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Post at: Jul 13 2022

भारत, यूनेस्को के अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु सरकारी समिति में चयनित

क्या है अमूर्त सांस्कृतिक विरासत?

  • हाल के दशकों में ‘सांस्कृतिक विरासत’ शब्द की विषय-वस्तु में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। वर्तमान में सांस्कृतिक विरासत सिर्फ स्मारकों या कला वस्तुओं के संग्रहण तक ही सीमित नहीं है‚ बल्कि इसमें ऐसी परंपराएं तथा प्रभावी अभिव्यक्तियां (Living Expressions) भी शामिल हैं‚ जिन्हें हम अपने पूर्वजों से प्राप्त कर अगली पीढ़ी को सौंप देते हैं; जैसे मौखिक रूप से चल रही परंपराएं‚ प्रदर्शन कलाएं (Performing Arts)‚ धार्मिक एवं सामाजिक उत्सव‚ परंपरागत शिल्प कलाएं आदि। 
  • स्पष्ट है, कि अमूर्त विरासत के अंतर्गत ऐसी परंपराएं सम्मिलित हैं‚ जिन्हें देखा नहीं जा सकता और जिन्हें हम अपने पूर्वजों से प्राप्त करते हैं, जबकि मूर्त विरासत के अंतर्गत साक्षात् व देखी जा सकने वाली कला वस्तुएं शामिल होती हैं, जैसे स्थापत्य‚ मूर्ति‚ चित्र आदि।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 5-7 जुलाई, 2022 के मध्य पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में हुए यूनेस्को के अंतर-सरकारी समिति के चुनाव  में 2003 कन्वेंशन की 9वीं महासभा की बैठक हुई ।
  • इस बैठक के दौरान भारत को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा हेतु वर्ष 2022-26 चक्र के लिए यूनेस्को के 2003 कन्वेंशन की अंतर-सरकारी समिति का सदस्य चुना गया है।
  • यह भारत का इस समिति के लिए तीसरा कार्यकाल है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • एशिया-प्रशांत समूह के भीतर खाली चार सीटों के लिए भारत, बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया, मलेशिया और थाईलैण्ड इन छह देशों ने अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की थी। 
  • यहां उपस्थित और मतदान कर रहे 155 देशों के दलों की ओर से भारत को 110 वोट मिले।

2003 कन्वेंशन की अंतर-सरकारी समिति

  • 2003 कन्वेंशन की अंतर-सरकारी समिति में 24 सदस्य होते हैं। 
  • इसे समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व और रोटेशन के सिद्धांतों के अनुसार कन्वेंशन की आम सभा में चुना जाता है। 
  • इस समिति के सदस्य देश चार वर्ष की अवधि के लिए चुने जाते हैं।
  • इस अंतर-सरकारी समिति के कुछ मुख्य कार्यों में कन्वेंशन के उद्देश्यों को बढ़ावा देना, सर्वोत्तम प्रथाओं को लेकर मार्गदर्शन देना और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के उपायों पर सुझाव देना शामिल है। 
  • ये समिति अपनी सूचियों में अमूर्त विरासत को शामिल करने के राष्ट्र दलों के अनुरोधों और साथ-साथ कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं के प्रस्तावों को भी जांचती है।

2003 कन्वेंशन की अंतर-सरकारी समिति और भारत

  • अतीत में, भारत ने इस कन्वेंशन की अंतर-सरकारी समिति के सदस्य के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए हैं। एक वर्ष  2006 से 2010 तक और दूसरा वर्ष 2014-18 तक।
  • अपने वर्ष 2022-26 के कार्यकाल के लिए भारत ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक स्पष्ट विजन तैयार किया है। 

कन्वेंशन के लिए भारत का विज़न
 

भारत जिन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, उनमें शामिल हैं- 

  • सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना 
  • अमूर्त विरासत के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना 
  • अमूर्त सांस्कृतिक विरासत पर अकादमिक अनुसंधान को बढ़ावा देना 
  • कन्वेंशन के कार्यों को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप मिलाना 

इस विज़न को चुनाव से पहले कन्वेंशन के अन्य राष्ट्र दलों के साथ भी साझा किया गया था।

भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतें

  • यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की प्रतिनिधि सूची में शामिल भारतीय परंपराएं हैं:-

1.    रामलीला : रामायण की परंपरागत प्रस्तुति (2008)
2.    वैदिक मंत्रोच्‍चार की परंपरा (2008)
3.    कुट्टीयत्तम‚ संस्कृत नाटयकला (2008)
4.    रम्मन : गढ़वाल हिमालय का धार्मिक उत्सव और आनुष्ठानिक रंगमंच (2009)
5.    मुडियेट्टु : केरल का आनुष्ठानिक रंगमंच एवं नृत्य नाटक (2010)
6.    कालबेलिया : राजस्थान का लोक गीत तथा नृत्य (2010)
7.    छउ नृत्य : पूर्वी भारत का एक परंपरागत नृत्य जो झारखण्ड‚ ओडिशा व पश्चिम बंगाल में प्रचलित है (2010)
8.    लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्‍चार: ट्रांस-हिमालयी लद्दाख क्षेत्र (जम्मू एवं कश्मीर) में पवित्र बौद्ध ग्रंथों का पाठ (2012)
9.    संकीर्तन : मणिपुर का आनुष्ठानिक गायन‚ ढोल वादन एवं नृत्य (2013)
10.    पंजाब के जण्डियाल गुरु के ठठेरों द्वारा पारंपरिक रूप से पीतल और तांबे से बनाए जाने वाले बर्तनों की शिल्प कला (2014)
11.    योग (2016)
12.    नवरोज : नव वर्ष के उत्सव का आयोजन (2016)
13.    कुंभ मेला (2017)
14.    कोलकाता की दुर्गा पूजा (2021)

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत ने सितंबर, 2005 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए 2003 के कन्वेंशन की पुष्टि की। 
  • इस कन्वेंशन की पुष्टि करने वाले सबसे शुरुआती राष्ट्र दलों में से एक के रूप में भारत ने अमूर्त विरासत से संबंधित मामलों के प्रति खासी प्रतिबद्धता दिखाई है और अन्य राष्ट्र दलों को इसकी पुष्टि करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया है। 
  • मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में 14 धरोहरों के साथ भारत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में भी उच्‍च स्थान पर है। 
  • वर्ष 2021 में दुर्गा पूजा को इसमें शामिल किए जाने के बाद भारत ने वर्ष 2023 में विचार किए जाने के लिए गुजरात के गरबा का नामांकन प्रस्तुत किया था।

निष्कर्ष

  • अंतर-सरकारी समिति के एक सदस्य के रूप में भारत के पास 2003 के कन्वेंशन के कार्यान्वयन पर करीब से निगरानी रखने का मौका होगा। 
  • इस कन्वेंशन के दायरे और असर को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत अमूर्त विरासत को प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखने के लिए दुनिया भर में विभिन्‍न कारकों की क्षमता को इकट्ठा करना चाहता है। 
  • साथ ही इस कन्वेंशन की तीन सूचियों - यानी, तत्काल सुरक्षा सूची, प्रतिनिधि सूची और सुरक्षा की अच्छी प्रथाओं का रजिस्टर, इनमें धरोहरों का जो असंतुलन है, उसे देखते हुए भारत पूरा प्रयास करेगा कि जीवित विरासत की विविधता और महत्व को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने के लिए कन्वेंशन में राष्ट्र दलों के भीतर अंतरराष्ट्रीय संवाद को प्रोत्साहित करे।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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