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भुगतान (पेमेंट्‍स) विजन, 2025

परिचय

  • भारतीय रिजर्व बैंक वर्ष 2001 से अावधिक भुगतान विजन दस्तावेज जारी कर रहा है।
  • इसके माध्यम से भारत में भुगतान और निपटान प्रणाली के सुनियोजित विकास के लिए कार्यनीतिक निदेश और कार्यान्वयन योजना प्रदान कर रहा है।
  • पेमेंट्‍स (भुगतान) विजन (Payment Vision), 2025; पेमेंट्‍स विजन, 2019-21 की पहल पर आधारित है।
  • यह दिसंबर, 2025 तक की अवधि के लिए  विचार प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करता है।
  • पेमेट्‍स विजन, 2025’ भारत के प्रयासों का लाभ उठाने के साथ-साथ सीमा पार भुगतान को बढ़ाने हेतु G-20 के लक्ष्य पर भी आधारित है।
  • इस क्रम में यह चार प्रमुख चुनौतियों लागत (Cost), गति (Speed), पहुंच (Access) और पारदर्शिता (Transparency)  का भी समाधान करने पर बल देता है।
  • पेमेंटस विजन, 2025’ प्रत्येक उपयोगकर्ताओं काे ई-भुगतान का विकल्प प्रदान करने का निम्नलिखित दृष्टिकोण भी रखता है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 17 जून, 2022 को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India :RBI) द्वारा पेमेंट्‍स विजन, 2025 को जारी किया गया।
  • इसका मुख्य विषय (Theme) ई-भुगतान सभी के लिए, सभी जगह, हर समय (E-Payments for Everyone, Every where, Everytime-4Es)
  • पेमेंट्‍स विजन, 2025 को आरबीआई (RBI)  के पेमेंट एण्ड सेटलमेंट (Payment and Settlement)  प्रणाली के विनियमन और पर्यवेक्षण (Regulation and Supervision) बोर्ड के मार्गदर्शन पर तैयार किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्ष 2025 तक की जाने वाली पहलों को पांच प्रमुख लक्ष्य पदों के तहत वर्गीकृत किया गया है-

  • जहां उपर्युक्त पांच लक्ष्यों के तहत प्रस्तावित विभिन्‍न पहलों से निम्नलिखित 10 परिणाम प्राप्त किए जाने की अपेक्षा की गई है-
  • चेक आधारित भुगतानों की मात्रा कुल खुदरा भुगतानों के 0.25 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।
  • डिजिटल भुगतान लेन-देन की संख्या में 3 गुना से अधिक की वृद्धि होनी चाहिए।
  • एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) 50 प्रतिशत और तत्काल भुगतान सेवा (IMPS)/ राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (NEFT) 20 प्रतिशत  की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज करेंगे।
  • सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में भुगतान लेन-देन कारोबार 8 प्रतिशत करना।
  • प्‍वाॅइंट ऑफ सेल (PoS)  पर डेबिट कार्ड लेन-देन में 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।
  • मूल्य के मामले में क्रेडिट कार्ड को पार करने के लिए डेबिट कार्ड का उपयोग ।
  • अग्रिम भुगतान उपकरण (Prepaid Payments Instruments : PPI)  लेन-देन में 150 प्रतिशत की वृद्धि करना।
  • कार्ड (Card) स्वीकृति के बुनियादी ढांचे को बढ़ाकर 250 लाख किया जाएगा।
  • मोबाइल आधारित लेन-देन के लिए पंजीकृत ग्राहक आधार में 50 प्रतिशत चक्रवृद्धि  वार्षिक वृद्धि दर (Compound Annual Growth Rate: AGR) की वृद्धि हासिल करना।
  • सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में कैश इन सर्कुलेशन (CIC) में कमी की जाएगी इत्यादि।

पेमेंट्‍स विजन दस्तावेज में शामिल कुछ प्रमुख पहल

  • डिजिटल भुगतान अवसंरचना और लेन-देन की जियोटैगिंग:- धोखाधड़ी की निगरानी और विवाद की निगरानी तथा ग्राहकों की गोपनीयता संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए भुगतान लेन-देन की जियोटैगिंग (Geo-tagging) करना।
  • सभी महत्वपूर्ण बिचौलियों का विनियमन :- महत्वपूर्ण बिचौलिए ; जैसे भुगतान गेटवे (गूगल पे, फोन पे) क्रेडिट, डेबिट कार्ड प्रदाता आदि को आधारभूत प्रौद्योगिकियों के उपयोग के संबंध में विनियमित करने की आवश्यकता है।
  • चेक ट्रंकेशन सिस्टम (Cheque Truncation System)- इसके अंतर्गत एक राष्ट्र एक ग्रिड समाशोधन और निपटान प्रणाली (One Nation One Grid Clearing and Settlement Perspective) सहित चेक ट्रंकेशन प्रणाली में सुधार करने के साथ मोबाइल बैंकिंग का उपयोग करके ऑनलाइन व्यापारी भुगतानांे काे संसाधित (Processing)  करने के लिए एक भुगतान प्रणाली बनाना शामिल है।
  • भुगतान में बिगटेक और फिनटेक के लिए विनियम (Regulation of Bigtechs and Fintechs in Payments Space): बिगटेक और फिनटेक नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और अनुकूलित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी बढ़ती भ्ूमिका देखते हुए आनुपातिक विनियमन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
  • अभी खरीदें बाद में भुगतान करें [Buy Now Pay Later: BNPL)] प्रणाली : बीएनपीएल सेवाएं कार्ड, यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसे मौजूदा भुगतान मोड के साथ एक नए भुगतान मोड में विकसित हुए उदाहरण पोस्ट पे, पेटीएम, िफ्‍लपकार्ट, अमेजन आदि। इनके बढ़ते उपयोगकर्ताओं को देखते हुए इनके तरीकों की जांच करने और भुगतानों पर उचित दिशा-निर्देशों की खोज की सिफारिश करता है।
  • केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा [Central Bank Digital Currency : CBDC] का परिचय : CBDC का उपयोग करके घरेलू और सीमा पार भुगतान प्रसंस्करण और निपटान में और दक्षता लाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक इस दिशा में काम कर रहा है। यह पहल G-20 के लिए भी रुचि का क्षेत्र है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • केंद्रीय बैंक ‍द्वारा बाजार व्यापार और निपटान के घंटों में वृद्धि के लिए समर्थन किया जाएगा।
  • वर्तमान में पूंजी बाजार और मुद्रा बाजार निश्चित घंटों में ही संचालित किए जाते हैं।
  • जबकि, आरटीजीएस (Real Time Gross Settlement) और एनईएफटी (National Electronic Funds Transfer) 24×7 संचालित की जा रही हैं।
  • इसके साथ ही, क्रेडिट कार्ड को एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) से जोड़ने की भी बात कही गई है।

​​​​​​​महत्व

  • पेमेंट्‍स विजन, 2025 का महत्व भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक ताकत के रूप में स्थापित करने का है।
  • यह विजन उभरते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच घरेलू भुगतान प्रणालियों की सुरक्षा को मजबूत करने का दृष्टिकोण रखता है।
  • भारत में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन भुगतान व वित्तीय लेन-देन के बीच यह विजन धोखाधड़ी व अनियमितता से उपयोगकर्ता की सुरक्षा को बढ़ाने का प्रस्ताव रखता है।
  • तेजी से बढ़ रही हैं फिनटेक, बिगटेक व अन्य मध्यस्थ तकनीकी कंपनियों पर विनिमय व नियंत्रण की दृष्टि से भी यह विजन महत्वपूर्ण है।

​​​​​​​महत्वपूर्ण शब्दावली

  • ‘फिनटेक कंपनियां’ यह ‘फाइनेंशियल टेक्‍नोलॉजी’ (Financial Technology) का संक्षिप्त रूप है। वित्तीय कार्यों में प्रौद्योगिकी के उपयोग को फिनटेक कहा जा सकता है।

उदाहरण : डिजिटल पेमेंट, डिजिटल ़ऋण, क्रिप्टो करेंसी व बैंक टेक इत्यादि।

  • बिगटेक कंपनियां-‘बिगटेक’ कोड का उपयोग फेसबुक (मेटा) और गूगल जैसे बड़ी टेक फर्मों द्वारा अपने प्रौद्योगिकी के द्वारा वित्तीय व अन्य सेवाओं के संचालन के लिए किया जाता है।

चेक ट्रंकेशन प्रणाली :-बैंक चेकों से भुगतान की प्रक्रिया तेजी से निपटाने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने चेक ट्रंकेशन प्रणाली विकसित की है। इसमें चेक के फिजिकल स्वरूप को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के स्थान पर इलेक्ट्राॅनिक इमेज (फोटो) से ही क्‍लीयरेंस प्रदान कर दी जाती है।

संकलन-पंकज तिवारी
 


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