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आईएनएस निशंक एवं अक्षय सेवामुक्त

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 3 जून‚ 2022 को ’आईएनएस निशंक’ (INS NISHANK) को सेवामुक्त किया गया।
  • इसके साथ ही ’आईएनएस अक्षय’ (INS AKSHAY) को भी सेवामुक्त किया गया।
  • दोनों ’कॉर्वेट’ (Corvette) को मुंबई‚ महाराष्ट्र में नेवल (Naval) डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में सेवामुक्त किया गया।

कॉर्वेट (Corvette)

  • नौसेना (Navy) में कॉर्वेट छोटे युद्धपोत होते हैं‚ जिनका उपयोग आमतौर पर समुद्री गश्त या तेज हमले जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता है।
  • इस प्रकार पोतों की तैनाती आमतौर पर उन क्षेत्रों में होती है‚ जहां समुद्री घुसपैठ का खतरा अधिक होता है।
  • एक कॉर्वेट का वजन आमतौर पर 500-2000 टन के बीच होता है।

आईएनएस निशंक

  • यह वीर क्लास कॉर्वेट का चौथा पोत था।
  • आईएनएस निशंक (K43), 12 सितंबर‚ 1989 को नौसेना में शामिल किया गया था।
  • यह K43 कॉर्वेट‚ 22 मिसाइल वेसल स्क्वाड्रन का हिस्सा था।
  • कमाण्डर (अब सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल) एसपीएस चीमा इस पोत के पहले कमाण्डिंग ऑफिसर थे।
  • गौरतलब है‚ कि 28 अप्रैल‚ 2016 को आईएनएस वीर (Veer) और आईएनएस निपत (Nipat) नौसेना से सेवामुक्त होने वाले पहले वीर-श्रेणी के कॉर्वेट थे।
  • वर्तमान में इस श्रेणी के 7 कॉर्वेट संचालन में हैं।

आईएनएस अक्षय

  • यह अभय क्लास कॉर्वेट का तीसरा पोत था।
  • इसे (P35) 10 दिसंबर‚ 1990 को नौसेना में शामिल किया गया था।
  • यह कॉर्वेट 23 पैट्रोल (Patrol) वेसल स्क्वाड्रन का हिस्सा था।
  • कमाण्डर (अब सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल) आर. के. पटनायक इस पोत के पहले कमाण्डिंग ऑफिसर थे।
  • गौरतलब है‚ कि 27 जनवरी‚ 2017 को आईएनएस अग्रेय (Agray) नौसेना से सेवामुक्त होने वाला पहला अभय श्रेणी का कॉर्वेट था।
  • वर्तमान में इस श्रेणी के 2 कॉर्वेट संचालन में हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • दोनों पोतों का निर्माण रूसी (Russian) कंपनी द्वारा किया गया था।
  • इसके साथ ही पोतों को तत्कालीन सोवियत संघ के पोटी (अब जॉर्जिया) में शामिल किया गया था।
  • जहाजों ने 32 वर्षों से अधिक की सेवा में‚ कारगिल युद्ध के दौरान ’ऑपरेशन तलवार’ और वर्ष 2001 में ’ऑपरेशन पराक्रम’ सहित कई नौसैनिक अभियानों में भाग लिया।
  • विदित हो‚ वर्ष 2016 (सितंबर-अक्टूबर) में आईएनएस निशंक को उरी (Uri) हमलों के बाद तैनात किया गया था।

संकलन — आदित्य भारद्वाज


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