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अफगानिस्तान में भूकंप

परिचय

  • साधारण भाषा में भूकंप का अर्थ-पृथ्वी का कंपन है। यह एक प्राकृतिक घटना है।
  • जिसमें, भूगर्भ से ऊर्जा के निकलने के कारण तरंगें उत्पन्‍न होती हैं, जो सभी दिशाओं में फैलकर भूकंप लाती हैं।
    •  प्राय: भ्रंश के किनारे-किनारे ही ऊर्जा निकलती है, भूपर्पटी की शैलों में गहन दरारें ही भ्रंश होती हैं।
  • पृथ्वी की सतह के नीचे का स्थान जहां से भूकंप शुरू होता है, उसे अवकेंद्र (Hypocentre) कहते हैं और भूतल पर वह बिंदु जो उद्‍गम केंद्र के समीपतम होता है, उसे अधिकेंद्र (Epicentre) कहा जाता है।
    • अधिकेंद्र पर ही सबसे पहले तरंगों को महसूस किया जाता है। अधिकेंद्र उद्‍गम केंद्र के ठीक ऊपर (90O) के कोण पर होता है।
  • भूकंपीय तरंगों को सीस्मोग्राफ (Seismograph) नामक उपकरण पर दर्ज किया जाता है।
  • बुनियादी तौर पर भूकंपीय तरंगें दो प्रकार की होती हैं- भूगर्भिक तरंगें (Body Waves) और धरातलीय तरंगें (Surface waves) ।
  •  भूगर्भिक तरंगें- उद्‍गम केंद्र से ऊर्जा के मुक्त होने के दौरान पैदा होती हैं और पृथ्वी के अंदरूनी भाग से होकर सभी दिशाओं में आगे बढ़ती हैं; इसलिए इन्हें भूगर्भिक तरंगें कहा जाता है। भूगर्भीय तरंगें दो प्रकार की होती हैं। इन्हें 'P' और 'S'  तरंगें कहा जाता है।
  • धरातलीय तरंगें-भूगर्भिक तरंगों एवं धरातलीय शैलों के मध्य अन्‍योन्‍य क्रिया के कारण नई तरंगें उत्पन्‍न होती हैं, जिन्हें धरातलीय तरंगें कहा जाता है। ये तरंगें धरातल के साथ-साथ चलती हैं।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 22 जून, 2022 को अफगानिस्तान में लगभग 6.1 तीव्रता का घातक भूकंप आया।
  • भूकंप का केंद्र खोस्त शहर (अफगानिस्तान) से लगभग 50 किलोमीटर  दक्षिण-पश्चिम में पक्तिका प्रांत (Paktika Province)  के पास था।
    • भूकंप के झटके अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में भी महसूस किए गए थे।
  • भूकंप की तीव्रता इतनी घातक थी, कि इसमें कम-से-कम 1000 लोग मारे गए और लगभग 1500 लोग घायल हो गए हैं।

प्रमुख बिंदु

  • अफगानिस्तान भूकंप-प्रवण (Earthquake Prone) है; क्योंकि यह हिंदूकुश पहाड़ी क्षेत्र में अवस्थित है।
  • जो कि ‘एल्‍पाइड बेल्ट’ (Alpide belt) का हिस्सा है, प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर (Pacefic Ring of fire) के बाद दुनिया में दूसरा सबसे अधिक भूकंप सक्रिय क्षेत्र है।
  • अध्ययन के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप और यूरेशियन टेक्‍नोनिक प्‍लेट के बीच धीमी गति के टकराव को इस क्षेत्र में अत्यंत सामान्य भूकंपों का कारण माना जाता है।
  • यूनाइटेड स्टेट्‍स जियाेलॉजिकल सर्वे (United States Geological Survey : USGS) ने हिंदूकुश क्षेत्र को ‘‘पृथ्वी पर सबसे अधिक भूकंपीय रूप से खतरनाक क्षेत्रों में से एक’’ माना है, जो दुनिया में गहरे भूकंपों की उच्‍चतम दरों में से एक है।
  • हालांकि, विशेषज्ञों द्वारा अभी के भूकंप की गहराई को महज 10 किलोमीटर बताया गया है, और उथले भूकंप अधिक घातक होते हैं।

भूकंप के प्रभाव

  • भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है। भूकंपीय आपदा से होने वाले प्रकोप निम्न हैं-

भूकंप के प्रकार- दोष क्षेत्र (Fault Zone), विवर्तनिक भूकंप  (Tectonic Earthquake), ज्वालामुखी भूकंप (Volcano earthquake), मानव प्रेरित भूकंप (Human Induced Earthquakes) ।

  • विवर्तनिक भूकंप- सामान्यत: विवर्तनिक (tectonic) भूकंप ही अधिक आते हैं। ये भूकंप भ्रंशतल के किनारे चट्टानों के खिसक जाने के कारण उत्पन्‍न होते हैं।
  • ज्‍वालामुखीजन्य भूकंप- ये भूकंप अधिकांशत: सक्रिय ज्वालामुखी प्रवण क्षेत्र में आते हैं और इन्हीं क्षेत्रों तक ही सीमित रहते हैं।
  • दोष क्षेत्र भूकंप- यह भूकंप दो ब्लाॅकों के बीच भ्रंश क्षेत्र में आते हैं ; क्योकि दोष ब्लाॅक एक-दूसरे के सापेक्ष समांतर गति करते हैं।
  • मानवजनित भूकंप- मानवीय क्रिया-कलापों; जैसे अत्यधिक खनन, परमाणु परीक्षण तथा बड़े बांधों के निर्माण स्वरूप भी मानवजनित भूकंप पैदा होते हैं।

भूकंप का वितरण

  • दुनिया का सबसे बड़ा भूकंप प्रवण क्षेत्र प्रशांत महासागर के किनारे स्थित प्रशांत भूकंपीय बेल्ट है।
    •  जहां पृथ्वी के लगभग 81 प्रतिशत सबसे बड़े भूकंप आते हैं, जिसे रिंग ऑफ फायर (Ring of fire) उपनाम दिया गया है।

  • एल्‍पाइड भूकंप बेल्ट (मध्य महाद्वीपीय बेल्ट) जो जावा से सुमात्रा तक हिमालय, भूमध्यसागरीय और अटलांटिक में फैली हुई है।
    •  इसके अंतर्गत्‍ा पृथ्वी के 17 प्रतिशत भूकंप आते थे।
  • तीसरा प्रमुख बेल्ट जलमग्‍न मध्य अटलांटिक रिज का वितरण क्षेत्र है। यहां पर दो टेक्‍टोनिक प्‍लेट अलग-अलग दिशा में फैल रहे हैं।

​​​​​​​भारत में भूकंप क्षेत्र का वितरण

  • भारत, सक्रिय नव वलित पर्वतों (हिमालय क्षेत्र) की उपस्थिति के कारण अत्यधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है।
  • ध्यातव्य है, कि पहले भूकंप तीव्रता क्षेत्रों के आधार पर पांच क्षेत्रों में विभाजित किया गया, लेकिन भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards:BIS) द्वारा दो क्षेत्रों को एकीकृत करके देश को चार भूकंपीय क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है।

नोट :  भारतीय मानक ब्यूरो ही देश में भूकंपीय खतरे के नक्शे और कोड प्रकाशित करने वाली आधिकारिक संस्था है।

संकलन-पंकज तिवारी


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