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Post at: Jul 25 2022

चिकित्सीय एमिसिस प्रणाली को पेटेंट

परिचय

  • आयुर्वेद में पंचकर्म प्रमुख उपचार पद्धति है। 
  • पंचकर्म को रोकथाम, प्रबंधन, इलाज के साथ-साथ कायाकल्प उद्देश्य के लिए किया जाता है। 
  • वमन (चिकित्सीय एमिसिस), विरेचना (चिकित्सीय शुद्धिकरण), बस्ती (चिकित्सीय एनीमा), नास्या (नाक के रास्ते  चिकित्सा)  और रक्तमोक्षना (रक्तस्राव चिकित्सा) पंचकर्म के तहत पांच प्रक्रियाएं हैं।
  • वमन (एमिसिस) यानी, एक चिकित्सीय प्रक्रिया, जो मौखिक मार्ग के माध्यम से अशुद्धियों या दोषों को बाहर निकालती है। 
  • रोगी और पंचकर्म विशेषज्ञ सलाहकार दोनों के लिए प्रभाव में लाने की प्रक्रिया कठिन है। 
  • इसके अलावा उल्टी को स्वच्छता से संभालना एक बड़ी चुनौती है। 
  • अब तक प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कोई भी तकनीक विकसित नहीं हुई है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

हाल ही में भारतीय चिकित्सा प्रणाली चिकित्सीय एमिसिस (Therapeutic Emesis) के लिए भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग (National Commission for Indian System of Medicine :NCISM) में बोर्ड ऑफ आयुर्वेद के अध्यक्ष डॉ. बी. श्रीनिवास प्रसाद और आविष्कारक की उनकी टीम को चिकित्सीय उल्टी  के लिए उन्‍नत स्वचालित प्रणाली या उपकरण विकसित करने के लिए एक पेटेंट प्रदान किया गया।

  • यह पेटेंट भारत सरकार के पेटेंट नियंत्रक द्वारा प्रदान किया गया है।
  • चिकित्सीय उल्टी (एमिसिस) के लिए एक उन्‍नत स्वचालित प्रणाली या उपकरण इस चिकित्सा को सरल और सुविधाजनक बना देगा। 

उपयोग

  • पेटेंट वाले वर्तमान 'उन्‍नत स्वचालित उपकरण या चिकित्सीय उल्टी की प्रणाली' को कठिन वमन प्रक्रिया को आराम से कराने के लिए विकसित किया गया है। 
  • यह तकनीक प्रक्रिया के दौरान रोगियों के महत्वपूर्ण डाटा की निगरानी के लिए मॉनीटर से युक्त है। 
  • उल्टी को स्वच्छता से और जैव-चिकित्सकीय कचरा प्रबंधन नीति के अनुसार संभालने के लिए प्रावधान है। 
  • इसे आपातकालीन किट के साथ प्रदान किया जाता है, जिसकी प्रक्रिया की जटिलताओं का प्रबंधन करने की आवश्यकता होती है। 
  • प्रक्रिया का आकलन करने के लिए आवश्यक नैदानिक मापदण्ड भी स्वचालित हैं। 
  • कुल मिलाकर यह तकनीक वमन प्रक्रिया को आराम से कराने के लिए पूर्ण समाधान है। 

​​​​​​​प्रणाली का विकास

  • इस उत्पाद को केएलई आयुर्वर्ल्ड के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आयुर्टेक इनक्यूबेशन सेंटर और बेलगावी, कर्नाटक में केएलई इंजीनियरिंग कॉलेज ने विकसित किया है। 
  • प्रौद्योगिकी आईआईसीडीसी,  2018 और एनएसआरसीईएल, आईआईएम बैंगलोर में इनक्यूबेट में शीर्ष 10 में थी और डीएसटी और टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स द्वारा सहायता प्राप्त थी।

​​​​​​​निष्कर्ष

यह उन्‍नत स्वचालित प्रणाली आयुर्वेद चिकित्सा को प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ आयुर्वेद को पढ़ाने और अभ्यास करने में मदद करेगी। आगे चलकर इस आविष्कार के व्यावसायीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इसे देश के सभी अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा सके।

पेटेंट

  • पेटेंट, एक मजबूत बौद्धिक संपदा अधिकार होता है। यह किसी देश की सरकार द्वारा किसी नए आविष्कारक के लिए एक निश्चित समय के लिए दिए जाने वाला विशिष्ट एकाधिकार होता है।
  • किसी अन्य को आविष्कार की नकल करने से रोकने के लिए यह एक प्रवर्तनीय कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
  • पेटेंट (Patents), मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं-

(i) प्रक्रिया पेटेंट (Process Patents)

  • इसके तहत, पेटेंट धारक के अलावा किसी भी व्यक्ति को, विनिर्माण प्रक्रिया में कुछ संशोधन करके पेटेंट उत्पापद का निर्माण करने की अनुमति होती है।

(ii) उत्पाद पेटेंट (Product Patents)

  • यह अंतिम उत्पाद के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • इसके तहत, निर्दिष्ट अवधि के दौरान पेटेंट धारक के अलावा किसी अन्य के द्वारा ‘‘पेटेंट की गई वस्तु’’ का उत्पादन करने पर रोक लगाई जा सकती है, भले ही अन्‍य किसी अलग प्रक्रिया का प्रयोग कर रहे हों।

Note- वर्ष 1995 में ‘‘बौधिक संपदा अधिकार’’ (Intellectual Property Rights) के व्यापार संबंधी पहलुओं (TRIPS) पर हुए समझौते के तहत, समझौते की पुष्टि करने वाले देशों के लिए यह आवश्यक है, कि वे रचनाकारों को सुरक्षा प्रदान करने तथा नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों पर एक न्‍यूनतम मानक को लागू करें।

भारत में पेटेंट व्यवस्था-

  • भारत में, 1970 के दशक से ‘उत्पाद पेटेंट’ के बजाय ‘प्रक्रिया पेटेंट’ प्रचलित है, िजसकी वजह से, भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का एक महत्वपूर्ण उत्पादक बन गया।
  • इसी वजह से 1990 के दशक में सिप्‍ला जैसी कंपनियों के लिए अफ्रीका को एचआईवी-विरोधी दवाएं प्रदान करने की अनुमति दी जा सकी थी।
  • लेकिन TRIPS समझौते के अंतर्गत निर्धारित दायित्‍वों के कारण, भारत को वर्ष 2005 में पेटेंट अधिनियम में संशोधन करना पड़ा और फार्मा, रसायन और बायोटेक क्षेत्रों में ‘उत्पाद पेटेंट’ व्यवस्था लागू करनी पड़ी।

​​​​​​​नोट- एक बार पेटेंट अधिकार मिलने पर इसकी अवधि पेटेंट दर्ज की तिथि से 20 वर्षों के लिए होती है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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