवायु क्‍लब (International Climate Club) के लक्ष्यों का समर्थन किया गया।
  • इस संदर्भ में G-7 देशों ने निम्नलिखित प्रतिज्ञाएं कीं-
  • वैश्विक तापमान को नियंत्रित करना (1.5OC के साथ संरेखित करना )
  • पेरिस समझौते के क्रियान्वयन में तेजी लाना।
  • वर्ष 2030 तक सड़क क्षेत्र को कार्बन रहित करना।
  • वर्ष 2035 तक विद्युत क्षेत्र कार्बन रहित करना।

​​​​​​​वैश्विक अवसंरचना तथा निवेश के लिए भागीदारी

  • G-7 देशों ने बुनियादी ढांचे एवं निवेश के लिए G-7 साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की।
  • G-7 देशों ने साझेदारी के माध्यम से वैश्विक अंतर को कम करने हेतु अगले पांच वर्षों में (2027 तक) 600 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
  • G-7 देशों द्वारा ‘बिल्ड बैक बेटर ’ परियोजना के संदर्भ में वैश्विक अवसंरचना एवं निवेश हेतु भागीदारी (Partnership for Global Infrastructure and Investment : PGII) नामक पहल की है।

स्वास्थ्य 

  • G-7 देशों ने COVID-19 से लड़ने हेतु सुरक्षित, प्रभावी एवं किफायती सुविधाओं की पहुंच संबंधी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसमें शामिल हैं-
    • टीके
    • चिकित्साविधान
    • निदान
    • अन्य आवश्यक चिकित्सकीय उपकरण

लोकतांत्रिक मूल्य

  • G-7  देशों ने सिविल सोसाइटी से निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की-
    • समाज के लचीलेपन को सुदृढ़ करना
    • ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों तरीकों से मानव अधिकार काे संरक्षित करना
    • लैंगिक समानता के लक्ष्य को हासिल करना
    • प्रेस की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना।

48वां G-7 शिखर सम्मेलन एवं भारत

  • भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्‍लोबल इनिशिएटिव फॉर लाइफ अभियान पर प्रकाश डाला। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है।
  • भारतीय प्रधानमंत्री ने अमीर एवं गरीब देशों के बीच समान ऊर्जा वितरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • भारतीय प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि G-7  देश भारत की जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेंगे।
  • इसके अतिरिक्त भारतीय प्रधानमंत्री ने G-7 देशों को भारत में उभर रही स्वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों हेतु विशाल बाजार के दोहन के लिए भी आमंत्रित किया।
  • ध्यातव्य है, कि वर्ष 2019 से यह लगातार चौथी बार है, जब भारत को G-7 सम्मेलन में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया गया है।

​​​​​​​संकलन-आलोक त्रिपाठी


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