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Post at: Jun 30 2022

दिल्ली हवाई अड्डा : हाइड्रो और सौर ऊर्जा से संचालित पहला हवाई अड्डा

परिचय

  • दिल्ली हवाई अड्डा द्वारा पर्यावरणीय स्थिरता प्राप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन (Net Zero Carbon Emission) हवाई अड्डा बनने का लक्ष्य तय किया गया था।
  • इसे प्राप्त करने के लिए‚ दिल्ली हवाई अड्डा द्वारा हाल ही में एक हरित परिवहन कार्यक्रम अपनाया गया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • जून‚ 2022 को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (Indira Gandhi International : IGI) हवाई अड्डा पूरी तरह से जल और सौर के संयोजन पर चलने वाला भारत का पहला हवाई अड्डा बन गया है।
  • ध्यातव्य है‚ कि नवंबर‚ 2021 में दिल्ली हवाई अड्डा द्वारा वर्ष 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन बनने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख बिंदु

  • 1 जून‚ 2022 से हवाई अड्डे की विद्युत की आवश्यकता का लगभग 6 प्रतिशत ऑन-साइट (on-site) बिजली संयंत्रों से  पूरा किया  जा रहा है।
  • जबकि‚ शेष 94 प्रतिशत ऊर्जा एक जलविद्युत संयंत्र से प्राप्त की जा रही है।
  • इसके लिए दिल्ली हवाई अड्डे ने वर्ष 2036 तक हवाई अड्डे के लिए पनबिजली की आपूर्ति के लिए हिमाचल प्रदेश की एक जलविद्युत कंपनी के साथ एक दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • दिल्ली हवाई अड्डे के पास 7.84 मेगावॉट (MW) का सौर ऊर्जा संयंत्र है और कार्गो टर्मिनल में 5.3 मेगावॉट का एक रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र जोड़ा गया है।

महत्व

  • इस पहल से प्रतिवर्ष 2 लाख टन CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • वर्ष 2030 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन की लक्ष्य प्राप्ति में सहायक भूमिका।
  • पर्यावरण की दृष्टि से अनुकरणीय उदाहरण का प्रस्तुतीकरण है।

अन्य हरित पहल

  • पर्यावरण मित्र (Eco-friendily) हवाई अड्डा बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airport Authority of India : AAI) द्वारा विभिन्न पहल की गई है‚ जिनमें शामिल हैं;

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • ज्ञातव्य है‚ कि कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा‚ केरल विश्व का 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से संचलित होने वाला पहला हवाई अड्डा है। 

संकलन - पंकज तिवारी

 


 


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