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Post at: Jul 02 2022

उधमपुर में भूकंप विज्ञान वेधशाला का उद्‍घाटन

पृष्ठभूमि

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology: NCS)  भारत मंे भूकंप गतिविधि की निगरानी के लिए भूकंप वेधशाला की स्थापना और रख-रखाव के लिए उत्तरदायी है।
  • NCS 153 स्टेशनों के राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क का रख-रखाव करता है, जिनमें से प्रत्येक में अत्याधुनिक उपकरण हैं और पूरे देश में फैले हुए हैं।
  • यह पहल, भूकंपीय माइक्रोजोनेशन (Seismic Microzonation) नामक एक प्रयास का हिस्सा है।
    • जिसका उद्देश्य संरचनाओं और बुनियादी ढांचे के लिए भूकंप जोखिम लचीला भवन डिजाइन कोड (Risk Resilient building design codes) विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण भू-तकनीकी और भूकंपीय मानकों को उत्पन्‍न करना है।
  • नोट :- ध्यातव्य है, कि भारत में भूकंप की निगरानी के लिए पहली भूकंपीय वेधशाला 1897 ई. में शिलांग पठार भूकंप के बाद 1 दिसंबर, 1898 को अलीपुर (कोलकाता) में स्थापित की गई थी।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 21 जून, 2022 को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा जम्मू और कश्मीर के उधमपुर में एक भूकंपीय वेधशाला का उद्‍घाटन किया।
    • यह जम्मू-कश्मीर में स्थापित तीसरा वेधशाला केंद्र है तथा भारत की यह 153वीं भूकंप वेधशाला है।
  • इस वेधशाला में उधमपुर, डोडा , किश्तवाड़, रामबन समेत कई अन्य जिलों का पूरा भूकंपीय रिकाॅर्ड तैयार किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • ज्ञातव्य है, कि जम्मू और कश्मीर भारत में हिमालय का सबसे पश्चिमी विस्तार है।
  • उधमपुर जिला दो प्रमुख भूकंपीय दोषों के बीच स्थित है -
  • यह मेन फ्रंटल थ्रस्ट (Main Frontal Thrust: MFT) और मेन बाउण्ड्री थ्रस्ट (Main Boundry Thrust: MBT)  के बीच अवस्थित है।
  • यह जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में भूकंप पैदा करने के संभावित कारकों में से है।
  • स्थापित वेधशाला जम्मू-कश्मीर में आपदा शमन और तैयारी उपायों में सुधार के लिए आवश्यक बेहतर वैज्ञानिक इनपुट (Input) प्रदान करेगा।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • अगस्त, 2021 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा वर्ष 2021 के अंत तक 35 भूकंप वेधशालाएं और वर्ष 2026 तक 100 और वेधशालाएं स्थापित करने की घोषणा की गई थी।
  • NCS द्वारा वर्ष 2020-21 के दौरान रिएक्टर पैमाने पर 3 और उससे अधिक तीव्रता वाले कुल 965 भूकंपों की सूचना दी गई है।
    • जिनमें, 13 भूकंप राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region : NCR) और उसके आस-पास दर्ज किए गए।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र

  • राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भूकंप गतिविधि की निगरानी के लिए भारत सरकार की नोडल एजेंसी (Nodal Agency) है।
  • एनसीएस अपने चौबीसों घंटे निगरानी केंद्र के माध्यम से पूरे देश में भूकंप गतिविधि की निगरानी करता है।
  • यह प्रभावित क्षेत्र के करीब एक अस्थायी वेधशाला तैनात करके भूकंप के झुण्ड और आफ्टर शॉक (after shocks) की निगरानी भी करता है।
  • भूकंप की निगरानी के अलावा, यह भूकंपीय जोखिम माइक्रोजोनेशन और भूकंपीय अनुसंधान मंे भी सक्रिय रूप से शामिल है। 
  • वर्तमान में एनसीएस द्वारा की जा रही प्रमुख गतिविधियां हैं :-

भारत में भूकंप परिदृश्य

  • ऐतिहासिक भूकंप और मजबूत जमीनी गतियों के आधार पर भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of India Standards:BIS)  द्वारा तैयार किए गए भारत के भूकंपीय जोनिंग मानचित्र (Seismic Zoning Map) के अनुसार, भारत को चार जोन में बांटा गया है।
  • जोन V, IV, III और II, इन क्षेत्रों में जोन V सबसे अधिक भूकंपीय जोखिम प्रदर्शित करता है, वहीं जोन II सबसे कम जोखिम वाला क्षेत्र है।
  • भारत का लगभग 59 प्रतिशत भूमि क्षेत्र भूकंपीय जोखिम के अधीन है।

जोन V

  • जम्मू और कश्मीर के हिस्से (कश्मीर घाटी); हिमाचल प्रदेश का पश्चिमी भाग; उत्तराखण्ड का पूर्वी भाग; गुजरात के कच्‍छ;  उत्तरी बिहार का हिस्सा ;  भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्य और अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह।

जोन IV

  • लद्दाख, जम्मू और कश्मीर , हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड के शेष हिस्से, हरियाणा के कुछ हिस्से, पंजाब के कुछ हिस्से, दिल्‍ली, सिक्‍किम, उत्तर प्रदेश का उत्तरी भाग, बिहार और पश्चिम बंगाल के छोटे हिस्से, गुजरात के कुछ हिस्से और पश्चिमी तट के पास महाराष्ट्र हिस्से और पश्चिमी राजस्थान के छोटे हिस्से।

जोन III

  • केरल, गोवा, लक्षद्वीप समूह, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों, गुजरात और पंजाब के शेष भाग, पश्चिम बंगाल, पश्चिम राजस्थान, मध्य प्रदेश, के कुछ हिस्सों, बिहार का शेष भाग झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग,  महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्से।

जोन II

  • राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के शेष हिस्से।

संकलन-पंकज तिवारी


 

 


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