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Post at: Jul 02 2022

अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा

परिचय

  • अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (International North-South Transport Corridor : INSTC) एक मल्टी-मॉडल परिवहन नेटवर्क है।
  • इसका विचार पहली बार वर्ष 2000 में रूस, भारत और ईरान ने प्रस्तुत किया था।
    • वर्तमान में इसके 13 सदस्य हैं : भारत, ईरान, रूस, अजरबैजान, आर्मेनिया, कजाख्स्तान, बेलारूस, तुर्की, ताजिकिस्तान, किर्गिजस्तान, ओमान, यूक्रेन और सीरिया।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 11 जून, 2022 को रूस द्वारा INSTC रूट का पहली बार उपयोग करते हुए सेंट पीटर्सबर्ग से भारत के लिए माल (Goods) की खेप भेजी गई।
    • यह खेप कैस्पियन सागर में रूस के अस्रखान बंदरगाह से होते हुए, ईरान के अंजली बंदरगाह तक यात्रा करेगा। 
  • उसके बाद सड़क मार्ग से होते हुए ईरान के बंदर अबास बंदरगाह (फारस की खाड़ी) से होते हुए पश्चिमी भारतीय बंदरगाह न्हावा शेवा/मुंदरा बंदरगाह तक आएगा।
  • इस कुल यात्रा में रूस से भारत तक माल परिवहन में लगने वाले पूर्व के 40 दिनों की तुलना में 25 दिन ही लगेंगे।
    • भारत और रूस के बीच व्यापार समय को कम करने के साथ, INSTC को मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत, रूस व्यापार के लिए एक व्यावहारिक विकल्प माना जाता है।

प्रमुख बिंदु

  • INSTC  सर्वप्रथम हिंद महासागर और फारस की खाड़ी को ईरान के माध्यम से कैस्पियन सागर से जोड़ता है।
    • इसके आगे ये रूस के माध्यम से सेंट पीटर्सबर्ग और यूरोप से जुड़ जाता है।
  • INSTC के 7200 किमी. रूट में समुद्र, सड़क और रेल मार्ग शामिल हैं।
  • यह गलियारा भारत को मध्य एशिया और उसके परे सुगम पहुंच प्राप्त करने में मदद करेगा।
    • इसके साथ ही यह स्वेज नहर व भूमध्य सागरीय मार्ग के लिए एक विकल्प होगा।

उत्तर-दक्षिण पारगमन गलियारा

भारत के लिए INSTC का महत्व

  • यह गलियारा भारत और रूस के बीच माल की परिवहन लागत को 30 प्रतिशत तक कम करेगा।
  • भारत और रूस के बीच परिवहन में लगने वाले समय को (स्वेज नहर के माध्यम से लगने वाले समय की तुलना में) लगभग आधा कर देगा।
  • भारत की सहायता से INSTC को ईरान के चाबहार बंदरगाह की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
    • जिसका उपयोग अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ संपर्क के लिए किया जाएगा। 
  • इसे चीन की बेल्ट एण्ड रोड पहल (BRI)  के विरुद्ध ‘भारतीय प्रतिक्रिया’ के रूप में देखा जा रहा है।
  • यह वर्तमान व्यापारिक साझीदारों (विशेषकर ऊर्जा जुड़ाव) पर निर्भरता कम करेगा। यह आपूर्ति श्रृंखला को फिर से व्यवस्थित करेगा।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • कैस्पियन सागर के तट को साझा करने वाले देश :
    • कजाख्स्तान, रूस, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और ईरान (5 देश)
  • काला सागर के तट को साझा करने वाले देश :
    • तुर्की, जाॅर्जिया, रूस, यूक्रेन, रोमानिया और बुल्‍गारिया हैं।

संकलन-पंकज तिवारी

 


 


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