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Post at: Jul 07 2022

वर्ष 2017 से भारत में असमानता घटी : एसबीआई रिपोर्ट

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • जून‚ 2022 में स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया (S.B.I.) (Ecowrap) ने भारत में असमानता की स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार‚ भारत में वर्ष 2017 से अब तक असमानता के स्तर में कमी आई है।

रिपोर्ट से संबंधित मुख्य तथ्य

  • रिपोर्ट के अनुसार‚ कोविड-19 की स्थिति के दौरान गरीबी एवं असमानता सर्वाधिक चर्चा का विषय रहे।
  • ध्यातव्य है‚ कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey : PLFS) घरेलू मासिक खपत तथ्यों के अनुसार‚ वर्ष 2020-21 में अखिल भारतीय गरीबी का स्तर 17.9 प्रतिशत हो गया है।
  • यह आंकड़ा 2011-12 में 21.9 प्रतिशत के स्तर पर था।
  • ध्यातव्य है‚ कि रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में गरीबी का स्तर कम है।
  • रिपोर्ट यह इंगित करती है‚ कि कोविड-19 महामारी के दौरान असमानता में कमी आई है।
  • रिपोर्ट यह भी बताती है‚ कि महामारी के दौरान व्वावसायिक आय की उच्च संवेदनशीलता के कारण समृद्ध लोगों की आय में गिरावट दर्ज की गई है।
  • विदित हो कि चूंकि भारत में रोजगार से जुड़ा हुआ एक बड़ा क्षेत्रक अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है; इसलिए कई वैश्विक संस्थाओं ने भारत में असमानता संबंधी त्रुटिपूर्ण आकलन प्रस्तुत किया।
  • रिपोर्ट इस बात की ओर इंगित करती है‚ कि राष्ट्रीय लेखांकन सर्वेक्षण (National Accounting Parlonce) में सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product : GDP) तथा GDI (Gross Domestic Income : GDI) के बीच अंतर को एक निर्दिष्ट सीमा के अंतर्गत अधिक संरेखित करने की आवश्यकता है।
  • विभिन्न अर्थव्यवस्था में GDP एवं GDI में अंतर आमतौर पर 1 प्रतिशत के आस-पास प्राप्त होता है।
  • भारत के संदर्भ में देखा जाए‚ तो राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग (NSO) सकल राष्ट्रीय आय (Gross National Income : GNI) संबंधी तथ्यों को जारी करता है।
  • ध्यातव्य है‚ कि भारत के लिए वित्तीय वर्ष 2012 से 2020 के दौरान GDP एवं GNI के बीच अंतर लगभग 1.1 प्रतिशत था।
  • यह अंतर वित्तीय वर्ष 2022 में 1.6 प्रतिशत तक पहुंच गया।
  • रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार‚ वित्त वर्ष 2011 को समाप्त होने वाले दशक हेतु 33 राज्यों के उत्पादन तथा आय के आंकड़ों का उपयोग करने से यह निष्कर्ष निकलता है‚ कि सकल घरेलू उत्पाद द्वारा मापी गई उत्पादन वृद्धि एक दशक में लगातार बढ़ी है।
  • रिपोर्ट के अनुसार‚ वित्तीय वर्ष 2012 से 2021 तक गिनी गुणांक स्थिर रहा है (0.57 - 0.58 की सीमा में)।
  • रिपोर्ट यह भी इंगित करती है‚ कि क्षेत्रीय असमानता भी पिछले एक दशक में कम हुई है।
  • भारत की औसत आय वर्ष 2001-02 में 18,118 रुपये थी‚ जो बढ़कर वर्ष 2011-12 में 68845 एवं 2021-22 में 1,74,024 हो गई।
  • ध्यातव्य है‚ कि यह रिपोर्ट यह भी इंगित करती है‚ कि अखिल भारतीय गरीबी अनुपात घटकर 17.9 प्रतिशत हो गया है‚ जो वर्ष 2011-12 में 21.9 प्रतिशत के स्तर पर था।

संकलन - आलोक त्रिपाठी


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