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Post at: Jun 13 2022

ग्रेटर पन्‍ना लैण्डस्कैप के लिए एकीकृत परिदृश्य प्रबंधन योजना

एकीकृत परिदृश्य प्रबंधन

  • फूड एण्ड एग्रीकल्‍चर ऑर्गनाइजेशन (Food and Agriculture Organization:FAO) के अनुसार, एकीकृत भू-परिदृश्य प्रबंधन एक ऐसे क्षेत्र में उत्पादन प्रणालियों और प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन है, जो महत्वपूर्ण पारिस्थितकीय तंत्र सेवाओं का उत्पादन करने के लिए पर्याप्त है और भूमि का उपयोग करने वाले और उन सेवाओं का उत्पादन करने वाले लोगों द्वारा प्रबंधित करने हेतु पर्याप्त रूप से छोटा है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 2 जून, 2022 को जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव ने ग्रेटर पन्‍ना लैण्डस्कैप के लिए एकीकृत भू-परिदृश्य प्रबंधन (Intigrated Landscape Management) योजना की अंतिम रिपोर्ट जारी की।
  • इस एकीकृत भू-परिदृश्य प्रबंधन योजना को भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India : WII) ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के संबंध में तैयार किया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • एकीकृत भू-परिदृश्य प्रबंधन योजना को भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. के. रमेश के नेतृत्व में तैयार किया गया है।
  • एकीकृत भू-परिदृश्य प्रबंधन योजना में बाघ, गिद्ध और घड़ियाल जैसी प्रमुख प्रजातियों के बेहतर आवास संरक्षण और प्रबंधन के लिए प्रावधान हैं।
  • यह जैव विविधता संरक्षण और मानव कल्‍याण, विशेष रूप से वन आश्रित समुदायों के लिए परिदृश्य को समग्र रूप से समेकित करने में मदद करेगा।
  • इससे मध्य प्रदेश में नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य तथा उत्तर प्रदेश में रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य के साथ संपर्क को मजबूत करके इस परिदृश्य में बाघ रखने की क्षमता में वृिद्ध होने की उम्मीद है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना

  • इसे अंतरराज्यीय नदी स्थानांतरण मिशन हेतु एक मॉडल परियोजना के रूप में माना जाता है।
  • राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan: NPP) के तहत, नदियों को जोड़ने वाली यह पहली परियोजना है।
  • इस परियोजना में दाऊधन बांध बनाकर केन और बेतवा नदी को नहर के जरिए जोड़ना है। निचली अर्रे परियोजना, कोठा बैराज और बीना संकुल बहुउद्देशीय परियोजना के माध्यम से केन नदी के पानी को बेतवा में पहुंचाना है।
  • इस परियोजना के तहत, केन नदी से पानी  बेतवा नदी में स्थानांतरित किया जाएगा।
  • केन (जबलपुर जिले के अहरिगवां गांव से) और बेतवा (रामसेन जिले के निकट बरखेड़ा गांव से) नदियों का उद्‍गम मध्य प्रदेश में होता है।
  • ये दोनों नदियां यमुना नदी की सहायक नदियां हैं।  
  • इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।

नोट-

  1. राजघाट, परीछा और माताटीला बांध बेतवा नदी पर स्थित हैं।
  2. केन नदी, पन्‍ना बाघ अभयारण्य से होकर गुजरती है।

पन्‍ना बाघ अभयारण्य पर नकारात्मक प्रभाव

  • दाऊधन बांध का निर्माण केन नदी पर किया जाएगा।
  • दाऊधन बांध बनाए जाने से पन्‍ना बाघ अभयारण्य का लगभग 6,017 हेक्टेयर क्षेत्र डूब जाएगा।
  • जिसमें लगभग4000 हेक्टेयर क्षेत्र कोर क्षेत्र के तहत आता है, जो बाघों का आवास है।
     

संकलन मनीष प्रियदर्शी

 

 


 


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