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भ्रामक विज्ञापनों के संबंध में दिशा-निर्देश

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 9 जून, 2022 को भ्रामक विज्ञापनों के निवारण तथा भ्रामक विज्ञापनों के लिए पृष्ठांकन का मार्गदर्शक सिद्धांत, 2022 (The Guideline for Prevention of Misleading Advertisement and Endorsment for misleading Advertisement, 2022) अधिसूचित किया गया।
  • इसे केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority: CCPA) द्वारा अधिसूचित किया गया।

मार्गदर्शक सिद्धांत जारी करने का उद्देश्य

  • भ्रामक या मिथ्या विज्ञापनों पर रोक लगाना।
  • ऐसे विज्ञापनों से शोषित या प्रभावित होने वाले उपभोक्ताओं की रक्षा करना।

मार्गदर्शक सिद्धांत की मुख्य बातें-

  • इसमें ‘प्रलोभन विज्ञापन’ (Bait Advertisement) , प्रत्यायुक्त विज्ञापन (Surrogate Advertisement) तथा मुक्त दावा विज्ञापन (Free Claim Advertisement) को स्पष्ट परिभाषित किया गया है।
  • भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement)  को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) की धारा 2 (28) के अंतर्गत परिभाषित किया गया है।
  • इसमें बच्‍चों की संवेदनशीलता और कोमलता तथा युवा मन पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देश जारी किए गए-
    •  बच्‍चों को लक्षित करने वाले विज्ञापन, जिनमें स्वास्थ्य चेतावनी आवश्यक है या बच्‍चों द्वारा खरीदने पर रोक है, के विज्ञापन में खेल, संगीत या सिनेमा की किसी हस्ती को नहीं दिखाया जाएगा।
  • विज्ञापनों में दावात्याग (Disclaimer) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये उत्पाद कंपनियों की जिम्मेदारी को सीमित करते हैं। इस संबंध में -
    • दावात्याग किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाकर नहीं किया जाएगा।
    • विज्ञापन जिस भाषा में होगा दावात्याग उसी भाषा में होगा।
  • इसमें अनुमोदन तथा अन्य कार्यवाही किए जाने से पूर्व सेवा प्रदाता, विज्ञापन दाता और विज्ञापन एजेंसी के लिए मार्गदर्शक िदशा-निर्देश दिए गए हैं।
    • इससे विज्ञापनों में पारदर्शिता और स्पष्टता लाकर उपभोक्ता के हितों की रक्षा करना संभव हो सकेगा।
  • इसमें मार्गदर्शक निर्देशों का पालन न किए जाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
    • भ्रामक विज्ञापन के लिए निर्माता, विज्ञापन दाताओं और प्रचारकों पर प्रथम बार नियम का उल्‍लंघन किए जाने पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
    • दूसरी बार नियम का उल्‍लंघन किए जाने पर यह जुर्माने की राशि 50 लाख रुपये तक हो सकती है।
  • प्राधिकरण भ्रामक प्रचारक पर विज्ञापन करने के लिए 1 वर्ष तक प्रतिबंध लगा सकेगा। पुन: भ्रामक प्रचार की दशा में प्रचारक पर यह प्रतिबंध 3 वर्षों तक के लिए लगाया जा सकेगा।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority)

  •  केंद्रीय सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 10 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जुलाई, 2020 में इसकी स्थापना की।
    • इसका मुख्यालय दिल्‍ली में है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के कार्य

  • उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्‍लंघन, अनुचित व्यापार अभ्यासों और मिथ्या/भ्रामक विज्ञापनों को, जो जनता व उपभोक्ताओं के हितों के प्रतिकूल है, से संबंधित मामलों को विनियमित करना।
  • एक प्राधिकरण के रूप में उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देना, संरक्षित करना तथा उन्हें लागू करना।
  • भ्रामक विज्ञापनों को बंद करना तथा भ्रामक विज्ञापनों के लिए विनिर्माताओं/प्रकाशकों पर जुर्माना लगाना आदि।

​​​​​​​संकलन-संतोष कुमार पाण्डेय


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