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Post at: Jul 08 2022

वन हेल्थ पायलट प्रोजेक्ट

पृष्ठभूमि

  • 6 अप्रैल, 2022 को पशुपालन और डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry and Dairying), भारत सरकार ने उत्तराखण्ड में वन हेल्थ सपोर्ट यूनिट द्वारा वन हेल्थ फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
  • इकाई का मुख्य उद्देश्य पायलट परियोजना के कार्यान्वयन से मिली जानकारियों के आधार पर एक राष्ट्रीय स्तर का वन हेल्थ रोडमैप विकसित करना है।
  • वन हेल्थ सहायता इकाई के कार्यान्वयन का नेतृत्व करने के लिए भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार की अध्यक्षता में अंतर-मंत्रालयी वन हेल्थ समिति की स्थापना की गई है।
  • पायलट प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में शुरू की जाने वाली कुछ प्रमुख गतिविधियों में बीमारी के प्रकोप, प्रसार, प्रबंधन और लक्षित निगरानी योजना से जुड़े आंकड़ों को राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के डिजिटल तंत्र के साथ एकीकृत करना शामिल है।

नोट :- यह पायलट प्रोजेक्ट भारतीय उद्योग परिसंघ (Confederation of Indian Industry: CII) और बिल एण्ड मेलिण्डा गेट्‍स फाउण्डेशन के सहयोग से संचालित है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 28 जून, 2022 को मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा बंगलुरू, कर्नाटक में ‘वन हेल्थ पायलट’ को लांच किया गया।
    • कर्नाटक  में पायलट प्रोजेक्ट को पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव अतुल चतुर्वेदी द्वारा लांच किया गया।
    • आयोजन के दौरान, कर्नाटक के लिए क्षमता निर्माण योजना और वन हेल्थ ब्रोशर (कन्‍नड़) का भी अनावरण किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • ‘वन हेल्थ’ की संकल्पना यह मानता है, कि मानवों का स्वास्थ्य, जानवरों के स्वास्थ्य और हमारे पर्यावरणीय परिवेश से निकटतम रूप से जुड़ा हुआ है।

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  • वन हेल्थ अपना प्रारूप, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organisation : FAO), विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के त्रिपक्षीय-प्‍लस गठबंधन मध्य समझौते से प्राप्त करती है।
  • यह मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य जैसे विभिन्‍न विषयों में अनुसंधान और ज्ञान साझा करने में सहयोग को प्रोत्साहित करता है, जिससे सभी प्रजातियों के स्वास्थ में सुधार, सुरक्षा और बचाव हो सके।
  • ‘‘वन हेल्थ इण्डिया’’ कार्यक्रम वित्त और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से मानव स्वास्थ्य, पशुधन स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वास्थ्य और वन्यजीव स्वास्थ्य में सुधार के लिए विभिन्‍न क्षेत्रों के विभिन्‍न हितधारकों के साथ काम करेगा।

​​​​​​​वन हेल्थ रूपरेखा

  • वन हेल्थ रूपरेखा, निम्नलिखित आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करेगा-

महत्व

  • पिछले कुछ वर्षों में वन हेल्थ संकल्पना अधिक महत्वपूर्ण हो गई है; क्योंकि कई कारकों ने मानव, जानवरों, पौधों और हमारे पर्यावरण के बीच संबंधों को बदल दिया है।
    • सतत विकास : ‘‘वन हेल्थ’’ की सोच सतत विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है ; क्योंकि यह लोगों और इस ग्रह के बीच एक-दूसरे पर निर्भरता से जुड़े विषयों को हल देती है।
    • मानव स्वास्थ विस्तार : मानव स्वास्थ को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता है, मानव जीवन पर पशु और पर्यावरण स्वास्थ के असर को समझना महत्वपूर्ण है।
    • गौरतलब है, कि मानव को संक्रमित करने वाली 65 प्रतिशत से अधिक संक्रमित बीमारियां जूनोटिक (Zoonotic)  या पशु से मनुष्य में उत्पत्ति के कारण हैं।
    • राष्ट्रीय रोडमैप :  इस पायलट प्रोजेक्ट के क्रियान्‍वयन के माध्यम से प्राप्त ‘अनुभव एक राष्ट्र एक देश’ (One Nation one Health) योजना के लिए रोडमैप विकसित करने में मददगार होगा।
    • अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार :  अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार के फलस्वरूप जानवरों व उनके उत्पादों की आवाजाही सक्रियता में वृद्धि हुई है, जिससे इनसे जनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
    • प्रबंधन : पायलट प्रोजेक्ट बेहतर प्रबंधन और लक्षित निगरानी योजना के विकास को संस्थागत रूप देगा, प्रयोगशालाओं के एक नेटवर्क को एकीकृत करेगा, सभी क्षेत्रों में संचार रणनीति विकसित और कार्यान्वित करेगा।

​​​​​​​अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • दीर्घकालिक उद्देश्यों के दृष्टिगत, भारत सरकार द्वारा 1990 के दशक में जूनोज (Zoonos) पर एक राष्ट्रीय स्थायी समिति की स्थापना की गई।
  • 12 अप्रैल, 2021 को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री द्वारा नागपुर में ‘राष्ट्रीय एक स्वास्थ्य संस्थान (National Institute of one Health) स्थापित करने की घोषणा की।
  • इसके अलावा, 14 अक्टूबर, 2021 को देश का पहला वन हेल्थ कंसोर्टियम (One Health Consurtium) बायोटेक्‍नोलॉजी विभाग (Department of Biotechnology) द्वारा लांच किया गया है।

निष्कर्ष

  • कोविड-19 महामारी ने भारत समेत पूरी दुनिया काे जूनेटिक (Zoonetic) रोगों के खिलाफ एक मॉडल विकसित करने तथा सार्थक अनुसंधान सहयोग स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
    • जिसके परिणामस्वरूप ‘वन हेल्थ’ की संकल्पना संधारणीय मानव-पर्यावरण कल्याण के लिए समय की मांग है।

​​​​​​​संकलन-पंकज तिवारी


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