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Post at: Jul 09 2022

नासा : चंद्रमा के लिए केपस्टोन मिशन

परिचय

  • नासा (National Aeronautics and Space Administration) दुबारा चंद्रमा पर मानव भेजने की योजना पर कार्य कर रहा है और केपस्टोन मिशन (Capstone Mission) इसी दिशा में एक शुरुआती कड़ी है।
  • केपस्टोन मिशन‚ मूल रूप से नासा के लूनर गेटवे (Lunar Gateway) के लिए एक पथ प्रदर्शक (Path Finder) की भूमिका में होगा।
  • जिसका उद्देश्य चंद्रमा की परिक्रमा करने के लिए उसके स्थिर कक्षा में एक चौकी (Outpost) की स्थापना की जा सके‚ जो नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम (Artemis Programe) का हिस्सा है।
  • इसी परिप्रेक्ष्य में केपस्टोन अंतरिक्ष यान एक ऐसे स्थिर और कुशल पथ में चंद्रमा की परिक्रमा करेगा‚ जिसे रेक्टिलिनियर हेलो ऑर्बिट (Rectilinear Halo Orbit) कहा जाता है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 28 जून‚ 2022 को नासा द्वारा वित्तपोषित केपस्टोन अंतरिक्ष यान को न्यूजीलैण्ड (New Zealand) के पूर्वी तट पर स्थित एक लांचपैड से लांच किया गया।
  • इसे अमेरिका और - न्यूजीलैण्ड की सहायक कंपनी की कंपनी रॉकेट लैब (Rocket Lab) द्वारा किया गया है।
  • साथ ही यह मिशन‚ नासा की कुछ वर्षों में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर वापस भेजने की योजना की शुरुआत माना जा रहा है। 

प्रमुख बिंदु
मिशन के बारे में

  • मिशन केपस्टोन का पूरा नाम सिस्लुनर ऑटोनॉमस पोजिशनिंग सिस्टम टेक्नोलॉजी ऑपरेशंस एण्ड नेविगेशन एक्सपेरिमेंट Cislunar Autonomous Positioning System Technology Operations and Navigation Experiment) है।
  • केपस्टोन एक माइक्रोवेव ओवन (Micro Wave Oven) के आकार का अंतरिक्ष यान है। यह एक कम लागत आधारित परियोजना है‚ जिसकी लागत 30 मिलियन डॉलर से कम है।
  • यह मिशन यह सत्यापित करेगा कि एक विशिष्ट प्रकार की चंद्रमा कक्षा गेटवे‚ अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त है‚ कि नहीं।

  • चंद्र गेटवे अंतरिक्ष स्टेशन कक्षाओं में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक छोटा अंतरिक्ष स्टेशन होगा‚ जहां वे चंद्रमा की सतह पर जाने से पहले और बाद में रुक सकते हैं।

आर्टेमिस मिशन

  • आर्टेमिस मिशन‚ नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर वापस भेजने के कार्यक्रम का हिस्सा है।
  • जिसके अंतर्गत नासा चंद्र गेटवे में एक-एक छोटा अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा‚ जिससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चंद्रमा के अधिक हिस्सों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
  • न्यूजीलैण्ड ने आर्टेमिस समझौते को विकसित करने में मदद की है। 
  • ध्यातव्य है‚ कि मई‚ 2021 में न्यूजीलैण्ड आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 11वां देश बन गया है।

रेक्टिलिनियर हेलो ऑर्बिट

  • नासा द्वारा स्पेस स्टेशन के रूप में जो चौकी (Out Post) स्थापित किया जाएगा‚ वो रेक्टिलिनियर हेलो ऑर्बिट के निकट ही होगा। 
  • हेलो कक्षाएं दो ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होती हैं; जैसे पृथ्वी और चंद्रमा।
  • इन दो ग्रहों का प्रभाव कक्षा को अत्यधिक स्थिर बनाने में मदद करता है।
  • जिससे चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले अंतरिक्ष यान को रखने के लिए आवश्यक प्रणोदक (Pro Pellant) की मात्रा की आवश्यकता कम हो जाती है।
  • गेटवे जिस चंद्रमा कि जिस कक्षा की यात्रा करेगा‚ वह चंद्रमा के उत्तरी धु्रव के लगभग 2,200 मील की दूरी पर और दक्षिणी धु्रव पर 44,000 मील की दूरी पर समाप्त होगा।
  • गौरतलब है‚ कि किसी भी अंतरिक्ष यान ने इस कक्षा में यात्रा नहीं की है।
  • इस प्रकार केपस्टोन नासा को अपने गेटवे आउटपोस्ट को निकट-रेक्टिलिनियर हेलो कक्षा में संचालित करने के लिए अपने गणितीय मॉडल की पुष्टि करने के लिए डाटा प्रदान करेगा।

मिशन का उद्देश्य

  • भविष्य के चंद्र संचालन के व्यावसायिक समर्थन की नींव रखना।
  • भविष्य के अंतरिक्ष यान के लिए रेक्टिलिनियर हेलो ऑर्बिट के पास चंद्र कक्षा की विशेषताओं का सत्यापन करे।
  • चंद्रमा की सतह और पीछे के लिए एक अत्यधिक पथ प्रदान करने वाली इस अनूठी कक्षा में प्रवेश करने और बनाए रखने का प्रदर्शन करे।
  • अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष यान नेविगेशन सेवाओं का प्रदर्शन करे‚ जो भविष्य के अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से ट्रैकिंग पर विशेष रूप से निर्भर किए बिना चंद्रमा के सापेक्ष अपना स्थान निर्धारित करने की अनुमति देते हैं।

मिशन के दौरान क्या होगा? 

  • अपने लक्ष्य गंतव्य बिंदु तक चार महीने की यात्रा के बाद‚ केपस्टोन कक्षा की विशेषताओं को समझने के लिए कम-से-कम छह महीने के लिए चंद्रमा के चारों ओर इस क्षेत्र की परिक्रमा करेगा।
  • केपस्टोन‚ पेलोड फ्लाइट कंप्यूटर और रेडियो (Payload Flight Computer and Radio) की मदद से नई नेविगेशन (Navigation) क्षमताओं का परीक्षण करेगा।
  • साथ ही यह निर्धारित करने के लिए गणना करेगा कि क्यूबसैट अपने कक्षीय पथ में कहां है।
  • मिशन की अवधि को एक वर्ष तक बढ़ाया भी जा सकता है।
  • यह इस बात का भी परीक्षण करेगा कि वांछित कक्षा में कैसे रहना है।
  • ताकि यह पता लगाया जा सके कि रेडियो संकेतों को पृथ्वी पर आगे और पीछे जाने में कितना समय लगेगा।

नासा के प्रस्तावित अन्य चंद्र मिशन

  • आर्टेमिस 1:– इस वर्ष चंद्रमा के लिए यह सबसे बड़ा प्रक्षेपण होगा‚ जो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र सतह पर लौटने के लिए नासा के प्रणाली की पहली बड़ी परीक्षण उड़ान होगी।
  • स्पेस लांच सिस्टम:– अगस्त के अंत में‚ नासा एक रॉकेट‚ स्पेस लांच सिस्टम (Space Launch System) का परीक्षण कर सकता है‚ जो एक ’अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल‚ ओरियन’ (Astronaut Capsule, Orion) ले जाएगा।
  • यह कैप्सूल चंद्रमा के कक्षा की परिक्रमा करेगा और फिर पृथ्वी पर वापस लौट आएगा। जिसमें कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं होगा।
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है‚ कि अंतरिक्ष यात्रियों के दल को चंद्रमा पर भेजने का यह सुरक्षित माध्यम होगा।

संकलन - पंकज तिवारी


 


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