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Post at: Jun 24 2022

INS सूरत और उदयगिरी

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 17 मई, 2022 को रक्षा मंत्रालय ने माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई में भारतीय नौसेना के दो स्वदेशी अग्रवर्ती (Frontline) युद्धपोतों का जलावतरण किया।
  • यह दो स्वदेशी युद्धपोत यथा-आईएनएस सूरत (YD12707)  और आईएनएस उदयगिरी (YD12652) हैं।

आईएनएस सूरत

  • यह परियोजना-15बी (P-15B) श्रेणी का चौथा निर्देशित मिसाइल विध्वंसक (Guided Missile Destroyer)  पोत है।
    • P-15B  श्रेणी के पहले पोत INS विशाखापत्तनम को नवंबर, 2021 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
    • जबकि, P-15B श्रेणी का दूसरा व तीसरा पोत क्रमश: INS  मोरमुगाओ का जलावतरण सितंबर, 2016 में हुआ व INS  इंफाल परीक्षण के विभिन्‍न चरणों में है।
  • गुजरात राज्य की वाणिज्यिक राजधानी ‘सूरत’ के नाम पर ही इस युद्धपोत का नामकरण किया गया है।

परियोजना-15 बी

  • उल्‍लेखनीय है, कि परियोजना 15-ए (P-15A) के तहत तीन पोतों यथा-INS कोलकाता, INS कोच्‍चि एवं INS चेन्‍नई का निर्माण किया गया है। 
  • चूंकि INS  कोलकाता P-15A श्रेणी का पहला एवं मुख्य पोत है; इसलिए P-15A के तहत निर्मित पोतों को कोलकाता श्रेणी के विध्वसंक पोतों के नाम से भी जाना जाता है।
  • विदित हो सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमण्डलीय समिति ने कोलकाता श्रेणी के पोतों के उन्‍नत संस्करण के विकास को भी मंजूरी प्रदान की है।
  • इन पोतों का निर्माण 'P-15B' के तहत किया जा रहा है।
  • P-15B के तहत निर्मित पोतों को विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस परियोजना की अनुमानित लागत 35000 करोड़ रुपये है।

आईएनएस सूरत की विशेषताएं

  • यह जिन प्रमुख स्वदेशी प्रणालियों/उपकरणों से सुसज्‍जित है, उनमंे शामिल हैं:- युद्ध प्रबंधन प्रणाली’ (Combat Management System),  रॉकेट लांचर, टॉरपीडो ट्‍यूब लांचर, एकीकृत प्‍लेटफाॅर्म प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली इत्यादि।
  • इस पोत की कुल लंबाई 163 मीटर, चौड़ाई 17 मीटर तथा विस्थापन क्षमता 7400 टन है।
  • यह पोत 30 नॉट से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम है।

आईएनएस उदयगिरी

  • यह परियोजना-17 ए (P-17A) श्रेणी का दूसरा स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) है।
    • P-17A श्रेणी के तहत निर्मित पहले स्टील्थ फ्रिगेट ‘नीलगिरी’ का जलावतरण सितंबर, 2019 में किया गया था।
  • आंध्र प्रदेश राज्य में एक पर्वत श्रृंखला ‘उदयगिरी’ के नाम पर ही इस फ्रिगेट का नामकरण किया गया है।

परियोजना -17A

  • परियोजना-17 (P-17) के अंतर्गत निर्मित युद्धपोतों की डिजाइन पर आधारित; परंतु उनकी तुलना में अधिक उन्‍नत स्टील्थ विशेषताओं तथा स्वदेशी हथियारों से सुसज्‍जित युद्धपोतों का निर्माण वर्तमान में P-17A के तहत किया जा रहा है।
    • P-17 (शिवालिक श्रेणी) के अंतर्गत तीन युद्धपोतों यथा-INS  शिवालिक, INS सतपुड़ा तथा INS  सह्याद्री का निर्माण किया गया था।
  • P-17A के तहत कुल 7 युद्बपोतों का निर्माण किया जाना है, जिनमें 4 पोत एमडीएल, मुंबई द्वारा तथा 3 पोत गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एण्ड इंजीनियर्स लिमिटेड, कोलकाता द्वारा निर्मित किए गए/किया जाना है।
  • P-17A के तहत निर्मित युद्धपोतों की लंबाई 149 मीटर है तथा विस्थापन (Displacement)  6670 टन होगा।
  • ये पोत 28 नॉट (Kn)  की अधिकतम गति प्रदान करने में सक्षम होंगे।
  • P-17A के तहत निर्मित युद्धपोतों को नीलगिरी श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों के नाम से भी जाना जाता है।
  • गौरतलब है, कि P-17A के तहत निर्माणाधीन युद्धपोत, मॉड्‍यूलर पद्धति (Modular Methodology) के प्रयोग द्वारा भारत में निर्मित किए जा रहे पहले प्रमुख सतही पोत हैं।
    • इस पद्धति द्वारा किसी युद्धपोत के निर्माण में सर्वप्रथम सैकड़ों टन वजनी छोटे-छोटे मॉड्‍यूल या ब्‍लॉक निर्मित किए जाते हैं तथा अंत में उन्हें एक (संयोजित) कर दिया जाता है।
    • ध्यातव्य है, कि परियोजना-17A की अनुमानित लागत 45000 करोड़ रुपये है।

P-17A में आयुध

  • इसके तहत निर्मित पोत सतह-से-हवा में मार करने वाले बराक-8 मिसाइलों से सुसज्‍जित होंगे।
    • उल्‍लेखनीय है, कि बराक-8 मिसाइल भारत एवं इस्राइल का संयुक्त उपक्रम है।
  • इसके साथ ही ब्रह्मेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें भी P-17A के पोतों पर तैनात की जाएंगी।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • INS सूरत एवं उदयगिरी को भारतीय नौसेना के इन-हाउस संगठन ‘नौसेना डिजाइन निदेशालय ’ (Directorate of Naval Design: DND) द्वारा डिजाइन किया गया है।
  • इन दोनों पोतों का निर्माण एमडीएल, मुंबई द्वारा किया गया है।

निष्कर्ष

  • नवीनतम प्रौद्योगिकी से लैस दोनों युद्धपोत लगातार बदलते अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ये युद्धपोत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इण्डिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ दृष्टिकोण को प्राप्त करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

संकलन-आदित्य भारद्वाज


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