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Post at: Jul 20 2022

सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष संचालन प्रबंधन : इसरो प्रणाली

परिचय

  • अंतरिक्ष में उपग्रहों व उपकरणों की लगातार बढ़ती संख्या तथा इनसे जनित कचरे (Debris) से पैदा हुए टकराव के जोखिम स्वरूप‚ देश को अपने अंतरिक्ष संपदाओं की रक्षा करने के लिए एक निगरानी व सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता है।
  • ज्ञातव्य है‚ कि 30 जून‚ 2022 को पीएसएलवी (Polar - Satellite Launch Vehicle : PSLV) C-53 के लांच को अंतरिक्ष में स्टारलिंक और फेनग्यून 1 C (Fengyun 1 C) के खतरे से बचाने के लिए 2 मिनट विलंब से प्रक्षेपित किया गया।
  • इसरो के अनुसार‚ वर्ष 2011 से 2022 के बीच कुल 11 बार पीएसएलवी मिशन को टकराव के जोखिम से बचाव के कारण विलंबित करना पड़ा।
  • इन्हीं खतरों के प्रति निगरानी व जागरूकता के लिए वर्ष 2019 में इसरो द्वारा प्रोजेक्ट नेत्रा (Network for Space Objects Tracking and Analysis : NETRA) की शुरुआत की थी।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 11 जुलाई‚ 2022 को बंगलुरू में सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष संचालन प्रबंधन के लिए इसरो प्रणाली (ISRO System for Safe and Sustainable Space Operations Management : I4SOM) को राष्ट्र को समर्पित किया गया।
  • I4SOM प्रणाली भारतीय अंतरिक्ष संपदाओं की सुरक्षा‚ अंतरिक्ष की वस्तुओं से टकराव के खतरे कम करने‚ सामरिक उद्देश्यों और अंतरिक्ष मलबों में अनुसंधान गतिविधियों के लिए जानकारी उपलब्ध कराएगी।

प्रमुख बिंदु 
I4SOM

  • I4SOM प्रणाली का विकास राष्ट्र्रीय विकास के लिए बाहरी अंतरिक्ष के सतत उपयोग के लाभों को प्राप्त करते हुए सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण के साथ की गई।
  • यह बहुस्तरीय जागरूकता‚ कक्षा में टकराव‚ विखण्डन‚ वायुमण्डलीय पुन: प्रवेश जोखिम‚ अंतरिक्ष आधारित रणनीतिक जानकारी‚ खतरनाक क्षुद्रग्रह और अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान पर एक त्वरित‚ सटीक और कुशल जानकारी प्रदान करेगा।
  • साथ ही यह‚ I4SOM  उपयोगकर्ताओं को अंतरिक्ष पर्यावरण की व्यापक और समय पर जानकारी प्रदान करके अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता (Space Situational Awarness : SSA) लक्ष्य हासिल करने में मददगार साबित होगा। 
  • I4SOM बाह्य अंतरिक्ष के दीर्घकालीन संधारणीयता पर अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के लक्ष्य को भी अपने उद्देश्यों में समाहित करता है।

 

अंतरिक्ष कचरा (Debris) क्या है?

  • अंतरिक्ष कचरा का निर्माण नए उपग्रह लांच के दौरान अंतरिक्ष परिचालन में मुक्त किए गए उपकरण‚ विखण्डन तथा अंतरिक्ष उपकरणों के आपस में टकराने के फलस्वरूप बनते हैं। 
  • ये मुक्त अवस्था में परिचालन उपग्रहों के लिए एक संभावित खतरा हैं‚ जिनसे टकराने से उपग्रह निष्क्रिय हो सकते हैं।
  • इसरो के अनुसार‚ 6 मई‚ 2022 तक अंतरिक्ष में मौजूद 25505 उपकरणों में से केवल 5732 ही सक्रिय उपग्रह हैं‚ बाकी अंतरिक्ष कचरे के रूप में मौजूद हैं।

​​​​​​​शीर्ष 5 देशों के अंतरिक्ष उपकरण व उनसे जनित कचरे की सूची

  • भारत के कुल 222 अंतरिक्ष उपकरण मौजूद हैं‚ जिनमें से 107 सक्रिय और निष्क्रिय उपकरण तथा 115 अन्य अंतरिक्ष कचरे के रूप में मौजूद हैं।

भारत में अंतरिक्ष मलबे के गिरने की कुछ घटनाएं

  • तमिलनाडु— 2 नवंबर‚ 2016 को तमिलनाडु के दो स्थानों डिण्डीगुल और करूर में अंतरिक्ष उपकरण का मलबा पाया गया था।
  • महाराष्ट्र— अप्रैल‚ 2022 में महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में चीन के रॉकेट का कुछ मलबा गिरा था। 
  • गुजरात— 12 मई‚ 2022 को गुजरात के तीन भिन्न स्थानों मालेज‚ खंभोलज और टामपुरा में अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े गिरे थे।

संयुक्त राष्ट्र/अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबे समन्वय समिति द्वारा अंतरिक्ष मलबे शमन (Mitigation) पर जारी दिशा-निर्देश

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • 14 दिसंबर‚ 2020 को अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता (Space Situation Awarness : SSA) केंद्र का उद्‌घाटन तत्कालीन इसरो अध्यक्ष के. सिवन द्वारा बंगलुरू में किया गया था।
  • यह केंद्र इसरो के उपग्रह और प्रक्षेपण वाहनों के बीच निकट दृष्टिकोण विश्लेषण तथा परिचालन परिसंपत्तियों के टकराव से बचाव से अग्रिम अलर्ट तथा रॉकेट निकायों के वायुमण्डलीय पुन: प्रवेश की भविष्यवाणी प्रदान करेगा।
  • मार्च‚ 2022 में इसरो द्वारा ’नेत्रा परियोजना’ के तहत‚ अंतरिक्ष उपकरणों के प्रभावी निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक रडार और ऑप्टिकल टेलीस्कोप के स्थापना को मंजूरी प्रदान की गई थी। 

संकलन - पंकज तिवारी

 


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