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वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट : IFPRI

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 12 मई, 2022 को अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (Intenational Food Policy Research Institute: IFPRI) ने ‘वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट, 2022’ (Global Food Policy Report, 2022) जारी की।
  • रिपोर्ट का शीर्षक-‘‘जलवायु परिवर्तन एवं खाद्य प्रणाली’’ (Climate Change & Food System) है।
  • अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान ने वर्ष 2030 तक के लिए वैश्विक खाद्य स्थिति का आकलन प्रस्तुत किया है।
  • रिपोर्ट के अंतर्गत प्रस्तुत अनुमान एक ऐसे मॉडल का हिस्सा है, जिसका उपयोग समग्र खाद्य उत्पादन, खाद्य खपत, प्रमुख खाद्य वस्तु समूहों के शुद्ध व्यापार और भूखे रहने के जोखिम, में आबादी पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए किया गया था।
  • मॉडल के अंतर्गत, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजारों का अनुकरण किया गया है।

प्रमुख बिंदु
भारतीय परिप्रेक्ष्य

  • भारत का खाद्य उत्पादन 16 प्रतिशत गिर सकता है और जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 2030 तक भूख के जोखिम वाले लोगों की संख्या 23 प्रतिशत बढ़ सकती है।
  • वर्ष 2030 में भूख से पीड़ित भारतीयों की संख्या 73.9 मिलियन होने की उम्मीद है और यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को शामिल किया जाए, तो यह बढ़कर 90.6 मिलियन हो जाएगा।
  • वर्ष 2100 तक पूर्‍े भारत में औसत तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस और 4.4 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ने का अनुमान है।
    • इसी प्रकार, भारत में गर्मी की लहरें भी वर्ष 2100 तक तिगुनी होने का अनुमान है।
  • रिपोर्ट में भारतीय परिप्रेक्ष्य में एक सकारात्मक प्रस्तुति दिया गई है-
    •  जलवायु परिवर्तन भारतीयों की औसत कैलोरी खपत को प्रभावित नहीं करेगा और जलवायु परिवर्तन परिदृश्य में भी वर्ष 2030 तक प्रति व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 2600 किलो कैलोरी रहने का अनुमान है।

वैश्विक परिदृश्य

  • आधारभूत अनुमानों से संकेत मिलता है, कि जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में वर्ष 2050 तक वैश्विक खाद्य उत्पादन वर्ष 2010 के स्तर से लगभग 60 प्रतिशत बढ़ जाएगा।
  • जनसंख्या और आय में अनुमानित वृद्धि के कारण, विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों में, विशेष रूप से अफ्रीका में,उत्पादन और मांग अधिक तेजी से बढ़ने का अनुमान है।
  • वर्ष 2030 तक दक्षिण एशिया और पश्चिम और मध्य अफ्रीका में मांस का उत्पादन दोगुना और वर्ष 2050 तक तिगुना का अनुमान है।
    • इस वृद्धि के बावजूद विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति खपत का स्तर विकसित देशों के आधे से भी कम रहेगा।
  • भोजन तक पहंुच में क्षेत्रीय अंतर का मतलब है, कि लगभग 500 मिलियन लोगों को भूख के जोखिम में रहना होगा।
    • रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के कारण लगभग 70 मिलियन से अधिक लोगों को भूख के जोखिम का सामना करना पड़ेगा। 
    • जिसमें, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में 28 मिलियन से अधिक लोग शामिल होंगे।

वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट, 2022 : सिफारिशें

  • संसाधनों का बेहतर प्रशासन :  भूमि और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होना चाहिए। नीति-निर्माताओं को एकीकृत परिदृश्य (Intigrated landscape) प्रबंधन को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • नवाचार के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश : कृषि अनुसंधान एवं विकास के लिए सार्वजनिक वित्तपोषण के मौजूदा स्तरों को दोगुना करने की सिफारिश की गई है।
  • स्वस्थ आहार और सतत खाद्य उत्पादन : स्वस्थ आहार और टिकाऊ खाद्य उत्पादन को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके लिए भोजन के पारिस्थिति पदचिह्न (Foot Print)  में सुधार की आवश्यकता होगी।
  • कुशल मूल्य श्रृंखला : कृषि और खाद्य के लिए गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार नियमों को जलवायु-स्मार्ट नीतियों के साथ संरेखित किया जाता है। जबकि, मूल्य श्रृंखलाओं के साथ सुरक्षित, कुशल भण्डारण और परिवहन के लिए कम उत्सर्जन समाधान में निवेश किया जाता है।
  • जलवायु स्मार्ट वित्त : कृषि क्षेत्रों के लिए सरकारी सहायता का पुन: उपयोग हानिकारक सब्सिडी और हरित नवाचारों में अनुसंधान एवं विकास के लिए वित्त को पुनर्निर्देशित करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है।
  • सामाजिक सुरक्षा : जलवायु परिवर्तन से बुरे स्तर पर प्रभावित गरीब ग्रामीण आबादी की सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से रक्षा करनी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI)

  • वर्ष 1975 में स्थापित IFPRI का उद्देश्य भूख और कुपोषण से मुक्त दुनिया है।
  • यह विकासशील देशों में गरीबी को कम करने और भूख और कुपोषण को समाप्त करने के लिए अनुसंधान आधारित नीति समाधान प्रदान करता है।

संकलन-पंकज तिवारी
 


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