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समृद्धि के लिए भारत-प्रशांत आर्थिक रूपरेखा

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 23 मई, 2022 को टोक्यो, जापान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और 12 क्षेत्रीय समकक्षों ने आधिकारिक तौर पर समृद्धि के लिए भारत-प्रशांत आर्थिक रूपरेखा (Indo-Pacific Economic Framework for Prosperity: IPEF) को लांच किया।
  • इन 13 क्षेत्रीय भागीदारों में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, भारत, इण्डोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, न्यूजीलैण्ड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैण्ड, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं वियतनाम शामिल हैं।
  • ये 13 देश कुल मिलाकर विश्व की 40 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (GDP)  का प्रतिनिधित्व करते हैं।

समृद्धि के लिए भारत-प्रशांत आर्थिक रूपरेखा क्या है ?

  • आईपीईएफ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लचीलापन, स्थिरता, समग्रता, आर्थिक विकास, निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से भागीदार देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने हेतु एक पहल है।
  • इस पहल को लेकर 24 मई, 2022 को पहल से संबंधित देशों ने वक्तव्य जारी किया, जिसके प्रमुख बिंदु निम्नवत हैं-

व्यापार 

  • उच्‍च मानक, समावेशी, मुक्त, एवं निष्पक्ष व्यापार प्रतिबद्धताओं का निर्माण करना।
  • व्यापार एवं प्रौद्योगिकी नीति में नए और रचनात्मक दृष्टिकोण को विकसित करना, जाे आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा देने वाले उद्देश्यों के व्यापक समूह को आगे बढ़ाते हैं।
  • टिकाऊ और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं तथा श्रमिकों एवं उपभोक्ताओं को लाभान्‍वित करते हैं।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग

आपूर्ति श्रृंखला-

  • आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता, विविधता-सुरक्षा और स्थिरता लाने की प्रतिबद्धता, ताकि उन्हें लचीला और अच्‍छी तरह से एकीकृत बनाया जा सके।

स्वच्‍छ ऊर्जा, डीकार्बोनाइजेशन और आधारभूत संरचना

  • पेरिस समझौते तथा IPEF देशों के लक्ष्यों के अनुरूप अर्थव्यवस्थाओं को डीकार्बोनाइजेशन करने और जलवायु प्रभावों के प्रति लचीलापन लाने के लिए स्वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती में तेजी लाना।
  • इसमें प्रौद्योगिकियों पर सहयोग को गहरा करना, रियायती वित्त सहित अन्य वित्त जुटाना और टिकाऊ एवं स्थायी बुनियादी ढांचे के विकास का समर्थन करना और तकनीकी सहायता प्रदान करके प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाना।
  • कनेक्‍टिविटी बढ़ाने के तरीकों की तलाश करना।
  • कर और भ्रष्टाचार विरोध
  • IPEF देश भारत-प्रशांत क्षेत्र में कर चोरी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मौजूदा बहुपक्षीय दायित्वों, मानकों और समझौतों के अनुरूप प्रभावी और मजबूत कर, एंटी मनी लॉण्ड्रिंग और रिश्वत विरोधी व्यवस्था को लागू करके निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध दिखाना।
  • इसमें विशेषज्ञता को साझा करना और जवाबदेह एवं पारदर्शी प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक क्षमता निर्माण का समर्थन करने के तरीकों की तलाश करना शामिल है।
  • IPEF फ्रेमवर्क उच्‍च-मानक प्रतिबद्धताओं को स्थापित करने के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करता है, जो निम्नवत हैं-

1-संबद्ध अर्थव्यवस्था (Connected Economy)

  • इसमें व्यापक मुद्दों को शामिल किया जाएगा; जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था हेतु उच्‍च मानकों का नियम, जिनमें डाटा प्रवाह एवं स्थानीयकरण पर मानक शामिल हैं। इनके अतिरिक्त ई-कॉमर्स क्षेत्र को बढ़ावा, ऑनलाइन गोपनीयता और भेदभावपूर्ण और अनैतिक मुद्दों को संबोधित करना। 
    • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग
    • मजबूत श्रम एवं पर्यावरण मानकों और कॉर्पोरेट जवाबदेही के प्रावधानों की तलाश करना।

2.लचीली अर्थव्यवस्था (Resilient Economy)

  • अधिक लचीली अर्थव्यवस्था बनाने हेतु आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाना।
  • आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधान को समाप्त करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करना, खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं की मैपिंग करना।

3.स्वच्‍छ अर्थव्यवस्था (Clean Economy)

  • स्वच्‍छ ऊर्जा डीकार्बोनाइजेशन और बेहतर बुनियादी ढांचे का विकास।
  • नवीकरणीय ऊर्जा, कार्बन हटाना, ऊर्जा दक्षता मानक स्थापित करना और मीथेन उत्सर्जन से निपटने के नए उपायों सहित जलवायु संकट से निपटने के प्रयासों में तेजी लाना।

4.निष्पक्ष अर्थव्यवस्था (Fair Economy)

  • बहुपक्षीय दायित्वों के अनुरूप प्रभावी कर, एंटी मनी लॉण्ड्रिंग रिश्वत रोधी शासन को लागू करना।

संकलन- मनीष प्रियदर्शी


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